— स्वच्छता अभियान में यूपी में हुआ बड़ा घोटाला
— योगी के अफसरों ने कूड़े में किया करोड़ों का गोलमाल!
— नदियों व पर्यावरण को भी पहुंचा रहे नुकसान
— प्रमुख सचिव अमृत अभिजात के साथ उनके करीबी अंजनी राय और इकोस्टेन कंपनी के मालिक अभिषेक मिश्रा समेत अन्य लोग के सामने आ रहे नाम
कहावत है घूरे के भी दिन बहुरते हैं। पर यूपी में ये कहावत कुछ अलग है। यहां घूरे के दिन तो न बहुरे पर कूड़े से नगर विकास से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों के दिन दूनी व रात चौगुने रंगीन जरूर हो गए। दरअसल देश में स्वच्छता अभियान के तहत बड़े पैमाने पर केंद्र व राज्य सरकारों ने कई योजनाएं शुरू की। मोदी सरकार आने के बाद इन योजनाओं के लिए अच्छा-खासा बजट दिया गया, पर ये योजनाएं सन 2014 में सही दिशा में चलीं। पर उसके बाद इसमें कई तरह की अनियमितताओं की खबरें आम होने लगीं।
एक कंपनी है इकोस्टेन। इकोस्टेन का एक कारनामा मप्र के पीथमपुर में पकड़ा गया। बाद में उसका टेंडर निरस्त कर दिया गया था, पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया। बाद में अधिकारियों के कहने पर उसे दोबारा टेंडर दे दिया गया।
कई अन्य राज्यों में इसको ब्लैकलिस्ट भी किया गया। यूपी में भी इसके काले कारनामों से संबंधित पत्र मुख्यमंत्री तक लिखा गया, पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। खासतौर पर भाजपा शासित राज्यों से ऐसी खबरें ज्यादा आईं जहां कूड़ा छोड़कर ठेकेदार भाग गए, ठेके ऐसी कंपनियों को दे दिए गए जो इन कामों में नौसीखिए थे।
कहीं-कहीं तो यह तक हुआ कि भुगतान हो गया और कूड़े का निस्तारण तक नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह है कि कूड़े के इस भ्रष्टाचारी खेल में नगर निगमों के छोटे कर्मचारियों से लेकर प्रदेश के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी तक शामिल रहे। कूड़े के इस बंदरबांट में यूपी के आला अधिकारी तो पूरे देश में अन्य राज्यों के अधिकारियों के कान तक काट गए।
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का राग अलापने वाली योगी सरकार में तो कूड़ा सोने की खान ही बन गया है। अधिकारियों ने न केवल कूड़े से काली कमाई की, बल्कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले इस जानलेवा कूड़े को ऐसी-ऐसी जगहों पर निस्पादित करवा दिया जो हरित ट्रिब्यूनल के नियमों का खुला उल्लंघन था।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को दे दिया काम
सबसे अहम बात यह है कि कंपनी को जितना कूड़ा निस्तारण का काम मिला था, वह भी पूरा नहीं कर सकी और दोबारा उसी कंपनी को बिना टेंडर प्रक्रिया के ही काम सौंप दिया गया। यह काम करीब 45 करोड़ रुपये का है। बताया जा रहा है कि इकोस्टेन कंपनी और अधिकारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से सर्वे कराया गया और फिर उसी धोखाधड़ी करने वाली ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम सौंप दिया गया। इस कंपनी ने केवल कानपुर में ही नहीं, बल्कि इससे पहले प्रयागराज समेत अन्य जगहों पर भी धोखाधड़ी की है। इसने महाकुंभ मेले के दौरान भी बहुत धांधली की थी। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक की गई थी।
अंजनी राय व अभिषेक मिश्रा पर प्रमुख सचिव अमृत अभिजात का हाथ
भ्रष्टाचार के इस खेल में प्रमुख सचिव अमृत अभिजात के साथ उनके करीबी अंजनी राय और इकोस्टेन कंपनी के मालिक अभिषेक मिश्रा समेत अन्य लोग शामिल हैं। अंजनी राय, प्रमुख सचिव अमृत अभिजात का बहुत खास है। कूड़ा निस्तारण वाली कंपनियों से वसूली और उनको टेंडर दिलाने में इसकी अहम भूमिका होती है। यही नहीं, वह भुगतान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाता है। वहीं, अंजनी राय ने इकोस्टेन के मालिक अभिषेक मिश्रा के साथ मिलकर खूब धोखाधड़ी की और सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया।
कूड़े को नदियों व गड्ढों में बहाया
मामला कानपुर के सॉलिड वेस्ट प्लांट भवसिंह में पड़े कूड़े के निस्तारण का है। इसके लिए 17 सितंबर 2021 को एक निविदा आमंत्रित की गई थी। इस निविदा में बड़ा खेल किया गया और इसको इकोस्टेन इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया गया। काम मिलने के बाद कंपनी की तरफ से जमकर गड़बड़ी की गई। कंपनी ने कूड़ा निस्तारण के बजाय कूड़े को गड्ढों और नदियों में बहा दिया और करोड़ों का भुगतान भी करा लिया गया। कंपनी के काले कारनामों को अधिकारियों का खुला समर्थन है। -साभार 4पीएम
यूपी में कूड़ा प्रबंधन में 600 करोड़ घोटाले का आरोप, जांच की मांग
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के नगर विकास विभाग द्वारा पिछले 3 वर्षों में कूड़ा प्रबंधन के मामलों में लगभग 600 करोड रुपए के घोटाले के आरोपों की तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.
यूपी के मुख्यमंत्री को भेजी अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है कि उन्हें प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत 3 वर्षों में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात की सरपरस्ती और प्रश्रय में नगर विकास विभाग द्वारा 600 करोड रुपए से ऊपर के कूड़ा प्रबंधन के घोटाले के तथ्य सामने आए हैं.
जानकारी के अनुसार कई पूरी तरह नई कंपनियों को बुनियादी अर्हता नहीं होने के बाद भी नियमों के विपरीत जाकर टेंडर दिया. इन कंपनियों के खिलाफ ताजा अपशिष्ट (फ्रेश वेस्ट) तथा विरासत अपशिष्ट (लिगसी वेस्ट) के मामलों में गंभीर अनियमितता की तमाम शिकायतें प्राप्त हुई किंतु शासन द्वारा इनका संज्ञान नहीं लेते हुए इन कंपनियों का गलत बचाव किया गया.
अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि इन नई कंपनियों के बैलेंस शीट के अनुसार इनका शुद्ध लाभ इनके टर्नओवर का बहुत ही छोटा प्रतिशत था, जो इस सेक्टर के सामान्य औसत से काफी कम था. यह इन कंपनियों द्वारा भारी घूसखोरी की ओर इशारा करते दिखता है.
उन्होंने कहा कि इस मामले में इकोस्तान इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड सहित कई कंपनियों तथा अमृत अभिजात के कुछ निकट लोगों की प्रमुख भूमिका सामने आई है. उन्होंने इस मामले की गंभीरता और महत्ता के दृष्टिगत इसकी तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग की है.


