
संजय कुमार सिंह
विमान हादसे की खबरों के बीच देश के नागरिक उड्डयन मंत्री की पहचान पहेली बनी हुई है। नाम बहुत कम लोग जानते हैं और तस्वीर से तो आम लोगों में शायद ही कोई पहचान पाये। हादसे के बाद की खबरों में नागरिक उड्डयन मंत्री का नाम आ सकता था पर छाये रहे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह। आप जानते हैं, ब्लैक बॉक्स मिलने से पहले का उनका बयान, ‘ये एक्सीडेंट था… कोई रोक नहीं सकता’ बेहद असंवेदनशील और गैर जिम्मेदार है। इसपर मैं कल लिख चुका हूं आज जो खबर है वह इसी का विस्तार और दिलचस्प है। अहमदाबाद का विमान हादसा इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इससे जमीन पर भारी नुकसान हुआ है। कई लोग मारे गये और अभी तक इस बारे में पक्की सूचना नहीं है। फिर भी मेरे दोनों हिन्दी अखबारों से यह मुद्दा गायब है, शायद डबल इंजन सरकारों के कारण पर अभी वह मेरी चिन्ता का विषय नहीं है। हालांकि, हिन्दुस्तान टाइम्स ने आज लीड के साथ एक खबर छापी है जिसका शीर्षक है, और शव मिलने से मरने वालों की संख्या बढ़ी; डीएनए मिलाने का शुरुआती काम पूरा। इसमें एक्स पर राज्य के मंत्री हर्ष सांघवी की पोस्ट के हवाले से बताया गया है कि विमान हादसे के 19 पीड़ितों की पहचान डीएनए टेस्टिंग से हुई है। इस खबर में बताया गया है कि जमीन पर मरने वालों की सही संख्या को लेकर अभी भी भ्रम है। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि 34 साल के महेश कलावाडिया न तो विमान में थे और न हॉस्टल में जहां विमान गिरा। उनका अंतिम ज्ञात लोकेशन मौके से 700 मीटर दूर का है। उनका मोबाइल बंद आ रहा है और ना उनका ना उनकी स्कूटी का पता चला है।
इसके बावजूद आज इंडियन एक्सप्रेस, द हिन्दू, दि एशियन एज और द टेलीग्राफ की लीड विमान हादसे की जांच के लिए उच्च स्तरीय पैनल बनाये जाने की खबर है। कहने की जरूरत नहीं है कि भिन्न कारणों से विमान हादसों की जांच होती ही है और भारत में भी एयरक्राफ्ट ऐक्सीडेंट इंवेस्टीगेशन व्यूरो पहले से तकनीकी जांच का नेतृत्व कर रहा है। फिर भी पैनल बना है तो खबर होनी ही थी। इसकी सबसे खास बात है, केंद्रीय गृहसचिव के नेतृत्व में गठित समित तीन माह में सौंपेगी जांच रिपोर्ट। यह देशबन्धु का उपशीर्षक है। द हिन्दू का शीर्षक है, केंद्र ने एयर क्रैश रेसपांस गाइडलाइन्स बनाने के लिए पैनल स्थापित किया है। इसका उपशीर्षक है, गृहसचिव के नेतृत्व वाले पैनल से कहा गया है कि स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर बनाये और विमान हादसे रोकने के लिए व्यापक दिशा निर्देश तय करे। मंत्रालय ने कहा है कि यह पैनल भिन्न संस्थाओं द्वारा उड़ान संख्या एआई 171 के गिरने की जांच की जगह नहीं लेगा। यह खबर नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के आधार पर है। देशंधन्धु में खबर के साथ नागरिक उड्डयन मंत्री और राज्य मंत्री की प्रेस कांफ्रेंस की तस्वीर है। इंडियन एक्सप्रेस और दूसरे अखबारों ने सिर्फ केंद्रीय विमानन मंत्री की फोटो छापी है। आज मुझे यही बताना है कि केंद्रीय गृहमंत्री के बयान या किसी और कारण से अगर गृहमंत्री छाये रहे तो नागरिक उड्डयन मंत्री को आज भी पूरा मौका नहीं मिला।
इंडियन एक्सप्रेस ने खबर के साथ नागरिक उड्डयन मंत्री की फोटो छापी है। कैप्शन में बताया गया है कि वे एक प्रेस मीट में हैं पर लग ऐसा रहा है जैसे वे कहीं पेशी के लिए बुलाये गये हों और जिरह का सामना कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ने एक और खबर के साथ केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की तस्वीर छापी है। खबर है, सरकार ने (बोइंग) 787 (विमानों) की जांच के आदेश दिये तो एयर इंडिया ने देरी की चेतावनी दी। इस खबर के साथ केंद्रीय विमानन मंत्री की फोटो और हाईलाइट किया हुआ अंश है, शुक्रवार को डीजीसीए द्वारा निगरानी का विस्तार किये जाने के परिणामस्वरूप कुल 34 बी787 में से आठ का निरीक्षण किया जा चुका है। इसके साथ एक और खबर है, नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा सभी संभावनाओं पर अभी भी विचार चल रहा है। कहने की जरूरत नहीं है कि आज (पहले पन्ने) पर केंद्रीय विमान मंत्री का नाम और फोटो छापने के लिए खबर भी है। लेकिन मेरे आठ अखबारों में ऊपर वर्णित दो अखबारों के अलावा सिर्फ नवोदय टाइम्स ने चार कॉम की खबर में विमानन मंत्री की फोटो आधे कॉलम की लगाई है जबकि दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे को उठाती क्रेन की फोटो दो कॉलम की है। देशबन्धु ने विमान हादसे पर जांच कमेटी गठित शीर्षक से लीड वैसे ही छापी है जैसे अघोषित इमरजेंसी से पहले छपती थी और मंत्री के प्रेस कांफ्रेंस की तस्वीर खबर के साथ प्रमुखता से छपी है। वैसे ही जैसे छपती रही है। देशबन्धु की खबर में विपक्ष के आरोप या मांग को भी महत्व दिया गया है जो अब रिवाज में ही नहीं है। अखबार ने जांच के लिए कमेटी बनी के साथ एक खबर छापी है, “हादसे की जिम्मेदरी तय हो : खरगे”। बेशक, यह एक सही और जरूरी मांग है भले जांच में यह पता ही नहीं चले या तय नहीं हो पाये कि कौन जिम्मेदर है। फिर भी जिम्मेदार का पता लगाया जाना चाहिये और …कोई रोक नहीं सकता, कहना बेमतलब है। विपक्ष की ऐसी मांग है तो निश्चित रूप से खबर है लेकिन दो ही लोगों की खबर और फोटो से रोज पहला पन्ना भरना अब अखरने लगा है। विमान हादसे की तमाम खबरों के बावजूद विमानन मंत्री का नाम और फोटो गायब है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड विमान हादसे की है और पायलट के अंतिम शब्दों के साथ दुर्घटना के कारणों की चर्चा की गई है। हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी हादसे की खबर को ही लीड बनाया है लेकिन खबर थोड़ी अलग है। इसके अनुसार ब्लैक बॉक्स लगभग सही हालत में मिला है और इसे जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग के रूप में देखा जा रहा है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, नीट-यूजी : 12.36 लाख सफल अभ्यर्थियों में 7.2 लाख बेटियां, राज्यों में यूपी अव्वल। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, ईरान ने की ड्रोन और मिसाइलों की बौछार इजराइल बोला, तबाह हो जायेगा तेहरान। अमर उजाला में आज सरकारी प्रचार की दो बड़ी खबरें हैं और दोनों जितनी बड़ी तथा प्रमुखता से छपी हैं उतनी प्रमुखता से इन खबरों को मेरे किसी और अखबार ने नहीं छापा है। तीन कॉलम में छपी इन दो खबरों में ऊपर छपी खबर का शीर्षक है, अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वालों को मिलेगा मालिकाना हक, सर्कल रेट में भी होगा बदलाव। उपशीर्षक है, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने टास्क फोर्स के साथ बैठक में की घोषणा। इस खबर के साथ मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता की फोटो भी है। मैं पहले कह चुका हूं कि इन दिन केंद्रीय नागर विमानन का नाम लाख टके का सवाल है। फोटो से तो शायद ही कोई उन्हें पहचाने। दोनों केंद्रीय मंत्रियों (कैबिनेट और राज्य) की फोटो आज सिर्फ देशबन्धु में है। तथ्य यह भी है कि कैबिनेट मंत्री राममोहन नायडू किंजरापू भाजपा के सहयोगी संगठन तेलुगू देशम पार्टी के हैं जबकि राज्य मंत्री श्री मुरलीधर मोहल भाजपा के सांसद हैं। अमर उजाला की दूसरी सरकारी खबर का शीर्षक है, पीएम मोदी आज से तीन देशों की यात्रा पर कनाडा में जी-7 की बैठक में शामिल होंगे। इस खबर के साथ प्रधानमंत्री की फोटो तो है ही उपशीर्षक है, ऑपरेशन सिन्दूर के बाद पहली विदेश यात्रा, साइप्रस और क्रोएशिया भी जाएंगे।



