Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

प्रिंट

जागरण और बकरा!

ये है तो पुराना, 15 मार्च का, बक़रीद के वक्त का, लेकिन मेरी नज़र पड़ी आज। मुस्लिमों को टारगेट करने वाला दैनिक जागरण अगर होली को पानी और दिवाली को हवा (पटाखों से प्रदूषण) की बर्बादी पर अभियान चलाता तो प्रकृति का ज़्यादा भला होता। जागरण की बात का असर हिंदुओं में होता भी खूब।

लेकिन जागरण मुस्लिमों को जगा रहा है। मुस्लिम खूब जानते हैं कि जागरण उनका मित्र अख़बार नहीं है। ऐसे में वो भला जागरण की बात क्यों मानेंगे। उल्टे इसका काट खोजा जा रहा है जिसे एक सज्जन की टिप्पणी में देख सकते हैं-

पूरे मोहल्ले में “दैनिक जागरण” की एक ही प्रति मंगानी चाहिए। कागज कम खर्च होगा तो पेड़ कम काटने पड़ेंगे। एक आदमी को घर-घर घूमना नहीं पड़ेगा। सारे मिलकर एक जगह पढ़ेंगे तो भाईचारा बढ़ेगा। कचड़ा भी कम होगा।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
1 Comment

1 Comment

  1. Priyesh Upadhyay

    May 9, 2023 at 10:22 pm

    दरअसल हिंदुओ के त्योहारों पर भास्कर ऐसा ही ज्ञान देता है पानी बचाने, पटाखे ना फोड़ने जैसा ज्ञान देता है, लेकिन जब प्रकृति को ही बचाने का ज्ञान देना है तो सभी त्योहारों पर देना चाहिए सिर्फ हिंदू त्योहारों पर ही क्यों ?
    और जागरण का यह अभियान उसी लिए है, क्योंकि हिंदू त्योहारों पर ज्ञान देने का ठेका तो भास्कर ने उठा ही रखा है, जिसे आम तौर हिंदू समाज पसंद नहीं करता कि आखिर हमारे ही त्योहार पर सारा ज्ञान क्यों ? क्या बकरीद पर बकरा काटने व बाद में साफ सफाई में पानी की बरबादी नहीं होती ?
    बस यही कमी जागरण पूरा कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन