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उत्तर प्रदेश

गोरखपुर : भ्रष्टाचारियों से कहा ‘जीते रहो’ और खुलासा करने वालों को ‘रेलते रहो’

गोरखपुर | पिछले लगभग डेढ़ महीने से जिला अस्पताल गोरखपुर में व्याप्त आकंठ भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले खोजी पत्रकार सत्येंद्र पर फिर एक बार बगैर किसी जाँच के मुकदमा लिख दिया गया है। जबकि इससे पहले पत्रकार के विरुद्ध लिखे गए फर्जी मुकदमों में आज तक कोई भी ऐसे सबूत सामने नहीं आ पाए है जो मुकदमों को प्रथम दृष्टया सही साबित कर सकें। यही वजह है कि हाइकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पत्रकार सत्येंद्र को कई बार राहत देते हुए अधिकारियों को नोटिस भी जारी कर चुका है।

इस मामले में गजब बात यह है कि जिला अस्पताल में व्याप्त आकंठ भ्रष्टाचार के तमाम सबूत प्रदेश के डीजी हेल्थ से लेकर प्रमुख सचिव स्वास्थ्य तक कि टेबल पर पड़े-पड़े कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं लेकिन उस कार्यवाही से पहले ही शिकायतकर्ता और पत्रकार बनकर भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले पत्रकार पर ही मुकदमा लिख दिया गया है।

मुकदमा भी उनकी तहरीर पर लिखा गया है जिनपर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और लोकायुक्त से लेकर कई तरह के भ्रष्टाचार की जाँच लंबित है। मजे की बात यह है कि मुकदमा लिखने वाले महिला जिला अस्पताल गोरखपुर के तकनीशियन बी बी सिंह के भ्रष्ट आचरण की रिपोर्ट पर तत्कालीन कमिश्नर ने भी अपनी मुहर लगा रखी है। मुकदमा लिखे जाने के बाद भ्रष्ट व्यवस्था के आपसी गठजोड़ को लेकर जबरदस्त थू-थू मची हुई है और लोग जिला अस्पताल की लानत मलानत करना शुरू कर चुके हैं।

मुकदमे की तहरीर देख कर ऐसा लगता है कि पत्रकार सत्येंद्र का नाम इस मुकदमे में भी जबरन डाला गया है। मुकदमे का मुख्य करेक्टर कोई और है जिसके नाम से मुकदमा लिखाया गया है लेकिन मुकदमे में तड़का लगाने के लिए पत्रकार सत्येंद्र का नाम डाल दिया गया है।

जाहिर सी बात है कि इस मुकदमे के बाद जिला अस्पताल गोरखपुर में पक रही खिचड़ी में अचानक उबाल आ सकता है और साजिश की पलंग पर बिछाए गए ताश के महल भरभरा कर गिर सकते हैं।

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