
गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब पर शुक्रवार को रिसीवर तैनात कर दिया गया है। कार्यकारिणी कालातीत घोषित हो चुकी है। अब चुनाव की प्रक्रिया तेज होने के साथ ही कालातीत कार्यकारी संदेह के घेरे में आ गई है। कार्यकारिणी को बीते 5 साल के आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराना है।
बताते चलें कि गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब संविधान के अनुसार कार्यकारिणी का कार्यकाल अधिकतम एक वर्ष अथवा 366 दिन है। विगत चुनाव एक दिसंबर 2019 को हाइकोर्ट के आदेश पर प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद सम्पन्न हुआ था। इस प्रकार कार्यकारिणी का चुनाव हुए लगभग तीन वर्ष नौ माह का समय व्यतीत हो चुका है।
कार्यकारिणी को संविधान के अनुसार चयन के बाद 11वें महीने में आय-व्यय का लेखा जोखा प्रस्तुत करते हुए चुनाव अधिकारी की घोषणा करनी होती है। लेकिन कालातीत कार्यकारिणी ने ऐसा नहीं किया। यही नहीं संविधान के अनुसार कार्यकारिणी के लिए छ माह में आम सभा की बैठक बुलाना अनिवार्य है। कार्यकारिणी ने विगत तीन वर्ष नौ माह में एक भी आम सभा की बैठक नहीं बुलाई। सारी प्रक्रिया कोविड का बहाना लेकर टाली जाती रही। फलस्वरूप न तो संस्था का नवीनीकरण हुआ और न ही वार्षिक सदस्यों का नवीनीकरण किया गया।
अब स्थिति यह है कि रजिस्ट्रार चिटफंड द्वारा नवीनीकरण से संबंधित दस्तावेज कालातीत कार्यकारिणी से मांगा गया हैं। कालातीत कार्यकारिणी दस्तावेज उपलब्ध कराने हेतु दिए गए 15 दिन के समय को बीत जाने के बाद और समय देने की मांग कर रही है। इस प्रक्रिया से वार्षिक सदस्यों की सदस्यता भी खतरे में आ गई है। जिनकी संख्या सैकड़ों में है। सदस्यता सूची स्पष्ट न होने से चुनाव में विलंब को देखते हुए प्रशासन को घुसपैठ का मौका मिला और सिटी मजिस्ट्रेट ने रिसीवर नियुक्त कर दिया।
इसे लेकर आक्रोशित कालातीत कार्यकारिणी के पदाधिकारी जब कुछ पत्रकारों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह के दफ्तर पहुंचे तो उन्होंने स्थिति को स्पष्ट कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि समय पर कार्यकारिणी को भंग करने के साथ ही चुनाव की प्रक्रिया को संपन्न करा देना चाहिए था। वर्तमान में कितने सदस्य हैं। आम सभा की बैठक में स्पष्ट करते हुए आय-व्यय का लेखा-जोखा भी देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं किया गया जिसकी वजह से रिसीवर नियुक्त किया गया है।
प्रेस क्लब में कितने आजीवन और वार्षिक सदस्य हैं यह कालातीत कार्यकारिणी ही बता सकती है। इसके साथ ही आय-व्यय का लेखा-जोखा भी उन्हें देना है। ऐसा नहीं करने पर आगे की कार्रवाई भी की जाएगी। प्रेस क्लब चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों ने जिस तरह से अपने रुख को स्पष्ट किया है। ऐसे में प्रेस क्लब चुनाव की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
वही 5 साल का सटीक लेखा – जोखा कालातीत कार्यकारी के नहीं दे पाने की दशा में गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब के अध्यक्ष और महामंत्री समेत पूरी कार्यकारिणी पर गबन का चार्ज भी लग सकता है। यही वजह है कि अध्यक्ष और महामंत्री समेत पूरी कार्यकारिणी कुछ पत्रकारों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित एडीएम सिटी के कार्यालय पर उनसे मुलाकात करने पहुंचीं। लेकिन उम्मीद के मुताबिक हल नहीं निकलने से बैरंग वापस लौट आए।


