जोगिंदर सोलंकी-
पत्रकारिता की मेरी यात्रा 1992 में शुरू हुई, जब मैंने INS Building की पांचवी मंजिल पर स्थित दैनिक जागरण में अपना करियर शुरू किया। इसके बाद, मैंने वीर अर्जुन में काम किया, जहां मुझे अजीत अंजुम और कुमार भावेश चन्द्र जैसे वरिष्ठ पत्रकारों के साथ काम करने का अवसर मिला।
वीर अर्जुन के बाद, मैं साप्ताहिक अक्षर भारत में शामिल हुआ, जहां शैलेश जी, स्वर्गीय दिनेश श्रीवास्तव जी, नवीन कुमार, और नवीन बंसल जैसे सहयोगियों के साथ काम करने का अनुभव प्राप्त हुआ। नवीन बंसल मेरे स्कूली साथी भी थे और फोटोग्राफर के तौर पर काम करते थे।
इसके बाद, मैंने नवभारत टाइम्स में कुछ समय बिताया, जहां मुझे एक नए दृष्टिकोण के साथ काम करने का मौका मिला। फिर मैं कुबेर टाइम में शामिल हुआ, जहां स्वर्गीय ओम गुप्ता, अरुण खरे जी जो अब इस दुनिया में नहीं हैं।
आज भी रामेश्वर दयाल, और विनोद सक्सेना जैसे वरिष्ठ पत्रकारों के साथ इनको याद करते हैं। मुझे याद है कि पंजाब केसरी में रहते crime reporting के दौरान हुई एक रंजिश में मेरे दरवाजे पर गोली चलाई गई जो मेरे सिर को छलनी करते हुए निकल गई। उस समय कई पुलिस अधिकारियों जिसमें प्रमुख रूप से विवेक गोगिगा, अनुराग कुमार, प्रणब नंदा और केशव द्विवेदी ने मेरा बहुत साथ दिया।
कुबेर टाइम के बाद, मैंने Jansatta, Hindustan, और Aankhon Dekhi में काम किया। इसके बाद, मैं India TV में शामिल हुआ, जहां रजत शर्मा जी जैसे वरिष्ठ पत्रकार के साथ काम करने का अवसर मिला। India TV के अलावा S1 चैनल और India News में काम किया।
वर्तमान में, मैं देशबन्धु में काम कर रहा हूं, जहां मैं दिल्ली, मध्य प्रदेश, और छत्तीसगढ़ के लिए काम करता हूं। देशबन्धु में काम करने के दौरान, मेरा एक शानदार अनुभव है।
मेरे पत्रकारिता सफर में कई वरिष्ठ पत्रकारों और सहयोगियों का साथ मिला है, जिनमें से कुछ इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। इनमें संदीप ठाकुर…और संतोष तिवारी सबसे ऊपर है।
इसके अलावा राम बहादुर राय जी, और रास बिहारी जी जैसे नाम शामिल हैं। जिनके साथ काम करने का मेरा एक अलग ही अनुभव है।
पत्रकारिता की मेरी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव आए हैं, लेकिन मैंने हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रहने की कोशिश की है। मुझे उम्मीद है कि आगे भी मैं अपने काम के माध्यम से समाज के लिए कुछ अच्छा करने का प्रयास किया और निरंतर करता रहूँगा। मेरे कई साथियों के नाम रह गए हैं। जिस भी मेरे साथी को याद आए तो मुझे बताना।


