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उत्तर प्रदेश

शिकायतों की भरमार, अखिलेश दुबे पर नहीं हुई छठी FIR, कानपुर कमिश्नर को तत्काल दिल्ली ज्वाइन करने का आदेश

दुबे जी के सम्मान में 6 पुलिसकर्मी और नपे, देखें लिस्ट

कानपुर/नई दिल्ली: कानपुर में अखिलेश दुबे गिरफ्तारी कांड को लेकर यूपी से दिल्ली तक बवाल मचा हुआ है। कानपुर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार के लिए तुरंत दिल्ली जाने का आदेश जारी हुआ है। कई आईएएस और आईपीएस अफ़सरों के दुलारे ‘अखिलेश दुबे’ की गिरफ़्तारी के बाद से ही सत्ता के गलियारों में आपसी संघर्षों के संकेत दिखाई दे रहे हैं।

कानपुर के पुलिस कमिश्नर आईपीएस अखिल कुमार को तत्काल रिलीव करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं। अखिलेश दुबे केस में कार्रवाई के बाद हटाने की चर्चा तेज़ हो चली है।

बता दें कि भारत सरकार ने उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अखिल कुमार (1994 बैच) को बड़ी जिम्मेदारी दी है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक अखिल कुमार को डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD/CEO) नियुक्त किया गया है। उन्हें यह जिम्मेदारी डेपुटेशन (प्रतिनियुक्ति) आधार पर दी गई है।

सरकार ने साफ किया है कि अखिल कुमार को यह पद भारत सरकार में अतिरिक्त सचिव के रैंक और वेतनमान में मिलेगा। आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध किया गया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से रिलिव किया जाए, ताकि वे केंद्र में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल सकें।


वहीं, वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने गृह मंत्रालय का यह पत्र शेयर करते हुए लिखा है-

कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार का बुलावा आ गया है। उन्हें जल्दी से जल्दी दिल्ली ज्वाइन करने को कहा गया है।

इस बीच कुछ अहम तथ्यों पर नज़र डालिए।

अखिलेश दुबे पर पांचवीं के बाद छठीं एफआईआर आज तक नहीं हो सकी है, जबकि SIT के पास शिकायतों की भरमार है। कई मामलों में जांच पूरी हो चुकी है। शिकायतें सही पाई गई हैं! गवाह सामने हैं।

तथ्य सत्य की उँगलियाँ पकड़कर झूल रहे हैं। मगर खुद अखिल कुमार के रहते हुए भी अगला एक्शन ठप्प है।

अखिल कुमार के पुलिस कमिश्नर होते हुए भी पुलिस ने एक बार भी अखिलेश दुबे की पुलिस रिमांड चाही ही नहीं है। और ये भी कि अखिलेश दुबे की अवैध पाई गई संपत्तियों पर बुलडोजर की छाया तक नहीं पड़ी है!

ये कैसा संदेश है? क्या कोई ईश्वरीय आदेश है? क्या महान फ़ुटबाल खिलाड़ी डिएगो माराडोना के 1986 के फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ “Hand of God” के ज़रिये किए गए गोल सरीखा मामला है?

शायद कभी अखिल कुमार इस सच्चाई को बयां कर सकें कि अगर इस मामले में कोई “Hand of God” था तो वो किसका था?

उम्मीद है अखिल कुमार जब भी अपनी आत्मकथा लिखेंगे तो शायद इन सवालों के जवाब मिल सकें!! पर आत्मकथा का शीर्षक यही होना चाहिए-

“Kanpur and the mystery of “hand of god”!!


शनिवार को कानपुर पुलिस ने अखिलेश दुबे के साथ संलिप्त छह पुलिसकर्मियों की एक सूची जारी की है। जो अधिवक्ता अखिलेश दुबे के पक्ष में जी जान से मेहनत कर रहे थे। इन छहो को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

जो निलंबित हुए : निरीक्षक मानवेन्द्र सिंह, आशीष कुमार द्विवेदी, अमान व नीरज ओझा, उपनिरीक्षक आदेश यादव व सनोज पटेल का नाम शामिल है।

इसे लेकर लखनऊ की वरिष्ठ पत्रकार ममता त्रिपाठी ने लिस्ट शेयर करते हुए लिखा है, “दुबे जी के सम्मान में 6 पुलिसकर्मी पुलिस मैदान में”..

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