सुप्रीम कोर्ट को गाली देने वाले अखबार मालिक के खिलाफ पुलिस नहीं दर्ज कर रही एफआईआर

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के एमपी नगर स्थित प्रेस कॉम्प्लेक्स में दैनिक समाचार पत्र दबंग दुनिया के कर्मचारी द्वारा मजीठिया वेतनमान का प्रकरण दायर करने से बौखलाए अखबार मालिक और गुटखा कारोबारी किशोर वाधवानी ने दिनांक 16/12/2019 को अपने दफ्तर में केस वापस लेने के लिए कर्मचारी को धमकाया था।

इस दौरान वाधवानी ने कर्मचारी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देने पर माननीय सुप्रीम कोर्ट पर ही अमर्यादित और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था।

मामले में पीड़ित कर्मचारी ने उसी दिन थाना एमपी नगर भोपाल पुलिस को इस संबंध में लिखित शिकायत कर दी थी। प्रकरण को दो माह होने को हैं लेकिन पुलिस अब तक इस मामले में शिकायत के बाद अखबार मालिक के खिलाफ एफआईआर की हिम्मत नहीं जुटा पाई है।

पीड़ित ने पूरे मामले को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी इस संबंध में एक लिखित शिकायत भेजी थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने शिकायत को डायरी नं.1097/ SCI/ PIL(E) दिनांक-09/01/2020 को रजिस्टर्ड कर लिया है।

ज्ञात हो कि घटना का आडियो देशभर में वायरल हो चुका है लेकिन पुलिस मामले में एफआईआर नहीं कर रही है। पीड़ित ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, गृह मंत्री बाला बच्चन, पुलिस महानिदेशक वीके सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आदर्श कटियार सहित विभिन्न् स्तरों पर इस मामले की शिकायत की थी।

इसके बाद मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से 25/12/2019 को वल्लभ भवन मंत्रालय स्थित मुख्यमंत्री के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी आईपीएस अफसर को कार्रवाई के संबंध में एक पत्र भेजा गया था। प्रदेश के मुखिया की ओर से भेजे गए इस पत्र को भी अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पत्र भेजे जाने के बाद भी अफसरों ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ माफियाओं के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति की बात पत्रकारों से चर्चा के दौरान करते रहे हैं। प्रदेशभर में भूमाफियाओं के खिलाफ आंदोलन चलाकर सरकार और प्रशासन अपनी पीठ भी थपथपा रहा है लेकिन सीएम के आदेश के बावजूद मामले में अब तक एफआईआर नहीं होना ये दर्शाता है कि प्रदेश के आला अफसर सीएम के आदेश को भी गंभीरता से नहीं ले रहे।

इस मामले में अब विधि विशेषज्ञों से चर्चा की जा रही है। यदि जल्द ही पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो मामले में अखबार मालिक के साथ राज्य के आला अफसरों को पक्षकार बनाकर कार्रवाई के लिए न्यायालय की शरण ली जाएगी।

Sanjay Rathor

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