संजय कुमार सिंह-
आप जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में 10 साल बाद विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। बहुप्रचारित, अनुच्छेद 370 को हटाने के 5 साल बाद, ‘एक देश, एक चुनाव’ के प्रचार और जरूरत के बावजूद तीन चरणों में वोटिंग है और 4 अक्टूबर को मतगणना होगी। इस बीच हरियाणा में भी चुनाव की घोषणा हो चुकी है पर अखबारों की खबरों से नहीं लग रहा है कि चुनाव पास है। अमूमन चुनाव की घोषणा के बाद सरकारी घोषणाएं नहीं होती हैं। लेकिन हाल में पेंशन योजना की घोषणा हुई और आज भी लद्दाख में पांच नये जिले बनाने की घोषणा है।
नैतिकता का तकाजा है कि सरकार ऐसी घोषणाएं पहले करती और अभी आदर्श आचार संहिता का पालन करते हुए चुनाव लड़ती। पर ऐसा हो नहीं रहा है। आप जानते हैं कि घाटी में भाजपा की हालत वैसे पतली है और लोकसभा चुनाव में उसने उम्मीदवार नहीं उतारे थे।
अब जब राज्य को तोड़कर दो केंद्रशासित प्रदेश बनाने का विरोध हो रहा है और न सिर्फ 370 को फिर से बहाल करने की मांग है बल्कि पूर्ण राज्य का दर्जा देने की भी मांग है। ऐसे में भाजपा की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है। भाजपा चुनाव जीतने के लिए क्या कर रही है और संभावित हार की स्थिति में क्या करेगी यह सब जानना- समझना दिलचस्प होगा। लेकिन मीडिया में ऐसा कुछ नहीं है। विपक्ष अगर मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है तो भाजपा में आंतरिक कलह चरम पर है। हालत यह है कि उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद तुरंत वापस ले ली गई, प्रतिभाशाली और लोकप्रिय सांसद के बयानों के लिए माफी मांगने जैसी स्थिति है और बयान से किनारा करके काम चलाना पड़ रहा है। इसके लिए सादे कागज पर बिना नाम और दस्तखत के प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है।
आज के अखबारों में यह सब खबर एक साथ जैसे होनी चाहिेये थी वैसे तो नहीं ही है। बहुत बचाकर लिखा गया है और इस लिहाज से सबसे अच्छी खबर नवोदय टाइम्स में है।

जो नवोदय टाइम्स नहीं पढ़ते हैं उनके लिए बता दूं कि लीड का शीर्षक है, “भाजपा का भीतरी संघर्ष सामने, कांग्रेस नेशनल कांफ्रेंस में बनी सहमति”। दसरे अखबारों में इसका विवरण है पर वह अलग खबर है। यह नहीं बताया गया है कि इसके मुकाबले भाजपा की हालत खराब है और पैराशूट उम्मीदवारों का ऐसा विरोध हुआ है कि जारी की गई सूची वापस लेनी पड़ी है। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस में जो सबसे बड़ी खबर है उसका शीर्षक है, भाजपा की पहली सूची रद्द, पुराने लोगों के विरोध पर इसमें 16 नाम ही रह गये। हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक है, जम्मू और कश्मीर चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन को लेकर स्थानीय इकाई में अशांति।
टाइम्स ऑफ इंडिया में नये जिले बनाने की खबर चुनाव की खबरों के साथ है। मुख्य खबर सीटों के बंटवारे की है। शीर्षक में ही बताया गया है कि कांग्रेस 32 पर मान गई, पांच सीटों पर फ्रेंडली फाइट होगी। इसी में एक खबर है, भाजपा ने विरोध के बाद 44 उम्मीदवारों की सूची वापस ली।
द हिन्दू में कंगना रणौत को चेतावनी की खबर दो कॉलम में टॉप पर है और इसके नीचे तीन कॉलम में पांच नए जिले घोषित करने की सूचना है। शीर्षक है, “अमित शाह ने लद्दाख के लिए पांच नये जिलों की घोषणा की”। अमित शाह ने घोषणा की – यह अपने आप में खबर है क्योंकि घोषणा गृहमंत्री करते हैं, चुनाव के समय नहीं करते हैं और किया है तो सब कुछ इस नाम से समझ में आ जाता है। द टेलीग्राफ में कंगना रणौत की खबर को सिंगल कॉलम में छापा है। बाकी खबरें यहां नहीं हैं।
ऐसी हालत में अखबारों ने आज जिस खबर को प्राथमिकता दी है और महत्वपूर्ण बनाया है वह है, मोदी और बाइडेन ने यूक्रेन के साथ बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा पर चर्चा की (इंडियन एक्सप्रेस)। पाकिस्तान में लक्षित आतंकी हमला, कम से कम 72 मरे (हिन्दुस्तान टाइम्स)।
टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक वही है जो इंडियन एक्सप्रेस का, मोदी और बाइडेन ने यूक्रेन के साथ बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा पर चर्चा की। हिन्दू ने पाकिस्तान के आतंकी हमले में कम से कम 38 लोगों के मारे जाने की खबर को लीड बनाया है।
द टेलीग्राफ की लीड – आरजी कर मामले में मौत का विरोध करने के लिए राज्य सरकर के मुख्यालय नबामा के की खबर आज है। अखबार की खबर के अनुसार नबामा मार्च को लेकर हिसा का अलर्ट है। पुलिस को छात्रों की अवैध रैली में साजिश की बू आ रही है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, संजय रॉय ने जुर्म कबूला। मेरे ख्याल से यह पुरानी खबर है और वह पहले भी अपराध स्वीकार कर चुका है और इमें कोई नई बात नहीं है। जो नई बात है वह पहले पन्ने पर नहीं है।



BS kandari
August 28, 2024 at 3:58 pm
J&K me BJP ki government banegi aur desh drohi rote firenge Pakistan parast haramkhor. Jai Shri Ram, Har Har Mahadev, Bharat Mata ki Jai, Vande Mataram