
संजय कुमार सिंह-
आज जब अखबारों में जल प्रलय की ऐसी खबर हो सकती थी तब जीएसटी की तारीफ का कोरस है। द टेलीग्राफ ने बताया है कि 33 जीवन रक्षक दवाओं पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था। कैंसर के उपचार में उपयोग की जाने वाली तीन दवाइयों पर पांच प्रतिशत टैक्स लगता था अब इन सबको शून्य कर दिया गया है। आप अब तक दिये गये इस टैक्स को अयोध्या के मंदिर के लिए अपना योगदान मानकर भूल सकते हैं। आज की एक खबर अगर यह भी हो सकती थी जो जल प्रलय की नवोदय टाइम्स की भी खबर है। जीएसटी कम करने की 15 अगस्त की घोषणा के बाद से ही राहुल गांधी के 2016 के ट्वीट सोशल मीडिया पर घूम रहे हैं। याद रहे जीएसटी 2017 में इसके बाद लागू हुआ था। मीडिया और संघ के प्रचारकों के लिए उस समय उनका ‘पप्पूपना’ शायद शिखर पर था। तब महंगाई कम करने और भ्रष्टाचार दूर करने के नाम पर सत्ता में आये लोकप्रिय प्रधानमंत्री ने जो किया उसे आपने आठ साल झेला।
अब जब वोट चोरी का राज खुल चुका है, लोकप्रियता दांव पर हैं प्रचारक शिरोमणि ‘मालवेयर’ पर रिपोर्ट के बाद वीडियो भी बन गया है तब यह तथ्य है कि ‘देश का राजा’ आठ साल कान में तेल डाले रहा। मीडिया ने जीएसटी की वो खराबियां नहीं बताईं जो अब ‘दूर’ कर दी गई हैं। सच यह है कि इलेक्टोरल बांड और जीएसटी की सरकारी लूट खत्म होने के बाद अखबारों में यह खबर या उम्मीद थी कि खपत बढ़ेगी। यानी जब 18 और 28 प्रतिशत लूटा जा सकता उसका समय निकल गया है तो 5 और 12 प्रतिशत लूटा जायेगा लेकिन अखबार और सरकार इसे राहत के रूप में पेश कर रहे हैं। आठ साल बाद जो किया या करना पड़ा उसके बारे में यह कह पाने की महानता कि कांग्रेस के जमाने में टैक्स ज्यादा था। मैंने (अब) कम कर दिया है अद्वितीय और दुर्लभ है। मैं नहीं समझता कि कई पीढ़ियों की विरासत (और सम्मान) बेच कर भी कोई यह महानता हासिल कर सकता है।
इसके बावजूद आज इंडियन एक्सप्रेस और हिन्दू समेत कई अखबारों में जीएसटी हटाने से होने वाले फायदों की खबर है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बताया है कि सरकार यह सुनिश्चित करने पर नजर रखेगी कि कीमतें कम हों। जब लोग बाढ़ और बारिश से परेशान हैं तब केंद्रीय कृषि मंत्री के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के निरीक्षण की तस्वीर पहले पन्ने पर छापना विशेष किस्म की पत्रकारिता है। दि एशियन एज ने आज यह कमाल किया है। हालांकि, उसी पन्ने पर गुड़गांव के राजीव चौक स्थित पानी से भरे एक सबवे में खेलते बच्चों की फोटो है। काफी देर तक मेरा मन इसे दिल्ली मेट्रो के राजीव चौक स्टेशन की फोटो मानने से इनकार करता रहा। बाद में सच्चाई समझ में आई। हिन्दुस्तान टाइम्स ने दिल्ली के सिविल लाइन्स के पास बेला रोड के घरों के बाहर भरे पानी की तस्वीर और कैप्शन के नीचे जो खबर छापी है उसका शीर्षक है, विकास के लिए डबल डोज: प्रधानमंत्री ने जीएसटी 2.0 की तारीफ की, विपक्ष पर हमला किया। अमर उजाला ने बताया है, धनतेरस, दीवाली, छठ की रौनक और बढ़ेगी…. अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

नवोदय टाइम्स का पहला पन्ना आप देख ही रहे हैं। इन और ऐसी खबरों के बीच आज देशबन्धु के पहले पन्ने पर एक शीर्षक है, वोट चोरी की तरह पेट्रोल चोरी की गई। जीएसटी सुधार पर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है, सरकार को गलती सुधारने में आठ साल लगे। ये दोनों खबरें किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नजर आई। आज के अखबारों की खबर यह भी हो सकती थी कि इतने समय बाद प्रधानमंत्री अब मणिपुर क्यों जा रहे हैं।
मां की गाली पर कल बिहार बंद था उसपर पहले पन्ने पर कोई खबर दिखी क्या? उपराष्ट्रपति का चुनाव होने वाला है, उम्मीदवार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इंडिया गठबंधन के साझा उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी ने कहा है कि देश में परिस्थितियां लोकतंत्र के अनुकूल नहीं हैं। मुझे लगता है कि यह पर्याप्त गंभीर मामला है और उपराष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से स्थितियां क्या हैं उसपर भी खबर होनी चाहिये और वह मजबूरी में आठ साल बाद किये गये कथित जीएसटी सुधार से महत्वपूर्ण है।


