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खुद अपने बारे में भी झूठी खबर देते हैं अरनब गोस्‍वामी! देखिए, प्रसार भारती ने कैसे दिखाया आइना

जेएनयू प्रकरण में इंडिया न्यूज, इंडिया टीवी और जी न्‍यूज के साथ मि‍लकर पूरे देश के माहौल बि‍गाड़ने के दोषी अरनब गोस्‍वामी खुद अपने चैनल के बारे में सबको झूठ ही बताते रहे हैं। प्रसार भारती ने एक ट्वीट करके मामले का खुलासा कि‍या है। प्रसार भारती के ट्वीट के मुताबि‍क अरनब का 97 फीसद व्‍यूवरशि‍प का दावा पूरी तरह से खोखला है। असल में अंग्रेजी में देखे जाने वाले चैनलों में उनका कुल हि‍स्‍सा सिर्फ 37 फीसद है। टाइम्‍स नाऊ की जगह देश में डीडी न्‍यूज सबसे ज्‍यादा देखा जाता है जो कि कुल व्‍यूवरशि‍प का 62 फीसद है।

जेएनयू प्रकरण में इंडिया न्यूज, इंडिया टीवी और जी न्‍यूज के साथ मि‍लकर पूरे देश के माहौल बि‍गाड़ने के दोषी अरनब गोस्‍वामी खुद अपने चैनल के बारे में सबको झूठ ही बताते रहे हैं। प्रसार भारती ने एक ट्वीट करके मामले का खुलासा कि‍या है। प्रसार भारती के ट्वीट के मुताबि‍क अरनब का 97 फीसद व्‍यूवरशि‍प का दावा पूरी तरह से खोखला है। असल में अंग्रेजी में देखे जाने वाले चैनलों में उनका कुल हि‍स्‍सा सिर्फ 37 फीसद है। टाइम्‍स नाऊ की जगह देश में डीडी न्‍यूज सबसे ज्‍यादा देखा जाता है जो कि कुल व्‍यूवरशि‍प का 62 फीसद है।

प्रसार भारती ने अपने ट्वीट में ये भी खुलासा कि‍या है कि नेशन वांट टु नो के नाम पर अरनब गोस्‍वामी ने कि‍स तरह से लोगों को बेवकूफ बनाया। प्राइम टाइम के वक्‍त जि‍न 37 प्रतिशत लोगों ने अरनब का शो देखा, उनका प्रति‍शत डीडी न्‍यूज को छोड़कर बाकी चैनलों के टोटल करने पर 97 फीसद नि‍कलकर आता है। बाकी के तीन फीसद में एक प्रति‍शत सीएनएन आइबीएन देखते हैं जबकि इंडि‍या टुडे, एनडीटीवी और न्‍यूज एक्‍स को शून्‍य फीसद लोग प्राइम टाइम के वक्‍त देखते हैं। अरनब का 97 प्रति‍शत इसी 37 और 1 को जोड़कर नि‍काला है।

पनामा पेपर्स का प भी न समझ पाने वाले अरनब हों या जेएनयू प्रकरण में डॉक्‍टर्ड वीडि‍यो चलाने वाले दीपक चौरसि‍या या सुधीर चौधरी, ये सभी पत्रकारि‍ता को लगातार शर्मसार करते चले आ रहे हैं। साथ में भारत माता की जै बोलकर ये बार बार अपनी शर्म को ति‍रंगे से ढंकने की कोशि‍श तो करते हैं लेकिन ये देखना भूल जाते हैं कि पीत पत्रकारि‍ता करके इनने खुद ही उस झंडे में इतने छेद कर रखे हैं कि इनकी पीत पत्रकारिता उससे छुप नहीं पा रही है… जनता सब देख रही है।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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