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उत्तर प्रदेश

कानपुर में बदमाशों ने एक और पत्रकार को लूटा

कानपुर नगर : बर्रा थानाक्षेत्र में देर रात शास्त्री चौक चौराहे के निकट एक पत्रकार से बदमाशों ने मोबाइल और पैसे लूट लिए। लुटेरों ने पत्रकार को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल भी कर दिया। जिले में इससे पहले भी कई पत्रकार लुट चुके हैं लेकिन हर बार की तरह पुलिस का रवैया शायद वही पुराना ढाक के तीन पात जैसा निकले।  

कानपुर नगर : बर्रा थानाक्षेत्र में देर रात शास्त्री चौक चौराहे के निकट एक पत्रकार से बदमाशों ने मोबाइल और पैसे लूट लिए। लुटेरों ने पत्रकार को मारपीट कर गंभीर रूप से घायल भी कर दिया। जिले में इससे पहले भी कई पत्रकार लुट चुके हैं लेकिन हर बार की तरह पुलिस का रवैया शायद वही पुराना ढाक के तीन पात जैसा निकले।  

कानपुर नगर में बर्रा-6 निवासी अमर अस्थाना एक अखबार में काम करते हैं। वह रोज की तरह देर रात को अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। जैसे ही शास्त्री चौक के पास पहुंचे, पीछे से आ रहे मोटरसाइकिल सवार दो युवकों ने ओवर टेक करर उनकी मोटरसाइकिल में टक्कर मार दी। वह जमीन पर गिरकर घायल हो गए।

उसी दौरान दोनों बदमाशों ने उनकी जेब में रखे दो मोबाइल व करीब तीन हजार रुपये लूट लिए। घायल अमर किसी तरह थाने पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने अमर को इलाज के लिए भर्ती कराया। सीओ गोविंदनगर ओपी सिंह ने बताया कि मुकदमा लिखकर लुटेरो की तलाश की जा रही है।

घटना से क्षुब्ध पत्रकारों का कहना है कि आखिर कब तक मीडियाकर्मियों पर हमले होते रहेंगे और पुलिस, प्रशासन, शासन और नेता चुप्पी साधे रहेंगे। मीडिया को संविधान का चौथा स्तम्भ बता कर बेवकूफ बनाया जा रहा है। जब पुलिस को मौका मिलता है, वह हमले कर देती है, अपराधी हमले करता है और जिस सरकार के कारनामो को उजागर करो, वह भी हमले करने को तैयार। पत्रकार देर रात तक काम करे, अँधेरी रात में अकेले घर जाये,  पुलिस/ अधिकारी/ सरकार /नेता सबकी खबर छापकर सबका दुश्मन बने लेकिन सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं। कोई भी सरकार मीडिया प्रोटेक्शन एक्ट क्यों नहीं लाती, क्यों नहीं मीडिया पर हमले करने वालों के खिलाफ गैर जमानती कानून बनता। क्यों नहीं मीडिया पर हमले करने वाले पुलिसवालों को कड़ी सजा दी जाती है? अगर किसी घटना पर जल्दी पहुंचने के लिए पुलिस/नेताओं/ मंत्रियों को लाल नीली बत्ती की सुविधा दी जा सकती है तो पत्रकार को भी सुरक्षा क्यों नहीं? 

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