संतोष मानव-

यह जो IAS/IPS/IFS हैं, सब के सब पतित नहीं हैं। पर अधिकतर हैं। कुछ सर्विस के पहले ही हो जाते हैं, कुछ सर्विस के बाद। ईमानदार और ईमानदारी न ढूंढ़िए, तो अच्छा। ढूंढेंगे तो निराशा हाथ लगेगी। कैसी-कैसी गड़बड़ियां-
- UPSC की हर कैटेगरी में चार फीसदी विकलांग कोटा है। चालीस फीसदी से ज्यादा विकलांगता अनिवार्य है। अब हो यह रहा है कि चार-छह फीसदी वाले भी चालीस फीसदी या ज्यादा का सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं। महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी पूजा खेड़कर के बाद तो जैसे भानुमति का पिटारा ही खुल गया है। अनेक अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं कि जनाब या मोहतरमा विकलांग कैसे? आप जिम जा रहे हो/ दौड़ रहे हो/फिल्म में एक्टिंग कर रहे हो/बिना चश्मे के ड्राइविंग टेस्ट दे रहे हो, तो विकलांग कैसे? सर्टिफिकेट कैसे दे रहे हो कि चलने-फिरने या देखने में दिक्कत है? विकलांगता पर सवाल गैरवाजिब नहीं है। नाम अनेक हैं। पर कुछ नाम लेता हूं। हिमाचल कैडर के प्रियांशु खाती, उत्तराखंड कैडर की निकिता खंडेलवाल, यूपी कैडर के इस्तीफा दे चुके अभिषेक सिंह, पूजा खेड़कर तो है ही।
- फिर NCL (नाम क्रीमी लेयर) पर सवाल है। सालाना आठ लाख से कम जिनके माता-पिता की आय है, वे NCL कैटेगरी में आएंगे। पर आठ तो छोड़िए अस्सी लाख वाले भी सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं। NCL के जरिए आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। नाम अनेक हैं। एक नाम आया है केरल कैडर के IAS आशिफ के युसूफ का। बैच 2020। इनका NCL गलत साबित हो चुका है पर कार्रवाई नहीं हो रही है। मामला केंद्र और राज्य के बीच अटका है। एक गड़बड़ी और है। वह यह कि NCL के लिए माता-पिता की आय की गणना होती है, खुद की नहीं। अब हो यह रहा है कि राज्य सेवा में सालाना आठ लाख से ज्यादा तनख्वाह पाने वाले भी NCL का लाभ लेकर IAS/IPS/IFS बन रहे हैं।
- यहीं हाल EWS का है। यहां भी NCL वाली गड़बड़ी है। यूनियन टेरेटरी कैडर की (अभी MP में) IPS अन्नू बेनीवाल के पिता रिटायर्ड IPS हैं। फिर अन्नू EWS कैसे? इसी श्रेणी में देखिए- अभ्यर्थी IPS बने। ज्वाइन किया। फिर Exam दिया। EWS कोटे से अगले वर्ष IAS में आ गए। क्योंकि EWS के लिए माता-पिता की आय आठ लाख से कम चाहिए, कहीं न कहीं झोल है।
- पूजा खेड़कर का मामला तो खैर अद्वितीय है। विकलांगता फर्जी। (आंखों में दिक्कत है तो पुणे की सड़कों पर ऑडी कार बिना चश्मे के कैसे दौड़ा रही थी?) NCL भी गड़बड़। पिता की घोषित संपत्ति 40 करोड़। और खुद की 17 करोड़। फिर भी NCL कैंडिडेट?
यह नियम-कानून की आंखों में धूल झोंककर आगे बढ़ जाना है या घोटाला? कौन तय करेगा?


