सुप्रीम कोर्ट के आदेश कड़ाई से लागू करा दिए जाएं तो मुख कैंसर में 90 प्रतिशत कमी आ जाएगी

विश्व कैंसर दिवस : 4 फरवरी पर विशेष नई दिल्ली । देश में ओरल कैंसर जिस तरह से महामारी के रूप में फैल रहा है, यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो अकेले भारत में अगले तीन साल में करीब 9 लाख जिंदगियां काल के ग्रास में समाहित हो जाएंगी। यही नहीं, ओरल कैंसर के जनक तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध नहींं लगा तो इन लाखों लोगों की मौत के अलावा 17 लाख से अधिक लोगों को यह जानलेवा बीमारी जकड़ लेगी। इन सबको बचाया जा सकता है बशर्ते सर्वोच्च न्यायालय के 23 सितंबर-2016 के निर्णय की राज्य सरकारें सख्ती से पालना करें। इस वर्ल्ड कैंसर दिवस पर हम सबको सकारात्मक रूप से इसे पालना कराने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। इसी से लाखों लोगों की जिंदगी को बचाया जा सकेगा।

इंडियन कांउसिल मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के अनुसार साल 2020 तक 17.3 लाख लोगों को जानलेवा बीमारी कैंसर जकड़ लेगी। इससे 8.8 लाख लोग कैंसर की वजह से अपनी जान गंवा चुके होंगे। इससे न केवल लाखों परिवार प्रभावित होंगे बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। यह हैरानीजनक तथ्य हाल में ब्रिक्स द्वारा जारी किए गए सर्वे रिपोर्ट में सामने आये हैं। इस सर्वे के मुताबिक वर्ष-2012 तक तम्बाकू जनित उत्पादों के सेवन से न केवल देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है बल्कि इसकी जीडीपी में भी गिरावट दर्ज की गई है। कैंसर के उपचार पर हुए भारी भरकम खर्च की वजह से 2012 में भारत ने कुल कार्यक्षमता में 6.7 बिलियन की कमी दर्ज की गई जो कि हमारी आर्थिक विकास दर का 0.36 प्रतिशत है। दुनिया भर में एड्स, मलेरिया और टीबी से ज्यादा कैंसर पीड़ितों की मौत हो जाती है। वहीं मौत के दस प्रमुख कारणों में से कैंसर प्रमुख है। यह स्थिति पब्लिक हैल्थ के लिए एक बड़ी चुनौती उभरकर सामने आई है। इससे के लिए पूरी तरह से तंबाकू पर प्रतिबंध हो तभी कैंसर को रोका जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की प्रभावी रूप से हो पालना

गौरतलब है कि 23 सितंबर-2016 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन्स पैंक में तम्बाकू जनित पदार्थों (गुटका, जर्दा, पान मसाला, खैनी इत्यादि) की बिक्री पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही कोर्ट ने एफएसएसएआई की 2.3.4 के तहत खाद्य वस्तुओं के साथ तंबाकू और निकोटीन युक्त पादर्थों की बिक्री प्रतिबंध को पूर्णतया लागू करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश की राज्य सरकारों ने अभी तक प्रभावी रूप से पालना नहीं की जिस कारण आज भी इनकी बिक्री खुलेआम हो रही है। इसी का दुष्परिणाम है कि देश में तम्बाकू जनित पदार्थों के सेवन से मुंह व गले के कैंसर रोगियों में निरंतर इजाफा हो रहा है। सर्वे के मुताबिक तम्बाकू जनित पदार्थों की वजह से ही 90 फीसदी लोग मुंह व गले के कैंसर रोग से ग्रसित हो रहे हैं। राज्य सरकारों को चाहिए कि देश में ही नहीं बल्कि विश्वभर में महामारी की तरह फैल रहे कैंसर रोग से बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट की निर्देशों की प्रभावी रूप से पालना करें।

पांच ब्रिक्स देशों में गंभीर चिंतन का विषय

कैंसर के उपचार पर होने वाले भारी भरकम खर्च व बिगड़ती अर्थव्यवस्था को लेकर ब्रिक्स देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक केवल इन पांच ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, साउथ अफ्रीका) में विश्व की 40 फीसदी से अधिक जनसंख्या निवास करती है, जबकि इनका वैश्विक विकास दर का 25 फीसदी योगदान है। वहीं, 2012 में कैंसर से संबंधित मौतों के कारण इन पांचों देशों की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है जिसके तहत करीब 46.3 बिलियन डालर का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा।

वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिम्स (वीओटीवी) के संस्थापक एंव टाटा मैमोरियल अस्पताल के कैंसर रोग विशेषज्ञ डा.पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि तंबाकू के इस्तेमाल को कम करने के लिए राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सख्ती से पालना करवानी चाहिए। जब हमें पता है कि 90 प्रतिशत मंुह के कैंसर का कारक तंबाकू उत्पाद है, इस स्थिति में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना सुनिश्चिित कराने में क्या रोक है। प्रतिबंध की पालना सुनिश्चिित करनी चाहिए ताकि प्रतिवर्ष तंबाकू से होने वाली दस लाख मौतों को बचाया जा सके।

इसके अलावा स्वस्थ जीवन शैली को अपनाने से भी कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है। ऐसा होने से कैंसर के ईलाज पर पर खर्च हो रहे भारी भरकम बजट के बोझ को कम कर देश की अर्थव्यवस्था को सुधारा जा सकता है। संबध हैल्थ फांउडेशन (एसएचएफ) के ट्रस्टी संजय सेठ ने कहा कि ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे (गेटस्) के अनुसार भारत में 26.7 करोड़ लेाग तंबाकू का उपभोग करते है। जबकि 5500 बच्चे प्रतिदिन तंबाकू उत्पादों का सेवन शुरु करतें है। इनमें से अधिकतर की मौत को तंबाकू पर प्रतिबंध करके बचाया जा सकता है। पूर्व रेल मंत्री व सांसद दिनेश त्रिवेदी ने बताया कि युवाओं को अपने आत्मविश्वास को हमेशा साथ रखना चाहिए, न कि किसी ब्रांडेड सिगरेट के पैकेट को। अधिकतर युवा सिगरेट इत्यादि का सेवन करतें है लेकिन आप अपने स्वस्थ जीवनशैली को चुनें, न कि कैंसर को।

Enforce chewing tobacco ban – prevent 90% oral cancers: World Cancer Day!

New Delhi, February 3, 2017: As the adage goes, “Prevention is better than cure,” 90% of oral cancers can be prevented if the Governments implement the Supreme Court’s order which banned chewing tobacco being sold rampantly in twin packs. The Indian Council Medical Research (ICMR) estimates, India will have more than 17.3 lakh new cancer cases and more than 8.8 lakh deaths due to cancer by 2020. This will not only affect the individual health, families of the cancer patients, but also adversely affect the economy of the country as a whole. Recent study published in the Journal of Cancer Epidemiology, India recorded total productivity loss of $6.7 billion in 2012 because of cancer, representing 0.36% of our GDP.

Cancer accounts for more deaths worldwide than AIDS, malaria and tuberculosis combined. According to the World Economic Forum (WEF) – “cancer is among one of the three greatest risks to the global economy.” In India, cancer is one of the 10 leading causes of deaths in India and is an increasing public health challenge. Tobacco use is the leading avoidable risk factor for cancer and about 1 in 5 global cancer deaths is caused by tobacco use.

How can 90% oral cancers be prevented?

Tobacco is the singlemost preventable cause of death. 90% of oral cancers and 40% of all cancers are caused due to tobacco use. With these alarming numbers, the Honourable Supreme Court on September 23, 2016 had imposed ban on sale of tobacco in twin-packs like gutka, tobacco, pan masala, khaini etc. There is no effective enforcement of this order. This is leading to continuous increase in patients suffering from head and neck cancer (oral and throat cancer).

Speaking on the World Cancer Day VOTV (Voice of Tobacco Victims) Founder , Dr Pankaj Chaturvedi, Professor, Surgical Oncology Tata Memorial Hospital said “When we are aware what causes 90% of oral cancers and the law is there to ban these chewing tobacco products in twin packs, then what is stopping the enforcement. 10 lac deaths every year due to tobacco is alarming. Government must strictly enforce the ban in order to prevent 90% of cancers.”

In a tweet, Prime Minister Modi had wished a healthier nation and tobacco free society.

Subject of Serious Discussion in BRICS countries

The worries of five BRICS countries – Brazil, Russia, India, China and South Africa have increased over the heavy expenses on treatment of cancer and deteriorating economy. According to this study, these five BRICS countries comprise more than 40% of the world’s population and contribute 25% to the global GDP.  The economies of these five countries have lost around 46.3 billion dollars on cancer related deaths.

Sambandh Health Foundation (SHF) Trustee and Head of Tobacco Control, Sanjay Seth said, “As per the Global Adult Tobacco Survey 2017, there are 26.7 crore users of tobacco in India. 5500 children initiate tobacco use everyday. One-third of these tobacco users will die prematurely. Lacs and lacs of Indian families are devastated with cancer deaths, which are preventable. Tobacco is the single most preventable cause of death.”

Addressing youngsters in a University, Member of Parliament, Dinesh Trivedi said, “confidence comes from the way you carry yourself and not from the brand of cigarette you smoke. I am aware that many college students smoke cigarettes and I request them to choose a healthy lifestyle instead of a cancerous hobby,” Trivedi said.

The World Cancer Day originated in 2000 at the first World Summit Against Cancer, which was held in Paris. The World Cancer Day was founded by the Union for International Cancer Control (UICC) to support the goals of the World Cancer Declaration, written in 2008. The primary goal of the World Cancer Day is to significantly reduce illness and death caused by cancer by 2020.

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