
संजय कुमार सिंह
आज कई अखबारों की खबरों और उनकी प्रस्तुति से साफ लगता है कि उनकी प्राथमिकता देश की सभी विपक्षी राजनीतिक पार्टियों को बदनाम करने और भाजपा का प्रचार ही नहीं, बचाव भी उनका मुख्य लक्ष्य हो सकता है। आपको याद होगा, नरेन्द्र मोदी ने सत्ता संभालने के बाद कांग्रेस मुक्त भारत की बात की थी। तब यह मुश्किल भी नहीं लग रहा था लेकिन जवाब में राहुल गांधी ने कहा वे भाजपा को हरायेंगे। उनकी लड़ाई (लगभग अकेले) नरेन्द्र मोदी से नहीं, भाजपा (और संघ परिवार) की नीतियों से है। मोटे तौर पर राहुल गांधी का काम ऐसा ही रहा है और वे इसी तरह बढ़ते लग रहे हैं। इस क्रम में आरएसएस पर उनके हमले तेज हो गये हैं। भाजपा ने न सिर्फ उन्हें पप्पू प्रचारित करने का काम किया बल्कि इसके लिए संपादित वीडियो और अपनी ट्रोल सेना का भी उपयोग किया। विपक्ष और समर्थकों के भारी दबाव तथा व्यंगवाणों के बावजूद वे भाजपा जैसी राजनीति नहीं कर रहे हैं, हार स्वीकार कर रहे हैं और सत्ता के लिए लड़ते नहीं लग रहे हैं। यह अलग बात है कि उनकी हार का कारण किसी भी तरह जीतने की भाजपा की राजनीति भी है। भाजपा की इस राजनीति के समर्थन और प्रचार के लिए तेलंगाना के टनल में फंसे मजदूरों और बचाव कार्य से संबंधित उनकी खबर रह गई है जो द हिन्दू में लीड है। आलम यह है कि अखबारों के दबाव से पहले सरकार जनहित के ऐसे काम करती है। इनपर खर्चा करती थी और नाकामी की अपनी नालायकी मानती थी अब अखबारों को ऐसे मामलों की परवाह नहीं होती है और सरकार दबाव में नहीं आती है। यह स्थिति मैंने सिल्कयारा टनल के समय महसूस कया था। दिल्ली की यह खबर मेरे आठ अखबारों में सिर्फ द टेलीग्राफ में पहले पन्ने पर नहीं है जो कोलकाता का अखबार है और स्थानीय खबर को प्राथमिकता देखता
मतदाता सूची में गड़बड़ी से लेकर चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जे की बात वे करते रहे हैं। यह अलग बात है कि मीडिया उनकी बातों को महत्व नहीं देता है और इसलिए उनकी बातें आम आदमी तक नहीं पहुंचती हैं और अभी भी लोग मानते हैं कि आलू डालने से सोना निकलने वाली बात उन्होंने की थी। चुनाव के समय बंटेगें तो कटेंगे और एक हैं तो सेफ हैं जैसे बयान और बेटे का नाम तैमूर रखने के लिए सैफ अली खान का नाम लिये बगैर उनकी आलोचना करके हिन्दू-मुसलमान करने वाले सेलीब्रिटी समर्थकों की सहायता से चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने कल दिल्ली विधानसभा में जो किया वह भाजपा की राजनीति हो सकती है। कम से कम चुनाव के समय इसे देखना चुनाव आयोग का काम हो सकता है। संभव है, चुनाव आयोग अपना काम ढंग से कर भी रहा हो। पर विधानसभा में जो हुआ उसे अखबार कम महत्व दे सकते थे, महत्व दिया तो उसमें आम आदमी पार्टी का पक्ष भी बराबर महत्व पर रख सकते थे या यह सच बता सकते थे कि भाजपा जब इसी मुद्दे पर जीत चुकी है तो अब उसे साबित करने की जरूरत नहीं है। अगर कर रही है तो मकसद यह हो सकता है, कि वह सत्ता छोड़ना ही नहीं चाहती है। अगर उसे अच्छे काम करके चुनाव जीतना होता तो पहले दिन से जनहित के काम करने चाहिये थे। ऐसे में उसने जो सब किया या नहीं किये – वह खबर होती। पर ऐसा हो नहीं रहा है।
विधानसभा में हंगामा हो तो खबर शहर के अखबारों की लीड बनती रही है। उसका कारण बताते हुए या दोनों पक्षों की बात रखते हुए भी लीड बनाई जा सकती है। इसीलिए आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, सरकार ने उत्पाद रिपोर्ट सदन में रखी आप विधायक सदन से निलंबित। दिन भर की खास बातों की सूची का शीर्षक है, ऐक्शन से भरपूर सदन का दूसरा दिन। इसके साथ की तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, “एलजी ने नई सरकार का 10 बिन्दुओं वाला एजंडा सूचीबद्ध किया, कहा, आप के आरोप लगाने से शहर का नुकसान हुआ”। इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया में लगभग एक जैसे शीर्षक से यह खबर सेकेंड लीड है जबकि दि एशियन एज, अमर उजाला और नवोदय टाइम्स में यह खबर लीड है। शीर्षक है, “सीएजी की रिपोर्ट कहती है, आप की उत्पाद नीति के कारण दिल्ली सरकार को 2002 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ”। यह खबर आज कई अखबारों में लीड और सेकेंड लीड है। अखबार की खबर के कारण इसका प्रभाव लोगों पर ज्यादा होगा लेकिन मुद्दा यह है कि सरकार की नीतियों के कारण ही उसे नुकसान या लाभ होता है। सरकार का काम ही है राज्य की जरूरतों के अनुसार नीति बनाना और इसमें जनहित देखना होता है, कमाई नहीं। इसीलिए बिहार में शराबबंदी है और राज्य सरकार को होने वाले नुकसान की कभी कोई चर्चा नहीं हुई। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि जो स्थितियां हैं उसमें भाजपा (या समर्थित) सरकार ही शराब बंदी (या राज्य को नुकसान होने वाली नीति) लागू कर सकती है। बिहार की दूसरी सरकार अगर शराब बंदी करेगी (जारी रखेगी या खत्म करेगी) तो भाजपा की सरकार और उसकी सीएजी शाखा उसपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने लगेंगी। सीएजी के काम, भाजपा द्वारा उसके उपयोग और सीएजी को ईनाम तथा माफी मांगने पर मैं कल यहां लिख चुका हूं।
जहां तक दिल्ली सरकार की उत्पाद नीति से राजस्व के नुकसान की बात है, आप जानते हैं कि भाजपा के दबाव में इस नीति को वापस ले लिया गया। इसके लिए मुकदमे चलते रहे। कई मंत्री और नेता जेल हो आये फिर भी वह नुकसान अभी तक मुद्दा है। हालांकि, नेहरू और इमरजेंसी हैं तो यह हाल की बात है। दिलचस्प यह है कि भाजपा जैसी पार्टी ने आम आदमी पार्टी की सरकार को उसकी इसी नीति के कारण भ्रष्ट प्रचारित कर दिया जबकि शेयर खरीदने की सलाह और कीमत गिर जाने जैसे घोटाले से लेकर अदाणी के लाभ के लिए काम और मदद करने के आरोपों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कार्रवाई तो छोड़िये जांच भी नहीं हुई है। अगर भाजपा वाकई ईमानदार है और आम आदमी पार्टी भ्रष्ट है तो जनता को फायदा या नुकसान क्या है? भाजपा के सत्ता में रहने से जनता को कोई फायदा हुआ होता तो भाजपा खुद ही उसका प्रचार करती उसके नाम पर वोट मांगती लेकिन वोट तो उसे हिन्दू-मुसलमान से मिल जाता है इसीलिए कुम्भ को ईवेंट बना दिया गया पर वह सब अलग मुद्दा है। भाजपा के सत्ता में नहीं होने या आम आदमी पार्टी के सत्ता में होने से अगर सरकार को राजस्व के नुकसान का मामला है तो आपको याद होगा कि सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार ही 2जी घोटाले में एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था और सच्चाई यह है कि इस मामले में गिरफ्तारियां भले हुईं लोगों को जेल में भले रखा गया पर सजा नहीं हुई। अगर सजा हुई मान भी लें तो वह एक लाख 76 हजार करोड़ रुपये के मुकाबले आम आदमी पार्टी के नेताओं को 2002 करोड़ रुपये के लिए जो ‘सजा’ मिली उसके मुकाबले कुछ नहीं है।
भाजपा सरकार सत्ता मिलने पर जनहित के काम करने की बजाय आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को बदनाम करने में लगी हुई है ताकि भविष्य में चुनाव जीतना आसान रहे। मीडिया भाजपा के लिए आम आदमी पार्टी के खिलाफ इसे प्रचारित करके इस व्यवस्था को मजबूत कर रही है। देश की राजनीति में विपक्ष को कमजोर करना देशभक्ति नहीं है लेकिन इसे भी प्रचारित कर लिया जाता है। यहां यह बताना जरूरी है कि 2जी घोटाले का प्रचार और उससे हुआ नुकसान तो आप जानते हैं लेकिन मोदी राज में 5जी के लाइसेंस आवंटन के बारे में आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा था, 5जी घोटाला सबसे बड़ा घोटाला होने जा रहा हैं जबकि अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा राज में लोगों को 5जी सेवा पहले से मिल रही है और इसका मतलब है, गरीबी, घोटाला, घपला, घालमेल और गोरखधंधा। 2जी की नीलामी में एक लाख 76 हजार करोड़ के घाटे का प्रचार करने वाली भाजपा ने 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी से 1,50,173 करोड़ रुपये की रकम मिलने पर अपनी पीठ खुद थपथपा ली थी। कथित 2जी घोटाले के समय के दूरसंचार मंत्री ए राजा ने नीलामी की जांच की मांग करते हुए कहा कि 5जी स्पेक्ट्रम को 5 लाख करोड़ रुपये में बेचा जाना चाहिए था। राजा ने 5जी स्पेक्ट्रम की 1.5 लाख करोड़ रुपये की राशि की तुलना सीएजी द्वारा उनके कार्यकाल के दौरान 2जी नीलामी में हुए 1.76 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित नुकसान से की और कहा कि 5जी में अधिक स्पेक्ट्रम है, इससे सरकार को अधिक लाभ मिलना चाहिए था। भाजपा सरकार ने इसे मुद्दा ही नहीं बनने दिया और विपक्ष ने इसे भाजपा की तरह मुद्दा नहीं बनाया या बना पाई। देश की राजनीति ऐसे ही चल रही है। हर ओर भाजपा का कब्जा होता जा रहा है।
इसीलिए आज के अखबारों में पहले पन्ने पर यह खबर नहीं है कि दिल्ली विधानसभा में कल पेश सीएजी की रिपोर्ट में अगर 2002 करोड़ रुपये के नुकसान की बात की गई है तो उसी रिपोर्ट में यह में यह भी कहा गया है कि, आज प्रकाशित खबरों के अनुसार दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने कहा कि 2017 से 2021 तक की एक्साइज ऑडिट रिपोर्ट सदन में पेश हुई। इसमें पुरानी शराब नीति की खामियां उजागर की गई हैं। हम कहते रहे हैं कि हमने पुरानी उत्पाद नीति का पर्दाफाश किया, क्योंकि कालाबाजारी हो रही थी. दिल्ली में यूपी, हरियाणा से शराब की तस्करी हो रही थी। नई शराब नीति ने इस कालाबाजारी पर रोक लगाई थी और दिल्ली सरकार को हो रहे राजस्व घाटे को रोका था। आतिशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह भी कहा कि सीएजी की रिपोर्ट का आठवां चैप्टर कहता है कि नई नीति पारदर्शी थी, इसमें कालाबाजारी रोकने के प्रावधान थे और इससे राजस्व बढ़ना चाहिए था। तथ्य यह है कि आतिशी के अनुसार, जब यही नीति पंजाब में लागू की गई तो वहां भी एक्साइज रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई। इस नीति के कारण 2021 से 2025 तक पंजाब के एक्साइज रेवेन्यू में 65 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर नई नीति ठीक से लागू की जाती तो सिर्फ एक साल में राजस्व 4,108 करोड़ से बढ़कर 8,911 करोड़ हो जाता। उन्होंने कहा कि नई उत्पाद शुल्क नीति लागू नहीं हुई, इसलिए दिल्ली के एक्साइज रेवेन्यू में 2,000 करोड़ रुपये की कमी हुई। इसकी जांच होनी चाहिए कि इसे किसने लागू नहीं होने दिया। इसके लिए तीन लोग जिम्मेदार हैं – दिल्ली एलजी, सीबीआई और ईडी…। इससे स्पष्ट है कि आप सरकार ने पुरानी नीति को हटाकर सही निर्णय लिया था। हमारी मांग है कि इस सीएजी रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली के उपराज्यपाल, सीबीआई और ईडी की जांच कराई जाए, एफआईआर दर्ज की जाए और कार्रवाई की जाए। (आजजतक डॉट इन की रिपोर्ट के आधार पर)
अगर आतिशी के आरोपों पर यकीन किया जाये तो साफ है कि आम आदमी पार्टी का यह आरोप सही है कि भाजपा ने उसे काम नहीं करने दिया। केंद्र सरकार ने इसके लिए एलजी का उपयोग किया जो आज भी आप के खिलाफ किसी राजनेता की तरह राजनीतिक बयान की खबर छपी है। इसके लिए केंद्र सरकार ने एलजी ही नहीं, कानून तक बदले हैं। एलजी के हस्तक्षेप का आलम यह है कि मुख्यमंत्री के चयन से पहले यमुना की सफाई का प्रचार शुरू हो गया और जवाब दिया गया कि आम आदमी पार्टी ने रोक रखा था। दिलचस्प यह है कि नगर निगम में तो भाजपा थी उसने काम क्यों नहीं किया का भी जवाब भाजपा प्रवक्ता टेलीविजन चैनलों पर यही दे रहे हैं। मीडिया की ओर से भाजपा की योजनाओं में सहायता और प्रचार का हाल यह है कि आज दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक है, “पहली बार दुनिया भारत को लेकर आशावादी, अवसर गंवाये नहीं : मोदी”। एकतरफा प्रचार में मोदी ने यह भी कहा और छपा है, डबल इंजन से मध्य प्रदेश का विकास भी डबल। मामला ग्लोबल इनवेस्टर्स समिट का है। खबर है कि इसमें प्रधानमंत्री ने निवेशकों को दिखाई भारत की उभरती ताकत की तस्वीर।
आप जानते हैं कि अमेरिका हमारे नागरिकों को बेड़ियां लगाकर सेना के मालवाहक विमानों से भेज रहा है और प्रधानमंत्री के अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलकर वापस आने के बाद जो खेप वापस आई उसमें भी लोगों को बेड़ियां लगाई गई थीं। भारत ने इसे छिपाने की कोशिश की, खबर कम छपी। पहला विमान जब आया था तो फोटोग्राफर को ही नहीं जाने दिया गया। बाद में भारत ने यह कहकर इसका बचाव किया कि अमेरिका का नियम है। कुछ सरकार समर्थकों ने इसकी तुलना इमरजेंसी में जॉर्ज फर्नाडींज को बेड़ी लगाने से की और यह सब भारत की कमजोर स्थिति का परिचय देता है तथा हाल में चर्चा में रहा है फिर भी प्रधानमंत्री आत्मप्रशंसा कर रहे हैं और अखबारों में खबरें लीड बन रही हैं। यही नहीं, ‘144 साल बाद का कुंभ’ समाप्त हो उससे पहले आज दैनिक भास्कर का बॉटम है, 43 साल में पहली बार ऐसा…. महाशिवरात्रि पर लगातार 46 घंटे दर्शन देंगे बाबा विश्वनाथ। यह खबर नवोदय टाइम्स में भी इतनी की प्रमुखता से है। सिर्फ शीर्षक अलग है, महाशिवरात्रि से पहले बाबा विश्वनाथ के द्वारा भीड़ अपार। द इंडियन एक्सप्रेस के साथ द टेलीग्राफ में भी पहले पन्ने की तस्वीर बताती है कि प्रयागराज में महाकुम्भ के अंतिम दिन जबरदस्त भीड़ थी और इस कारण ट्रैफिक जाम था। इसे मुख्यमंत्री के उस दावे के साथ देखिये जो वे एक मित्र की सोशल मीडिया पोस्ट को अधिकृत तथ्य बनाने की कोशिश में पढ़ गये। इसके कथित प्रभाव के कारण टीवी पर दिखाये जाते रहे। इसके अनुसार, कुम्भ में गिद्धों को शव दिखे और सूअरों को गंदगी दिखी…., किसी को अव्यवस्था दिखी तथा किसी को कुछ और तथ्य यह है कि दिखा तो सबको सब कुछ है, मुख्यमंत्री मानने को तैयार नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट को भी झुठलाने की कोशिशें हुईं। अखिलेश यादव ने भी कहा, ‘गंदगी की रिपोर्ट तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की थी।’ मुख्य मंत्री उसे कुम्भ नहाने वाले सूअरों की श्रेणी में रख रहे हैं।


