हरिद्वार : हरिद्वार में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित मस्जिद और मजार पर पर्दे लगाने की खबर को प्रमुखता से दिखाया तो पुलिस कप्तान और उपकप्तान नाराज हो गए। बंद कमरे में पत्रकारों को खूब सुनाई और मुकदमा लिखने तक की बात कह डाली। कप्तान से ज्यादा पारा तो उप कप्तान यानी एसपी सिटी का चढ़ा हुआ दिखाई दिया। उसने दो दो तीन पत्रकारों का नाम लेकर उनसे ऐसी उम्मीद नहीं होने की बात कह डाली।
पूरा मामला क्या था?
हरिद्वार के ज्वालापुर से कांवड़ यात्रा मार्ग निकलता है। शहर में कांवड़ यात्रा मार्ग में एक मस्जिद और मजार है जिनके बाहर से कांवड़िए गुजरते हैं और हमेशा से गुजरते चले आ रहे है।

अब 25 जुलाई को मजार और मस्जिद के बाद अचानक पर्दे लगाकर उन्हें ढक दिया गया। मुस्लिम समाज को आपत्ति हुई तो मीडिया को बुलाया गया। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार मौके पर पहुंचे और खबर बनाकर चैनल को भेज दी गई। खबर भेजने से पहले अधिकारियों के वर्जन मांगे गए। डीएम और एसएसपी ने इस पर अनभिज्ञता बताते हुए बयान देने से मना कर दिया था। खैर, कुछ भी हो यह खबर जहां भी चली तो ऐसे चली कि अगले दिन प्रशासन बैकफुट पर आया और अचानक शाम को पर्दे हटा दिए गए। इत्तेफाक से परदे हटाते वक्त भी पत्रकार मौके पर मौजूद थे।
27 जुलाई को पुलिस कप्तान सीसीआर भवन पहुंचे तो पत्रकार भी कांवड़ से संबंधित बाइट करने पहुंच गए। एसएसपी के साथ एसपी सिटी भी बैठे थे। पत्रकार गए और बाइट लेने के लिए बोलने वाले थे कि एसएसपी साहब और एसपी सिटी साहब पत्रकारों पर भड़क गए। उन पर मुकदमा लिखने की बात कहने लगे। एसपी सिटी भी पत्रकारों से ऐसी उम्मीद नहीं होने की बात कहकर गरजने लगे। दोनों अधिकारियों ने सबको खूब सुनाई।
खबर दिखाने वाले पत्रकारों में न्यूज नेशन के महावीर नेगी, आज तक के मुदित अग्रवाल, न्यूज 18 के पुलकित शुक्ला, ईटीवी भारत के सुमेश खत्री, टीवी 100 के मयूर सैनी, नवोदय टाइम्स के सचिन कुमार, भारत एक्सप्रेस के आशीष मिश्रा, इंडिया वाइस के विकास चौहान, हिंदी खबर के सचिन सैनी, न्यूज एजेंसी पीटीआई के आशीष धीमान शामिल थे। सभी ने मजबूती से अपनी बात को रखा और फिर मांग कर डाली कि पर्दे किसके कहने पर लगाए गए थे। किसने इतनी बड़ी साजिश रच डाली। इस साजिश से भी पर्दा उठाया जाना चाहिए। बहरहाल कप्तान ने बात को घुमाया और फिर कांवड़ से संबंधित बाइट देकर बाहर निकल लिए। मगर कप्तान इतना जरूर कहते हुए नजर आए की इसका गलत इम्पैक्ट गया है उनके डीजीपी ने भी उन्हें खूब सुनाया है।
बहरहाल पत्रकारों ने अपना काम किया और सच दिखाते हुए एक ज्वलंत मुद्दे को उठने से रोक लिया। कांवड यात्रा मार्ग पर सियासत के पर्दे लगते ही अगले दिन उतर भी गए। इससे मुस्लिम समाज के लोगों ने खुशी है।


