सुप्रिया श्रीनेत-
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का कहना है ‘आज देश के बच्चों को विदेश जाकर पढ़ाई करने की नई बीमारी लग गई है’
इनकी अपनी बेटी अमेरिका और इंग्लैंड में पढ़ीं.
हर इंसान को आज़ादी है वो कहाँ पढ़े, कहाँ रहे.
लेकिन अपने बच्चे के लिए और बाक़ी देश के बच्चों के लिए इतने अलग मापदंड तो ढोंग है!
सुरेश चिपलुनकर-

ये हैं जगदीश धनखड़… एक कार्यक्रम में बता रहे हैं कि भारत के युवाओं में विदेश जाकर पढ़ाई करने की “बीमारी” बढ़ रही है… (बीमारी)
धनखड़ साहब के अनुसार 2024 में 13.50 लाख छात्र विदेश पढ़ने गए और इस कारण भारत से 6 बिलियन डॉलर की फीस अन्य देशों को गई. (धनखड़ साब के अनुसार 6 बिलियन डॉलर भारत में खर्च करते तो शिक्षा व्यवस्था का उद्धार हो जाता)
अब यदि धनखड़ सहित भाजपा के सभी नेताओं के बच्चों की विदेश में पढ़ाई देख ली जाए तो इनके “कथित और फर्जी राष्ट्रवाद” की पोल दो मिनट में खुल जाएगी.
ये लोग आपको, बच्चे को सरस्वती स्कूल में पढ़ाओ, स्वदेशी का व्यापार करो, विदेश मत जाओ, जैसे “ज्ञान लगातार ठेलते” रहेंगे, खुद अपने बच्चों को कान्वेंट और अमेरिका भेजेंगे, परंतु आपके बेटों से यह अपेक्षा रहेगी कि वे चंदन गुप्ता और रामगोपाल मिश्रा बनकर.
जान दे दें और इनकी कुर्सी पक्की कर दें.
शीतल पी सिंह-
हमारे उपराष्ट्रपति, धनखड़ जी की पुत्री ने जयपुर के MGD school से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद प्रसिद्ध मेयो कॉलेज अजमेर से होते हुए ग्रेजुएशन किया जिसकी डिग्री अमेरिका के प्रसिद्ध बीवर कालेज से हासिल की। बीवर कालेज अब Arcadia University में बदल गया है।
इस दौरान summer courses के लिए वे इंग्लैंड, इटली और आस्ट्रेलिया गईं। उन्होंने इटैलियन भाषा की पढ़ाई भारत स्थित इटली के दूतावास द्वारा चलाए जाने वाले पाठ्यक्रम से प्राप्त की।
उनकी फोटोग्राफी की अभिरुचि इंग्लैंड की Goldsmith University की छात्रा होने के गौरव से पूरी हुई। अब देश के बाकी बच्चों के लिए उनके पिताजी की नसीहत है कि…..
गोविंद प्रताप सिंह-
जगदीप धनखड़ की बेटी का नाम कामना है।
कामना ने अमेरिका से ग्रेजुएशन किया है।
लेकिन अब धनखड़ साहब कह रहे हैं:
“देश के बच्चों को विदेश जाकर पढ़ाई करने की नई बीमारी लग गई है।
बच्चों को पता ही नहीं है कि कहां जाना है, कहां पढ़ना है?”



