ज्ञानेंद्र शुक्ला-
मॉनिटरिंग करेंगे का क्या मतलब! अभी तक सोए थे क्या आप लोग? किसी निरीह की मौत का ही इंतजार रहता है क्या कार्रवाई के लिए?
मेडिकल टेररिज्म का जीवंत उदाहरण है लखीमपुर की पूनम मौर्य की मौत! केजीएमयू के रेजिडेंट डॉ रमेश ने खदरा के केडी अस्पताल में ले जाकर गलत ऑपरेशन करवा दिया जिससे निर्दोष पूनम की जान चली गई, ये हत्या का केस है!

बृजेश पाठक-
केजीएमयू, लखनऊ के ईएनटी चिकित्सक द्वारा प्राइवेट प्रैक्टिस करने एवं इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु होने संबंधी विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए मेरे द्वारा कुलपति, केजीएमयू, लखनऊ को उक्त प्रकरण की जाँचकर दोषी डॉक्टर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए कृत कार्यवाही की रिपोर्ट 01 सप्ताह में प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गए हैं तथा जिस हॉस्पिटल में यह घटना हुई है उस हॉस्पिटल की जाँच हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी, लखनऊ को भी निर्देश दिये गए हैं।
नवीन-
मेदांता हॉस्पिटल (मौत का सौदागर)
शांभवी सिंह (30 वर्ष) ने लीवर ट्रांसप्लांट हेतु अपने पति को अपना लीवर डोनेट किया था।

मेदांता लखनऊ के डॉक्टरों ने चार लाख रुपए ज्यादा लेने के चक्कर में मोटिवेट करके रोबोटिक सर्जरी किया। लीवर कट करके निकलते समय अंदर इंटेस्टाइन में कट लग गया जिससे लीकेज होने लगा और इन्फेक्शन हो गया।उसके बाद फिर से पेट खोल कर आंतों को ठीक किए लेकिन लीकेज बंद नहीं हुआ। दुबारा फिर पेट का ऑपरेशन किए।
इसी तरह तीन बार पेट का ऑपरेशन किए लेकिन इन्फेक्शन कंट्रोल नहीं कर पाए और पूरे बॉडी में सेप्टिक फैल गया। 35 दिन आईसीयू में रखे रहे और 14 दिन वेंटिलेटर पर।अंत में एक एक करके सारे अंग शिथिल पड़ गए और कल दिन में दो बजे बेटी चल बसी।लीवर निकलते समय आंत में कट लगना डॉक्टरों की घोर लापरवाही द्योतक है।
बेटी को खोना जीवन की सबसे हृदय विदारक घटना है। कहने को डॉक्टर इंडिया के टॉप 10 डॉक्टर्स में है लेकिन जैसी लापरवाही और झूठ बोला गया वह आज के तथाकथित “बड़े”अस्पतालों की पोल खोलता है। ये सरासर मेडिकल हत्या है।
इन मामलों में कुछ टिप्पणियां भी पढ़ें…
ईश्वर दत्त मौर्या-
यह अमृत कल चल रहा है जिसमें सरकार के सभी मंत्री अमृत पीकर अपने सयन कक्ष में सो रहे हैं जनता धर्म का झंडा लेकर सड़क पर आपस में कट मार रही है सरकार से सवाल जवाब करने वाला कोई नहीं है चौथा स्तंभ राष्ट्रीय मीडिया जो एक नंबर की भाड़वा हो चुकी है।
कुलदीप शर्मा-
दोनों ही डॉक्टरों के की मेडिकल की डिग्री रद्द कर दी जाए और साथ ही इलाज मे लापारवाही, KGMU के डॉक्टर ने KGMU मे ऑपरेशन करने के बजाय प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन किया (पद का अनुचित लाभ), के विरुद्ध गैर इरादतन हत्या, लापारवाही की धाराओं मे केस दर्ज किया जाना चाहिए
हेम भगत-
कुल मिलाकर जनता के साथ खिलवाड़ किया जाता कोई मरे या जिये कोई फरक नही पड़ता सरकार को कोई फरक नही पड़ता. हर सरकारी विभाग मे दलाल रिसवत भरे है. यही हाल mmg hospital गाजियाबाद का भी लेकिन कोई कार्यवाही नही होती है
मनीष कुमार-
Har jagah Dr. Ke bhesh me bhagwan ki jagah ab saitan Bane aithe hai, paiso ke lalach me Dr. Ab saitan bante ja rahe hai, har jagah har hospital ki yahi dasha hai lekin sarkar hai ki is taraf dhyan hi nahi de rahi hai aaye din aisa ho raha hai aise Longo par kadi karyvahi ho


