सत्येंद्र पीएस-
डॉ विनोद मल्ल को धीरूभाई अंबानी यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर में सदस्य के रूप में 3 साल के लिए नामित करने के लिए आमंत्रित किया गया है। आसान भाषा मे कहें तो डॉ विनोद मल्ल यूनिवर्सिटी की पॉलिसी तय करने वाले बोर्ड का सदस्य बनने जा रहे हैं, अगर उन्होंने आमंत्रण स्वीकार कर लिया।
बहुत बहुत शुभकामनाएं। गोरखपुर और पूर्वांचल का नाम आप इसी तरह रोशन करते रहें। तमाम निराशाओं के बीच एकाध अच्छी खबरें एनर्जी दे देती हैं।
प्रोफेसर विनोद कुमार मल्ल का प्रोफाइल देखें-

प्रोफेसर विनोद कुमार मल्ल एक वरिष्ठ पूर्व पुलिस अधिकारी, शिक्षाविद् और सामाजिक-सांस्कृतिक चिंतक हैं। उन्होंने 2015 में DAIICT से “फीचर आधारित हैश जेनरेशन का उपयोग करके डिजिटल छवियों में छेड़छाड़ का पता लगाना” विषय पर पीएचडी प्राप्त की।
भारतीय पुलिस सेवा में 35 वर्षों की विशिष्ट सेवा के दौरान वे विभिन्न नेतृत्व पदों पर कार्यरत रहे और पुलिस महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए। वे भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें भारतीय पुलिस पदक तथा राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है।
शिक्षा क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही है। उन्होंने आईआईआईटी गांधीनगर में डिजिटल फोरेंसिक और सेंट्रल गुजरात यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित पाठ्यक्रमों में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में योगदान दिया है। उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में तकनीकी और प्रशासनिक विषयों पर व्याख्यान भी दिए हैं।
प्रो. मल्ल वर्तमान में “बुद्ध से कबीर तक” नामक एक सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें तकनीकी नवाचारों में गहरी रुचि है, विशेषकर वे जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
उनकी शिक्षा की शुरुआत 1984 में IIT (BHU), वाराणसी से बीटेक के साथ हुई थी, जिसके बाद वे 1986 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए।
मुख्य विशेषताएं:
- पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP)
- Ph.D. in Digital Forensics (DAIICT, 2015)
- विजिटिंग फैकल्टी, IIIT गांधीनगर व सेंट्रल गुजरात यूनिवर्सिटी
- पूर्व निदेशक, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय
- सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन “बुद्ध से कबीर तक” के प्रमुख
- राष्ट्रपति पुलिस पदक व भारतीय पुलिस पदक से सम्मानित
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