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जागरण में प्रमोशन और इंक्रीमेंट के नाम पर चमचों की चांदी

बिहार में दैनिक जागरण के एक यूनिट में प्रमोशन और इंक्रीमेंट के नाम पर चमचों को उपकृत करने का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। इससे यूनिट के अन्य कर्मचारी नाराज हो गए है। प्रमोशन की सूची में वैसे लोगों के नाम शामिल है जिन्होंने अपनी कलम का जादुई करिश्मा कभी अख़बार में नहीं दिखाया। संपादक के स्वजातीय होने का लाभ उस व्यक्ति को अब तक मिलता रहा है।

बताया तो यहां तक जा रहा है कि कार्यालय से महीनों गायब रहने वाले कर्मचारी को डीएनई बनाने की कवायद की जा रही है। उस व्यक्ति को दैनिक जागरण के बड़े संपादकों ने मेन्टल केस और ट्यूबलाइट तक कह डाला था।

दैनिक जागरण में कहने सुनने का कोई ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता। यहाँ प्रमोशन का सबसे बड़ा आधार संपादकीय प्रभारी का स्वजातीय होना है। ऐसे ही दूसरे चमचे को पटना के एक बड़े संपादक का आशीर्वाद प्राप्त है। उस व्यक्ति का नाम भी प्रमोशन की सूची में डाला गया है।

सूत्रों की माने तो संपादकीय प्रभारी को अपनी नौकरी चलानी है इसी लिए वे पटना वाले साहब को नाराज नहीं करना चाहते। पिछले वर्ष भी संपादकीय प्रभारी ने प्रबंधन से अपने चमचों को उपकृत करने के लिए अलग से राशि मंगवाई थी। यह राशि 4-5 लोगों के बीच ही बांटी गयी बाकी कर्मी मुंह देखते रह गए इस बार भी यह संपादकीय प्रभारी अलग से राशि मँगवाने की बाजीगरी में लगा हुआ है।

बहरहाल, प्रबंधन इन बातों पर कहाँ तक गौर करता है यह समय बताएगा। चमचे यदि उपकृत नहीं होंगे तो भला अपने वरिष्ठ जनों के लिए मुर्गा और मदिरा की व्यवस्था कहाँ से करेंगे। अब तो कर्मचारी कहने लगे है चमचागिरी करो और इंक्रीमेंट व प्रमोशन पाओ। भला हो जागरण के अधिकारियों का जो इस ओर कभी ध्यान नहीं देते।

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