यशवंत सिंह-
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने केतन पारेख सहित तीन व्यक्तियों को ‘फ्रंट-रनिंग’ घोटाले में शामिल होने के आरोप में प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। इन पर 65.77 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाने का आरोप है, जिसे SEBI ने जब्त करने का आदेश दिया है।

SEBI की जांच में पाया गया कि पारेख और उनके सहयोगियों ने अमेरिकी निवेश फर्म ‘टाइगर ग्लोबल’ के लेन-देन से संबंधित गैर-सार्वजनिक जानकारी का दुरुपयोग करते हुए अपने लाभ के लिए लेन-देन किए।
यह पहली बार नहीं है जब केतन पारेख पर इस प्रकार के आरोप लगे हैं। 2000 के दशक की शुरुआत में, वे शेयर बाजार में हेरफेर के लिए कुख्यात थे और उन्हें 14 वर्षों के लिए बाजार से प्रतिबंधित किया गया था।
SEBI ने अपने आदेश में पारेख को ‘आदतन अपराधी’ करार दिया है और उनके साथ जुड़े 22 अन्य इकाइयों की अवैध कमाई को भी जब्त करने का निर्देश दिया है।
अब जानिये पूरी कहानी
25 वर्ष पूर्व, ‘इकनॉमिक टाइम्स’ ने केतन पारेख को शेयर बाजार के नए ‘बिग बुल’ के रूप में प्रस्तुत किया था। उनके द्वारा चुने गए दस शेयर्स जिन्हें ‘K-10’ कहा जाता था, की कीमतें कुछ ही महीनों में कई गुना बढ़ जाती थीं, और ये शेयर नियमित रूप से अपर सर्किट हिट करते थे। हालांकि, दो वर्षों के भीतर उनकी धोखाधड़ी उजागर हुई, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें जेल जाना पड़ा और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने उन्हें 14 वर्षों के लिए बाजार में व्यापार करने से प्रतिबंधित कर दिया।
अब, केतन पारेख फिर से चर्चा में हैं। SEBI ने उन पर आरोप लगाया है कि वे अमेरिका के एक बड़े फंड के आदेशों पर फ्रंट-रनिंग कर रहे थे। सिंगापुर स्थित रोहित सालगांवकर को अमेरिकी फंड ने भारतीय शेयर बाजार में अपने सौदों को निष्पादित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसे उन्होंने मोतीलाल ओसवाल और Nuvama के माध्यम से पूरा किया। अमेरिकी फंड द्वारा रोहित को दिए गए शेयर खरीदने या बेचने के निर्देश गैर-सार्वजनिक जानकारी (Non-Public Information) थे, जिन्हें साझा करना अपराध है। रोहित ने यह जानकारी केतन पारेख को दी, जिन्होंने कोलकाता में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इन शेयरों में लेन-देन कर मुनाफा कमाया। यह गतिविधि 2021 से 2023 तक चली, जिससे 66 करोड़ रुपये का लाभ हुआ, जिसे SEBI ने जब्त करने का आदेश दिया है।
SEBI को केतन और कोलकाता के ब्रोकरों के बीच व्हाट्सएप चैट मिली, जिसमें वे खरीद-बिक्री के आदेश दे रहे थे। अपनी पहचान छिपाने के लिए केतन ने 12 फोन नंबरों का उपयोग किया, और कोलकाता के ब्रोकरों ने उनके नंबरों को ‘Jack’, ‘Jack New’, ‘Boss’, ‘Bhai’ जैसे नामों से सेव कर रखा था। SEBI ने इन ब्रोकरों के सौदों और अमेरिकी फंड के आदेशों का मिलान कर पैटर्न का पता लगाया।
पहले भी, जब केतन पारेख पकड़े गए थे, तो शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। उन्होंने ‘TMT’ (टेक्नोलॉजी, मीडिया, टेलीकॉम) शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने का दावा किया था, जो उस समय उभरते हुए सेक्टर थे। HFCL, Zee Telefilms, DSQ सॉफ्टवेयर जैसे शेयरों की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं। बाद में पता चला कि केतन अपने सहयोगियों के साथ मिलकर सर्कुलर ट्रेडिंग के माध्यम से इन शेयरों की कीमतें बढ़ा रहे थे। बाजार भी इन शेयरों के पीछे भागता था, और एक निश्चित स्तर पर पहुंचने के बाद वे इन्हें बेचकर मोटा मुनाफा कमाते थे। 2003 में उन्हें 14 वर्षों के लिए शेयर बाजार में व्यापार करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। 2013 में वे फिर से पकड़े गए, जब वे किसी और के नाम पर कारोबार कर रहे थे। अब, दस वर्षों बाद, वे फिर से SEBI के जाल में फंसे हैं। SEBI ने अपने आदेश में केतन पारेख को आदतन अपराधी कहा है।
SEBI ने केतन पारेख सहित तीन लोगों को शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। इन पर ‘फ्रंट-रनिंग’ घोटाले में शामिल होकर 65.77 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाने का आरोप है। SEBI ने पारेख समेत 22 इकाइयों द्वारा अर्जित अवैध लाभ को जब्त करने का निर्देश भी दिया है।
SEBI ने पारेख, रोहित सालगांवकर और अशोक कुमार पोद्दार को SEBI के साथ रजिस्टर्ड किसी भी मध्यस्थ से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तत्काल प्रभाव से जुड़ने से भी रोक दिया है। SEBI ने पारेख, सालगांवकर और पोद्दार समेत 22 इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न धन वापसी, प्रतिबंध और जुर्माना लगाने सहित उचित निर्देश पारित किए जाएं। नियामक ने कहा कि इन इकाइयों को इस आदेश की प्राप्ति की तिथि से 21 दिन के भीतर SEBI के समक्ष अपने जवाब दाखिल करने होंगे।
SEBI ने अपने आदेश में कहा कि ’रोहित सालगांवकर और केतन पारेख ने ‘फ्रंट-रनिंग’ गतिविधियों को अंजाम देकर बड़े ‘ग्राहकों’ से संबंधित गैर-सार्वजनिक सूचना से अनुचित तरीके से लाभ कमाने की पूरी योजना बनाई। नियामक ने बताया कि अशोक कुमार पोद्दार ने माना है कि उन्होंने फ्रंट-रनिंग में मदद की थी।
SEBI ने केतन पारेख की फ्रंट-रनिंग स्कीम का खुलासा करते हुए 65.77 करोड़ रुपये की अवैध कमाई जब्त की है। इस आदेश में जिन 22 इकाइयों का जिक्र है, उनमें फ्रंट-रनर्स, स्टॉक ब्रोकर, इसमें सहयोग देने वाले और कई अन्य शामिल हैं।
SEBI ने केतन पारेख सहित तीन लोगों को शेयर बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है। इन पर ‘फ्रंट-रनिंग’ घोटाले में शामिल होकर 65.77 करोड़ रुपये का अवैध मुनाफा कमाने का आरोप है। SEBI ने पारेख समेत 22 इकाइयों द्वारा अर्जित अवैध लाभ को जब्त करने का निर्देश भी दिया है।
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