संजय कुमार सिंह-
ईवीएम पर मेरी किताब, ‘ईवीएम वाशिंग मशीन में धुली’ छपकर तैयार है। यह ईवीएम पर 2010 में आई दो किताबों, सुब्रमण्यम स्वामी और एस कल्याणरमण की “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स : अनकांस्टीट्यूशनल एंड टैम्परेबल” (असंवैधानिक और छेड़छाड़ योग्य) तथा दूसरी भाजपा नेता, जीवीएल नरसिम्हा राव की, “डेमोक्रेसी ऐट रिस्क! कैन वी ट्रस्ट आवर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन्स?” (लोकतंत्र खतरे में! क्या हम अपनी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर भरोसा कर सकते हैं?) के बाद की कहानी है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त नवीन चावला की एक किताब 2019 में आई थी, एवरी वोट काउंट्स द स्टोरी ऑफ इंडियाज इलेक्शन में एक अध्याय ईवीएम पर भी है – “दि ईवीएम : अ कंट्रोवर्सी दैट रिफ्यूजेज टू डाई” (ईवीएम : एक विवाद जो खत्म होने का नाम नहीं लेता)। पुस्तक में उसका भी जिक्र है। एसवाई कुरैशी पर निशिकांत दुबे के आरोपों को जानने के बाद अंग्रेजी की इन किताबों और ईवीएम का पूरा मामला हिन्दी में समझने के लिए इससे बेहतर कोई तरीका नहीं हो सकता है।
पुस्तक की प्रस्तावना और भूमिका से पहले ईवीएम का मामला क्यों गंभीर में 15 बिन्दु हैं और विस्तार से बताया गया है कि इस किताब की जरूरत क्यों है। किताब पढ़कर आप जान सकेंगे कि ईवीएम हैक करके दिखाने की चुनाव आयोग की चुनौती क्या थी और कोई क्यों नहीं आगे आया। पूरे मामले में सबसे दिलचस्प यह तथ्य है कि भाजपा ही इसे पहले असंवैधानिक और छेड़छाड़ योग्य बता रही थी और अब इसका बचाव करती है।
ईवीएम और चुनाव आयोग की लंबी कहानी बताने वाली किताब की इन प्रतियों पर दस्तखत कर लिये हैं भेजने के लिए आपके पते का इंतजार है। 320 रुपये की किताब कूरियर से मंगाने के लिए साथ के क्यूआर कोड से या निम्नलिखित खाते में 450 रुपये भेंजे और 9810143426 पर इसकी सूचना के साथ अपना पता भेजें। किताब रवाना करने की सूचना आपको एक कार्यदिवस में भेज दी जायेगी। अमैजन से मंगाना चाहें तो लिंक यह रहा- ईवीएम वाशिंग मशीन में धुली
यह पेशकश सिर्फ 100 हस्ताक्षरित प्रतियों के लिए है।
Sanjaya Kumar Singh
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