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कॉमनवेल्थ रिपोर्ट: 17 साल में 213 पत्रकारों की हत्या, 96% मामलों में अपराधी आज़ाद

नई दिल्ली। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर जारी चुनौतियों पर एक ताज़ा रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (CHRI), कॉमनवेल्थ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (CJA) और कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 से 2023 के बीच 19 राष्ट्रमंडल देशों में 213 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें से 96% मामलों में अपराधियों को सज़ा नहीं मिली।

Who Controls the Narrative? Legal Restrictions on Freedom of Expression in the Commonwealth” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, कई कॉमनवेल्थ देशों के राष्ट्रीय कानून प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को गंभीर रूप से बाधित करते हैं। इनमें से 41 देशों में मानहानि को आपराधिक अपराध माना जाता है, 48 में राजद्रोह से जुड़े प्रावधान हैं और 37 देशों में ईशनिंदा संबंधी कानून अब भी लागू हैं।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि औपनिवेशिक दौर से चले आ रहे इन कठोर कानूनों का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार रक्षकों और सरकार की आलोचना करने वालों को डराने और चुप कराने के लिए किया जाता है।

कॉमनवेल्थ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के विलियम हॉर्स्ले ने कहा, “पिछले 20 वर्षों में 200 से अधिक पत्रकारों की हत्याओं के दोषियों को सज़ा दिलाने में कॉमनवेल्थ देश लगभग पूरी तरह नाकाम रहे हैं। यह स्थिति शर्मनाक है और इसे जड़ से खत्म करना ज़रूरी है।”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2024 में समोआ शिखर बैठक में कॉमनवेल्थ देशों ने मीडिया की स्वतंत्रता और सुशासन को मज़बूती देने के लिए 11-सूत्रीय सिद्धांत अपनाए थे। अब ज़रूरत है कि सभी सदस्य देश नागरिक समाज संगठनों और मीडिया के साथ मिलकर इन सिद्धांतों को लागू करें।

कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव की निदेशक स्नेह अरोड़ा ने कहा, “कई देश आज भी औपनिवेशिक काल के दमनकारी कानूनों को लागू कर रहे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों और उनके अपने दायित्वों का उल्लंघन है।”

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

  • 2006–2023 के बीच 213 पत्रकारों की हत्या, 96% मामलों में न्याय नहीं।
  • 41 देशों में मानहानि के लिए आपराधिक सज़ा का प्रावधान।
  • 48 देशों में राजद्रोह संबंधी कानून अब भी लागू।
  • 37 देशों में ईशनिंदा कानून मौजूद, पत्रकारिता के लिए बड़ी चुनौती।
  • समोआ मीडिया सिद्धांतों को लागू करने पर दिया गया ज़ोर।
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