दीपांकर-
दिल्ली विश्वविद्यालय के जर्नलिज्म विभाग में गेस्ट लेक्चरर के लिए इंटरव्यू होना है, इसके लिए पब्लिक नोटिस निकल गया, नोटिस में बताया गया कि इंटरव्यू 11, 12 और 13 अगस्त को होगा.
लेकिन कुछ अभ्यर्थियों को ईमेल करके इंटरव्यू देने के लिए 10 अगस्त को ही बुला लिया गया. बाकी अभ्यर्थियों का आरोप है की 10 अगस्त के इंटरव्यू के लिए ना तो कोई नोटिस निकाला गया और ना ही बाकी बचे सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से इसकी सूचना दी गई.
सिर्फ कुछ सेलेक्टेड अभ्यर्थियों को ही व्यक्तिगत रूप से ईमेल भेजकर 10 अगस्त को इंटरव्यू देने के लिए बुला लिया गया. बाकी अभ्यर्थियों को इसकी कोई जानकारी ही नहीं थी.
कुछ अभ्यर्थियों को जब व्यक्तिगत स्रोतों के माध्यम से इसकी जानकारी हुई तो वो 10 अगस्त को दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म पहुंच गए. जहां उन्हें स्पष्टता से कोई बात नहीं बताई गई ऐसा उनका आरोप है.
क्या गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति के मामले में प्रकिया को ताक पर रखा जा रहा है? क्या पार्दर्शिता सुनिश्चित नहीं हो रही है?
जिन अभ्यर्थी से मेरी बात हुई वो तो DSJ के चेयरमैन के दागदार दामन की तरफ भी इशारा करके उन पर भ्रष्ट होने के आरोप लगाते हैं.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म (DSJ) में मौजूदा चेयरमैन बृजकिशोर कुठियाला लम्बे समय से कथित तौर पर विवादों में रहने वाले व्यक्ति रहे हैं, जेल वगैरह भी जा चुके हैं.
ऐसे में 11, 12 और 13 अगस्त 2025 को आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) इंटरव्यू में पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

यह पहला अवसर नहीं है जब चेयरमैन पर ऐसे आरोप लगे हों। अतीत में भी उन पर पक्षपात, नियम तोड़ने और चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोप लग चुके हैं।
शैक्षणिक हलकों में यह चर्चा है कि यह घटनाएं एक बड़े पैटर्न का हिस्सा हैं, जिसमें चयन प्रक्रिया को नियमों से हटकर नियंत्रित किया जाता है।
UGC गेस्ट फैकल्टी गाइडलाइंस स्पष्ट करती हैं कि चयन पारदर्शी और सबके लिए समान अवसर वाला होना चाहिए, लेकिन DSJ के इस मामले में इन मानकों का पालन न करने के आरोप हैं।
शिक्षा मंत्रालय, UGC जो भी संज्ञान ले सकता है इस घटना का संज्ञान ले और अभ्यर्थियों का चयन प्रक्रिया में भरोसा सुनिश्चित करे.
जय विश्वगुरु भारत!!



