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”आईएफडब्लूजे और के.विक्रम राव को बदनाम करने का कुछ लोग कर रहे हैं कुत्सित प्रयास”

यशवंत जी,

सर्वप्रथम तो आपको साधुवाद कि आपने इस भ्रामक खबर पर आईएफडब्लूजे का पक्ष जानने का प्रयास किया. इस पूरी खबर को पढ़ने से एक बात तो स्पष्ट होती है कि यह पूरी कहानी आईएफडब्लूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के.विक्रम राव को बदनाम करने की और हमारे संगठन आईएफडब्ल्यूजे की छवि धूमिल करने के लिए गढ़ी गयी है. इनमे से किसी भी बात में कोई सच्चाई नहीं है. हमारे अध्यक्ष पर आरोप लगाने के लिए जिन घटनाओं का ज़िक्र किया गया है वे सभी 5 से 15 साल पुरानी है और ये अपने में आप में बड़ा हास्यास्पद है की किसी घटना पर आरोप लगाने में इतना लम्बा समय लग गया.

ये है वो मूल खबर >

अवैध कमाई के इल्जामों से घिरे कामरेड!

शेखर पंडित

लखनऊ। नाम बड़े, दर्शन छोटे यह कहावत इंडियन फेडरेशन ऑफ  वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्ल्यूजे) के अध्यक्ष के. विक्रम राव पर सटीक साबित होती है। 30 साल से आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष पद पर काबिज राव भले ही अपनी तकरीरों से चैनलों पर नेताओं और नौकरशाहों के राज को  भले ही बेपर्दा कर रहे हो, लेकिन खुद के काले कारनामों को छिपाने के लिए साम, दण्ड और भेद का सहारा ले रखा है। जहां इस बात का खुलासा आईएफडब्ल्यूजे के एक कर्मचारी श्री भगवान भारद्वाज और पत्रकार विमल थम्ब ने किया है वहीं मजीठिया वेज बोर्ड में सदस्य के तौर फर्जी हवाई यात्राओं बिल के मामले में केन्द्रीय सतर्कता विभाग ने नोटिस भेजा है।

मालूम हो कि तीस सालों से पत्रकार संगठन आईएफडब्ल्यूजे के अध्यक्ष पद पर काबिज के. विक्रम राव पर खुद उनके संगठन के लोग पैसों की हेरा-फेरी के आरोप अक्सर लगाते रहे हैं। पत्रकारों के वेतन निर्धारण के लिए गठित मजीठिया वेज बोर्ड के सदस्य के रुप में भी के. विक्रम राव फर्जीवाड़ा करने से बाज नहीं आए। राव को यात्रा का कूटरचित फर्जी बिल पेश करने के आरोप में विजिलेंस ने नोटिस भेजा है। विक्रम राव ने बतौर वेज बोर्ड के सदस्य बैठक में हिस्सा लेने के लिए लखनऊ से दिल्ली की हवाई यात्रा का बिल 8000 रुपये की जगह 58000 रुपये का पेश किया और मामला खुलने पर इसकी गलती ट्रैवेल एजेंट के मत्थे मढऩे का प्रयास किया गया। उल्लेखनीय है कि मजीठिया वेज बोर्ड में राव सहित कुल छह सदस्य थे। जिनका कायर्काल 31 दिसंबर 2010 को समाप्त हुआ था। सदस्यों को बैठक में भाग लेने के लिए यात्रा सहित अन्य भत्ते सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यात्रा भत्ते के नाम पर राव के फर्जीवाड़े का मामला खुलने पर बदनामी के डर के सभी सदस्यों ने मिलकर इसे रफा-दफा करने का भरसक प्रयास किया। जबकि खुद जस्टिस मजीठिया इसको लेकर बहुत नाराज थे। बहरहाल हाल ही में एक बार फिर से यह मामला खुला है और के. विक्रम राव को केंद्रीय विजिलेंस की ओर से नोटिस भेजा गया है।

संगठन के पुराने सहयोगी और कभी राव के खास लोगों में शुमार उड़ीसा के वरिष्ठ पत्रकार विमल थम्ब ने देश भर के पत्रकारों को ई-मेल के जरिए कई आरोप लगाए हैं। जिन्होंने आईएफडब्लूजे के दो बैंक खाते चलाने और शातिर तरीके से पैसे लखनऊ के खाते में जमाकर हेरा-फेरी करने का आरोप जड़ा है। थम्ब का दावा है कि संगठन के विभिन्न राज्यों में हुए सम्मेलनों में उन राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर से दी गयी भारी-भरकम धनराशि को संगठन के दिल्ली के खाते (जिसका ब्योरा रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन के कार्यालय में पेश किया जाता है) न दिखा कर उसे लखनऊ के खाते में जमा कराया जाता है और उसका दुरुपयोग किया गया है। थम्ब ने अपने पास मौजूद दस्तावेजों के आधार पर एक पत्र लिख कर राव और संगठन के प्रधान महासचिव परमानंद पांडे से लखनऊ खाते का हिसाब मांगने की जुर्रत की थी। उड़ीसा के इस वरिष्ठï पत्रकार को दफ्तरी की ओर से भिजवाए गए पत्र में राव ने उनको देश के कई जिलों में मुकदमा दायर कर पुलिसिया कारवाई की धमकी दे डाली है।

निष्पक्ष दिव्य संदेश के पास मौजूद थम्ब के पत्र बताते हैं कि कैसे राव ने मध्य प्रदेश इकाई की ओर से दिए गए विज्ञापन के पैसे और कई मुख्यमंत्रियों से हासिल किए गए पैसों को लखनऊ में चलने वाले बैंक खाते में जमा करवाया और रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन को कोई जानकारी नहीं दी है। पत्र में कहा गया है कि राव पर रजिस्ट्रार ट्रेड यूनियन को गुमराह किए जाने का आपराधिक मामला बनता है। विमल के मुताबिक राव पत्रकारों का सबसे बड़ा दुश्मन और दलाल है जिसे कलमकारों का नेता होने का कोई हक नही है। राव की दबंगई का आलम यह है कि गंभीर आरोप लगाने वालों को उन्होंने संगठन के दिल्ली कार्यालय का काम देखने वाले श्री भगवान भारद्वाज की ओर से अंग्रेजी में (भारद्वाज को अंग्रेजी की एबीसीडी भी मुश्किल से आती है) में धमकाने वाला जवाब भेज कर पैसों की धोखाधड़ी करने वाले आरोपों से मुक्ति पाने की अहमकाना हरकत कर डाली है।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उत्तराखंड में ऋषिकेश में आयोजित आईएफडब्लूजे के सम्मेलन में तो राव ने सारा इंतजाम परमार्थ निकेतन के प्रमुख बाबा चिदानंद से करवाया और इसके नाम पर यूपी के काबीना मंत्री की ओर से दिलवाए गए 40 लाख रुपये डकार लिए। इतना ही नहीं सम्मेलन के नाम पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से भी उगाही की गयी और पत्रकारों को दिए जाने वाले गिफ्ट को बाजार में बेच डाला। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए लोगों से 500 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से वसूली की गयी और न देने वाले पत्रकारों के साथ बदसुलूकी की गयी (उड़ीसा के संबलपुर के पत्रकार से तो खाने की प्लेट तक छीन ली गयी)। इस पूरे मामले में राव और उसके परिवार के सदस्य भी शामिल रहे हैं। राव सम्मेलनों में खाने के नाम पर पैसे बनाने के लिए बकायदा सत्कार कैटरर्स (तिवारी) की पूरी टीम लेकर चलते हैं।

राजधानी के एक वरिष्ठ पत्रकार जो एक दशक पहले कभी राव के सबसे बड़े झंडाबरदार थे, का कहना है कि उस समय में जब मुलायम सिंह यादव यूपी के मुखिया थे तो उन्होंने आईएफडब्लूजे को एक सम्मेलन में 10 लाख रुपये देने का ऐलान किया। मायावती के कार्यकाल में इस पैसे के उपयोग को जांचने के लिए सूचना विभाग के अधिकारी जेड. ए. सलमानी को कहा गया। राव ने इस पैसे से आईएफडब्लूजे के दिल्ली कार्यालय का उच्चीकरण होना बताया। जब सलमानी जांच के लिए दिल्ली कार्यालय पहुंचे तो ठीक एक दिन पहले राव के बेटे ने एक गाड़ी पर किराए के कंप्यूटर और एलसीडी लेकर दिल्ली कार्यालय पहुंचा और आनन-फानन में सब लगाकर कार्यालय को उच्चीकृत दिखा दिया। गौरतलब है कि सलमानी पहले खुद पश्चिम उत्तर प्रदेश में पत्रकार था और आईएफडब्लूजे का सदस्य रहा चुका था और राव के खास यूपी इकाई के मुखिया हसीब सिद्दीकी का बगलगीर था।

सरकारी पैसों की हेरा-फेरी के इन खुलासों के बाद एक पत्रकार ने उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में आरटीआई लगाकर अब तक आईएफडब्लूजे को दिए गए पैसों, उनके उपयोग और किस खाते में चेक आहरित किया गया, इन सबका का ब्यौरा मांगा। उक्त पत्रकार का कहना है कि जानकारी मिलने के बाद इस मामले में जांच एजेंसियों से कारवाई का अनुरोध किया जाएगा और मामला अदालत में ले जाया जाएगा। आईएफडब्ल्यूजे अध्यक्ष के. विक्रम राव ने कहा कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वे असत्य और राजनीति से प्रेरित हैं। उनके विरोधी उनकी छवि खराब करने में जुटे हुए हैं, लेकिन वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं।

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