नई दिल्ली। हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) में स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्यरत डॉ. मुकेश आघी और सवित्री कुनाडी का कार्यकाल 31 मार्च 2025 को समाप्त हो गया है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी देते हुए उनके योगदान की सराहना की और कहा कि वे अब स्वतंत्र निदेशक के पद पर नहीं रहेंगे।

डॉ. मुकेश आघी : व्यापार और कूटनीति के अनुभवी विशेषज्ञ
डॉ. मुकेश आघी व्यापार और सरकारी संबंधों के क्षेत्र में गहरी पकड़ रखते हैं। वे वर्तमान में यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के प्रेजिडेंट और सीईओ हैं और अमेरिका-भारत के व्यापारिक संबंधों को सशक्त करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे क्लेयरमोंट ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी के ट्रस्टी भी हैं।
अपने करियर में वे कई बड़ी कंपनियों में शीर्ष पदों पर कार्यरत रहे हैं। उन्होंने L&T इन्फोटेक के सीईओ और बोर्ड सदस्य के रूप में कंपनी के वैश्विक विस्तार में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, वे स्टेरिया इंक. (भारत) के एशिया-प्रशांत क्षेत्र के चेयरमैन और सीईओ रह चुके हैं। डॉ. आघी IBM इंडिया के प्रेसिडेंट भी रहे और अरिबा इंक. व जेडी एडवर्ड्स एंड कंपनी में भी कार्य किया।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी मजबूत पृष्ठभूमि है। उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एडवांस्ड मैनेजमेंट डिप्लोमा, क्लेयरमोंट ग्रेजुएट यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी, एंड्रयूज यूनिवर्सिटी से एमबीए और मिडिल ईस्ट कॉलेज, बेरूत से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं, जिनमें जे.आर.डी. टाटा लीडरशिप अवॉर्ड और एस्क्वायर मैगज़ीन द्वारा ‘ग्लोबल लीडर’ की मान्यता शामिल हैं। वे खेलों में भी रुचि रखते हैं और अब तक 27 अंतरराष्ट्रीय मैराथन में भाग ले चुके हैं। उन्होंने उत्तरी अमेरिका और यूरोप की कई ऊंची चोटियों पर चढ़ाई की है।

सवित्री कुनाडी : अनुभवी राजनयिक और नीति-निर्माता
सवित्री कुनाडी भारतीय विदेश सेवा (IFS) की वरिष्ठ अधिकारी रही हैं और 37 वर्षों तक विभिन्न महत्वपूर्ण कूटनीतिक पदों पर कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से इतिहास और राजनीति विज्ञान में स्नातक और राजस्थान विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की।
1967 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल होने के बाद उन्होंने भारत के विदेश मंत्रालय और कई भारतीय दूतावासों में अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वे वारसॉ (पोलैंड) में भारतीय दूतावास में फर्स्ट सेक्रेटरी (कमर्शियल), न्यूयॉर्क में पर्मानेंट मिशन ऑफ इंडिया में मिनिस्टर काउंसलर रहीं। इसके अलावा, उन्होंने पेरू और बोलीविया में भारत की राजदूत, फ्रांस में भारतीय राजदूत, यूनेस्को में भारत की स्थायी प्रतिनिधि और जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र एवं निरस्त्रीकरण सम्मेलन में भारत की स्थायी प्रतिनिधि के रूप में सेवाएं दीं।
उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए फ्रांस सरकार ने उन्हें ‘कॉमेंडर डे लॉर्डर नेशनल डू मेरिट’ सम्मान से नवाजा। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र, गुटनिरपेक्ष सम्मेलन, मानवाधिकार आयोग, यूनेस्को, आईएलओ, डब्ल्यूएचओ, डब्ल्यूआईपीओ, यूएनसीटीएडी और यूएनएचसीआर जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
2004 से 2008 तक वे राजस्थान फाउंडेशन, भारत सरकार की कार्यकारी समिति की अध्यक्ष रहीं और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस में राजस्थान के मुख्यमंत्री की सहायता की। वे इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट (IMI), नई दिल्ली की गवर्निंग बॉडी की सदस्य भी हैं।
अब, HMVL के स्वतंत्र निदेशक पद से मुक्त होने के बाद, इन दोनों दिग्गजों की आगे की योजनाओं पर नजर बनी रहेगी।


