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साहित्य

देव प्रकाश चौधरी की किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ का विमोचन

पत्रकार और चित्रकार देव प्रकाश चौधरी की नई किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ का स्वागत कला जगत के साथ-साथ पत्रकार जगत में भी जोर-शोर से हुआ है। पिछले 14 अक्टूबर को इस किताब का भव्य विमोचन जयपुर में आयोजित सार्क सूफी फेस्टिवल में मशहूर कथाकार अजीत कौर के हाथों हुआ। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के दिग्गज विद्वानों की मौजूदगी रही। हिंदी में अपनी तरह की इकलौती और बेहद आकर्षक यह किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ मशहूर चित्रकार अर्पणा कौर की कला दुनिया को नए सिरे से परिभाषित करती है।

पत्रकार और चित्रकार देव प्रकाश चौधरी की नई किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ का स्वागत कला जगत के साथ-साथ पत्रकार जगत में भी जोर-शोर से हुआ है। पिछले 14 अक्टूबर को इस किताब का भव्य विमोचन जयपुर में आयोजित सार्क सूफी फेस्टिवल में मशहूर कथाकार अजीत कौर के हाथों हुआ। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के दिग्गज विद्वानों की मौजूदगी रही। हिंदी में अपनी तरह की इकलौती और बेहद आकर्षक यह किताब ‘जिसका मन रंगरेज’ मशहूर चित्रकार अर्पणा कौर की कला दुनिया को नए सिरे से परिभाषित करती है।

किताब अंतरा इन्फोमीडिया ने प्रकाशित की है और इसकी कीमत 1200 रुपये है। किताब का विमोचन करते हुए कथाकार अजीत कौर ने कहा-‘जिंदगी एक चादर है तो उस चादर को जतन से ओढ़ना ही सूफीवाद है। इस मौके पर अफगानिस्तान से आए कवि ए. के राशिद ने कहा-‘अगर सबका मन रंगरेज की तरह हो जाए तो कितनी खूबसूरत होगी ये दुनिया।’

‘जिसका मन रंगरेज’ देव प्रकाश चौधरी की चौथी किताब है।  दैनिक अखबार अमर उजाला ग्रुप में फीचर और मैग्जीन प्रमुख के रूप में काम करने वाले देवप्रकाश चौधरी इससे पहले स्टार न्यूज और आईबीएन-7 जैसे संस्थानों में काम कर चुके हैं। कला पर उनकी और भी कई किताबें हैं। बिहार की मंजूषा लोककला पर लंबे शोध के बाद लिखी गई किताब ‘ लुभाता इतिहास पुकारती कला ‘ बेहद चर्चित और पुरस्कृत। एक किताब मशहूर सामजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे पर और अलकायदा चीफ ओसामा बिन लादेन पर भी एक किताब। आकाशवाणी और दूरदर्शन के लिए लगातार नाटक और डॉक्यूमेंटरी फिल्म के लिए उन्होंने लेखन का कार्य किया है।

फीचर फिल्मों के लिए भी लिखा और इन दिनों फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘रसप्रिया’ पर आधारित फिल्म के लिए भी संवाद लेखन कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने देश और विदेश की कई महत्वपूर्ण प्रदर्शनियों में हिस्सा लिया, पुरस्कृत हुए हैं। संस्कृति मंत्रालय की फैलोशिप मिली है। साथ ही संस्कृति मंत्रालय के ही एक प्रोजेक्ट के तहत उन्होंने संताल संस्कृति का अध्ययन किया है। विमोचन के मौके पर ‘जिसका मन रंगरेज’ पर हुई बातचीत चर्चा के दौरान चित्रकार अर्पणा कौर, मशहूर नृत्यांगना सोनल मान सिंह अफगानिस्तान के सूफी विद्वान गुलाम एच नॉवीपॉर, पॉश्तो के विद्वान नडीब मानालॉई और बांग्लादेश की कवि नाज्मा आलम ने भी हिस्सा लिया।

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