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DREAM11 बैन : टीम इंडिया की जर्सी पर छप सकता है अदाणी, टाटा, जियो या जेरोधा का नाम!

नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) जल्द ही टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सरशिप के लिए नया टेंडर जारी करने की तैयारी में है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब मौजूदा जर्सी स्पॉन्सर ड्रीम11 को देश में प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।

दरअसल, संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने हाल ही में प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025 पारित कर दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही भारत में रियल-मनी गेमिंग (RMG) पूरी तरह से बैन हो जाएगी। इसका सीधा असर ड्रीम11, MPL और जूपी गेम्स जैसी कंपनियों पर पड़ेगा, जिन्होंने पहले ही अपने RMG ऑपरेशंस बंद करने की घोषणा कर दी है।

वर्तमान में टीम इंडिया की जर्सी पर ड्रीम11 का लोगो लगा हुआ है। नए कानून लागू होने के बाद यह स्पॉन्सरशिप अवैध हो जाएगी और बीसीसीआई पर जुर्माना भी लग सकता है। हालांकि, बोर्ड फिलहाल राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, “कानून लागू होने के बाद हम स्थिति का आकलन करेंगे। अगर अनुमति मिली तो ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों से स्पॉन्सरशिप लेंगे, वरना किसी भी तरह का अनुबंध नहीं करेंगे।”

सूत्रों के मुताबिक, बोर्ड इस बात की कोशिश कर सकता है कि राष्ट्रपति की मंजूरी एशिया कप तक टल जाए। इससे टीम इंडिया मौजूदा जर्सी में खेल पाएगी और बीसीसीआई को नया स्पॉन्सर तलाशने के लिए थोड़ा समय मिल जाएगा।

गौरतलब है कि ड्रीम11 ने 2023 में बायजूस को रिप्लेस करते हुए टीम इंडिया की जर्सी स्पॉन्सरशिप ली थी। तीन साल का यह करार करीब 358 करोड़ रुपये का है, जिसमें घरेलू मैचों के लिए 3 करोड़ और विदेशी मैचों के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति मैच शामिल हैं।

टीम इंडिया का अगला बड़ा असाइनमेंट एशिया कप 2025 है, जिसकी शुरुआत 9 सितंबर से यूएई में होगी। वहीं महिला टीम 14 सितंबर से ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज खेलेगी। संभावित नए स्पॉन्सर के तौर पर टाटा, जियो, अदाणी जैसी बड़ी कंपनियों और जेरोधा जैसे नए-युग के ब्रांड्स के नाम चर्चा में हैं।


नई दिल्ली: देशभर में रियल-मनी गेमिंग (RMG) पर लगाम कसते हुए प्रमुख गेमिंग कंपनियों ने अपने पैसे वाले गेम्स बंद कर दिए हैं। इनमें Dream11, Zupee, Mobile Premier League (MPL), Games24x7 का My11Circle, Gameskraft का RummyCulture और Probo शामिल हैं।

इस फैसले के पीछे हाल ही में संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग (प्रमोशन और रेग्युलेशन) विधेयक, 2025 है, जिसके मुताबिक फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर, रमी और किसी भी तरह के पैसों से जुड़े गेम अब पूरी तरह प्रतिबंधित होंगे। यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बन जाएगा।

Dream11 पर सबसे बड़ा असर

Dream11 और इसकी पेरेंट कंपनी Dream Sports की 90% से ज्यादा कमाई RMG से होती थी। FY24 में कंपनी की कमाई करीब ₹9,600 करोड़ रही, जो ज्यादातर क्रिकेट वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट्स के दौरान हुए फैंटेसी कॉन्टेस्ट से आई थी। अब कंपनी ने पेड गेम्स बंद करने का ऐलान किया है और FanCode, DreamSetGo और Dream Game Studios जैसे गैर-RMG कारोबार पर फोकस करेगी। बड़े पैमाने पर छंटनी की आशंका भी जताई जा रही है।

Zupee और MPL का रुख

गुरुग्राम स्थित Zupee ने पैसे वाले गेम पूरी तरह बंद कर दिए हैं, लेकिन लूडो सुप्रीम, स्नेक्स एंड लैडर्स और ट्रंप कार्ड जैसे फ्री-टू-प्ले गेम्स जारी रहेंगे। वहीं MPL ने भारत में पैसे वाले गेम्स सस्पेंड कर दिए हैं और अब केवल फ्री-टू-प्ले गेम्स पर ध्यान देगा। कंपनी की आधी कमाई विदेशों से आती है, इसलिए वहां ऑपरेशन जारी रहेंगे।

अन्य कंपनियां भी प्रभावित

  • Games24x7 का My11Circle और Gameskraft का RummyCulture भी बंद हो गए हैं।
  • Probo ने तुरंत RMG ऑपरेशन रोकते हुए कहा कि वह केवल “इन्फॉर्मेशन मार्केट” पर काम करेगा।
  • Nazara Technologies ने भी कहा है कि उसका सीधा RMG कारोबार नहीं है, लेकिन PokerBaazi में हिस्सेदारी के चलते असर पड़ेगा।

भारी नुकसान का अनुमान

गेमिंग इंडस्ट्री FY24 में $3.8 बिलियन की थी, जिसमें से $2.4 बिलियन केवल RMG से आया था। अब बैन के कारण लाखों नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। उद्योग से जुड़े अनुमान बताते हैं कि इसमें 2 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं और सालाना ₹20,000 करोड़ टैक्स योगदान होता है।

सरकार और उद्योग आमने-सामने

सरकार का कहना है कि रियल-मनी गेमिंग समाज के लिए “नशे जैसी समस्या” बन चुकी है और इससे युवा आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव झेल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल को ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने और मध्यम वर्गीय परिवारों को आर्थिक नुकसान से बचाने वाला कदम बताया।

हालांकि, ऑल इंडिया गेमिंग फेडरेशन (AIGF) और उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि बिना कंसल्टेशन के यह कानून लाया गया और इससे पूरा सेक्टर खत्म हो सकता है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे वैध ऑपरेटर भूमिगत हो सकते हैं और विदेशी प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बढ़ सकता है, जिससे सरकार को सालाना $4 बिलियन से ज्यादा GST का नुकसान होगा।

Dream11, My11Circle और Zupee जैसे प्लेटफॉर्म IPL और क्रिकेट स्पॉन्सरशिप में बड़े विज्ञापनदाता रहे हैं। बैन के चलते अब विज्ञापन और खेल प्रायोजन पर भी बड़ा असर पड़ेगा।


नई दिल्ली। देश में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए बड़ा बदलाव आया है। राज्यसभा ने गुरुवार को ‘प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग बिल, 2025’ को मंजूरी दे दी। यह विधेयक लोकसभा में एक दिन पहले ही पास हो चुका था। राज्यसभा में इसे वॉइस वोट से पारित किया गया, हालांकि विपक्ष ने इस पर व्यापक बहस की मांग करते हुए विरोध जताया।

ऑनलाइन गेमिंग पर बड़े प्रावधान

नए कानून के तहत ऑनलाइन गेमिंग के पूरे परिदृश्य में व्यापक बदलाव होंगे—

  • रियल-मनी गेमिंग बैन: अब देशभर में पैसों पर आधारित सभी ऑनलाइन गेम (चाहे स्किल-बेस्ड हों या चांस-बेस्ड) पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।
  • विज्ञापन और पेमेंट पर रोक: इन खेलों से जुड़े किसी भी तरह के विज्ञापन, प्रमोशनल टाई-अप और वित्तीय लेन-देन अब गैरकानूनी होंगे।
  • सुरक्षित खेल के लिए ढांचा: ई-स्पोर्ट्स, शैक्षिक और सामाजिक गेम्स को एक नियामक ढांचे के तहत लाया जाएगा, जिससे खिलाड़ियों की सुरक्षा और उद्योग की जवाबदेही तय होगी।

सरकार का पक्ष

विधेयक पेश करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रियल-मनी गेम्स जनता के स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति दोनों के लिए खतरा बन चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि भारतीय यूज़र्स हर साल 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा रहे हैं और करीब 45 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में लत और नुकसान से प्रभावित हुए हैं।

मंत्री ने यह भी बताया कि ऐसे गेमिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और यहां तक कि आतंकवादी फंडिंग तक के लिए हो रहा था। इसीलिए सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा मानते हुए सख्त कानून लाने का फैसला किया।

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