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ख़बरों से सनसनी कैसे फैलाई जाती है, इस हेडलाइन से समझिए!

सुभाष सिंह सुमन-

कुछ फैक्ट पहले: भारत की जीडीपी है 3.9 (लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर). उसका 10% होता है 400 बिलियन डॉलर. 400 बिलियन डॉलर नेटवर्थ अभी दुनिया में किसी की नहीं है. कभी हुई ही नहीं इतनी किसी की. अभी दुनिया के दो टॉप अमीर एलन मस्क और जेफ बेजोस को मिलाएंगे, तब होगा 400 बिलियन डॉलर. मुकेश अंबानी की नेटवर्थ है 113 बिलियन डॉलर, यानी भारत की जीडीपी के 3% के आस-पास.

अब परिभाषा- जीडीपी का मतलब हुआ एक साल में भारत ने कितनी वैल्यू की मैन्युफैक्चरिंग की और कितनी वैल्यू की सर्विसेज दीं. मतलब साल भर के काम की वैल्यू. नेटवर्थ का मतलब हुआ टोटल संपत्ति, मतलब जीवन में अबतक कितना कमाए प्लस विरासत में जो मिला. क्या ये दोनों फिगर तुलना के लायक हैं? इस तरह की तुलना सिर्फ सनसनी फैलाने के लिए होती है. अब ये पोर्टल है या कोई और चैनल, उन्हें क्लिकबेट और सनसनी से कमाई होती है. उन्होंने सनसनी फैलाने को खबर देने का पर्याय मान लिया है. यही अब मेन स्ट्रीम हो गया है.

हिंडनबर्ग ने भी कुछ इसी टाइप का काम किया. पहले से सार्वजनिक जानकारियों और आंकड़ों का जाल बुनकर उन्हें सनसनी की तरह पेश किया.

इस तरह की हरकतें हिट हो जाती हैं, क्योंकि हममें से ज्यादातर लोग कुंठा से भरे हुए हैं. आप जिस चीज को हासिल नहीं कर पाए, उसे बुरा बता देने से पब्लिक को ऑर्गेज्म मिलता है. इसी ऑर्गेज्म को भुनाने के चक्कर में खबरें बैक सीट पर चली जाती हैं और सनसनी मुख्यधारा बन जाती है.

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