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आज के अखबार : कमीज उतारने की ‘नंगी’ राजनीति, नंगी रिपोर्टिंग तथा बांटो और राज करो की नंगी कोशिश

मीडिया संघ परिवार, भाजपा और नरेन्द्र मोदी के लिए बैटिंग के नाम पर वर्षों से नंगई कर रहा है। नरेन्द्र मोदी कहते थे मनमोहन सिंह रेनकोट पहन कर नहाते हैं अब कहा, देश को पता है आप नंगे हैं। यह नहीं बता रहे कि हरदीप पुरी एपस्टीन से अपने लिए मिले, संघ परिवार के लिए, देश के लिए या बेटी बढ़ाओ, बेटी बचाओ के लिए।

संजय कुमार सिंह

आज कई अखबारों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नंगी राजनीति की नंगी रिपोर्टिंग की है। अमर उजाला और दि एशियन एज ने तो इसे लीड बना दिया है। इंडियन एक्सप्रेस ने सेकेंड लीड बनाया है। नंगा तो नहीं लिखा है, बेशर्म या शर्म हीन लिखा है जो नरेन्द्र मोदी के झूठ जिसे उनकी पार्टी चुनावी जुमले कहती है, के मुकाबले कुछ नहीं है। आज मेरे नौ अखबारों में से आठ में यह ‘खबर’ पहले पन्ने पर है। अकेले द हिन्दू में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। इसके बावजूद, ” नरेन्द्र मोदी ने बांटो और राज करो की अपनी राजनीति के तहत यह भी कहा है कि, कांग्रेस ने एआई समिट का उपयोग अपनी बेशर्म राजनीति के लिए की, उसकी सहयोगी पार्टियों – टीएमसी, डीएमके और नेशनल कांफ्रेंस सच्चाई के साथ रहे। कहने की जरूरत नहीं है कि बिल गेट्स ने आंध्र प्रदेश में कोई कार्यक्रम रद्द नहीं किया या किया भी हो तो राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और दूसरे मंत्रियों के साथ उनकी बैठकें हुईं। दिल्ली का बिल गेट्स का कार्यक्रम आयोजकों ने रद्द किया या बिल गेट्स ने खुद – स्पष्ट नहीं किया गया है। दुनिया जानती है कि पहले सूत्रों के हवाले से खबर चली, फिर खबर आई कि उनका नाम वक्ताओं की सूची से हटा दिया गया है। इसके बाद बिल गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि बिल गेट्स आयोजन में नहीं बोलेंगे। इस तरह, केंद्र सरकार द्वारा आयोजित एआई सम्मेलन में बिल गेट्स का नहीं बोलना और भाजपा की सहयोगी पार्टी के मुख्यमंत्री का मिलना, आंध्र प्रदेश में कार्यक्रम होना भी तो वैसे ही है। पर प्रधानमंत्री को दिक्कत कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों से है। अपनी सहयोगी पार्टी से नहीं है और क्यों नहीं है समझना मुश्किल नहीं है।

अब आइए आज के पहले पन्ने की खबरें देख लें और तय करें कि इनमें से किस खबर को पहले पन्ने पर रखना जरूरी था और नंगई वाली कौन-कौन सी खबर अंदर जा सकती थी। 

1. ब्राजील के प्रेसिडेंट लुइज़ इंसियो लूला दा सिल्वा ने कहा,  (अमेरिकी) टैरिफ का सामना कर रहे देशों के एकजुट होने का समय

2. किश्तवार में जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकी मारे गए : सेना

3. भारत अमेरिका ने मुलाकात टाली; करार का समय बढ़ सकता है

4. टैरिफ को लेकर उलझन : सरकार ने व्यापार करार दल का अमेरिका दौरा रोका

5. पुलिस ने लश्कर-ए-तोएबा से जुड़े मोड्यूल का खुलासा किया, शहर में हमले की साजिश नाकाम की

6. पाकिस्तान सीमा से लगी चौकी पंजाब के दो पुलिस वाले मारे गए, आतंकी संगठन का कहना है हमने मारा

7. माओवादी नेता ने तेलंगाना में समर्पण किया। 

8. कांग्रेस ने विधि शाखा के विस्तार के लिए युवाओं को जोड़ने की योजना का खुलासा किया

लोकतांत्रिक प्रदर्शन की एक पुरानी फोटो जो सोशल मीडिया पर घूम रही है। बीच में खड़े दाढ़ी वाले सज्जन हरियाणा में भाजपाई मंत्री हैं।   

इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक वही है जो नरेन्द्र मोदी ने कहा है और वह सब नहीं है जो मैंने ऊपर बताया है। इस तरह के सवाल प्रेस कांफ्रेंस में पूछे जाते थे पर अब वो दिन रहे नहीं। इसलिए मैं नहीं कह सकता कि यह गलत है (या सही है)। मैं सिर्फ रेखांकित कर रहा हूं। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री को इससे दिक्कत है तो उससे भी होनी चाहिए और उससे नहीं है, इससे है तो यही खबर है। यह नहीं जो इंडियन एक्सप्रेस में छपी है। यह अंदर की खबर हो सकती थी पर जो नहीं हुई वह पहले पन्ने की थी। किसी सम्मेलन में किसी पार्टी के 10-12 युवकों का पहुंच जाना, सिर्फ कमीज खोलकर बनियान में नारे लगाना या विरोध करना नग्न राजनीति नहीं हो सकती है। खासकर तब जब इन अखाड़ाबाजों में एक ही लड़के ने बनियान नहीं पहनी थी या बनियान भी खोल दी थी। अगर यह पहले पन्ने की खबर और सूचना है तो इंदौर में भाजपा के लोगों ने जो हिंसा की वह भी हिंसक राजनीति है। और विरोध अगर किया ही जाना है तो हिंसक राजनीति का ज्यादा जरूरी है। सत्तारूढ़ दल कर रहा है तो और भी जरूरी है। पुराने समय में इसपर अदालत स्वतः कार्रवाई कर सकती थी अब अदालत ने कहा है कि असम का मामला है, गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? दूसरी ओर, जब लोग (और पुलिसकर्मी भी) घायल होते हैं या किसी की मौत हो जाती है तभी खबर बड़ी होती है। कहने की जरूरत नहीं है कि प्रधानमंत्री के इस बयान पर संवाददाताओं ने कांग्रेस प्रवक्ता से टिप्पणी मांगी तो सुप्रिया श्रीनेत ने ठीक से बताया था, लेकिन वह पहले पन्ने पर नहीं है। अमर उजाला में पहले पन्ने पर खबर है, कांग्रेस को बचाने का खेल न करे मीडिया। मुख्य शीर्षक है, “कांग्रेस ने एआई समिट को बनाया नग्न राजनीति का अखाड़ा : मोदी”। उपशीर्षक है – कहा, देश पहले से जानता है कि आप नग्न हो, फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्यों पड़ी। मुझे नहीं पता प्रधानमंत्री के ऐसा कहने का आधार क्या है। पर स्थिति यही है कि नंगे लोग नियमित प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और जो प्रेस कांफ्रेंस नहीं कर पाया वह दूसरों को नंगा कह रहा है। सार्वजनिक उपस्थिति में नाम लिखा सूट पहन चुके हैं, सूट-बूट की सरकार कहे जाते थे पर अब सूट ऐसा छोड़ा कि एआई सम्मेलन की तस्वीर में अकेला भारत बिना सूट के था।

नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, “एआई सम्मेलन में कांग्रेस की गंदी और नंगी राजनीति : मोदी”। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, अब दिल्ली से मेरठ सिर्फ साठ मिनट में। अंग्रेजी अखबारों में दि एशियन एज की लीड का शीर्षक वही है जो अमर उजाला में है। अमर उजाला ने नंगी को नग्न लिखा है जबकि दि एशियन एज ने गंदी राजनीति लिखा है। द टेलीग्राफ में यह सिंगल कॉलम की खबर है। शीर्षक हिन्दी में इस प्रकार होगा, बिना कमीज प्रदर्शन के लिए ‘नंगी’ कांग्रेस पर मोदी का गुस्साहिन्दुस्तान टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, एआई मीट में कांग्रेस ने नंगी राजनीति की। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर तीन कॉलम में है। शीर्षक है, कांग्रेस के विरोध पर प्रधानमंत्री ने कहा, देश जानता है कि आप नंगे हैं, फिर कपड़े उतारने की क्या जरूरत। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस खासकर तबके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि रेनकोट पहन कर नहाते हैं। अब कह रहे हैं कि कांग्रेस नंगी तो है ही कमीज उतारने की क्या जरूरत। उल्लेखनीय है कि नोटबंदी को “संगठित लूट और वैध डकैती” कहने से मोदी उनसे परेशान थे। हालांकि, उनके प्रधानमंत्री रहते घोटाले के जो आरोप लगे वो साबित नहीं हुए और आरोप लगाने वालों को शर्म नहीं आई। कांग्रेस ने बेशर्म या नंगा भी नहीं कहा। मोदी राज में संगठित लूट और वैध डकैती के ढेरों उदाहरण हैं लेकिन उसकी याद किसी को हो, ऐसा नहीं लगता है।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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