उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद क्षत्रिय राजनीति उठान पर है। पिछले दिनों क्षत्रिय विधायकों का जुटान हुआ। अब क्षत्रिय पत्रकारों का सम्मेलन होने जा रहा है। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली से भी कई वरिष्ठ पत्रकार शिरकत करने वाले हैं। इनमें प्रमुख नाम वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय, रामकृपाल सिंह, भड़ास4मीडिया के संस्थापक यशवंत सिंह आदि का है। इस आयोजन में स्वर्गवासी हो चुके कई क्षत्रिय पत्रकारों की स्मृति में पुरस्कार / सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है।
भड़ास के संपादक यशवंत सिंह का इस बारे में कहना है कि धर्म और जाति इस देश का नंगा सच है, इसे सब मानते जानते हैं। राजनेताओं ने इन्हीं दो चीजों के सहारे पॉवर पॉलिटिक्स को नियंत्रित और तदनुरूप गतिमान कर रखा है। ऐसे में यह ज़रूरी है कि जो जिस जाति धर्म में जन्मा है, उसके संगठनों / आयोजनों में शामिल होकर आंतरिक सुधार की प्रक्रिया को तेज करे! जैसे बिना मुस्लिमों की सहमति और सहभागिता से इस्लाम को और ज़्यादा उदार व प्रगतिशील नहीं बनाया जा सकता उसी तरह बिना सकारात्मक जातीय गोलबंदी आधारित चिंतन मनन के, भारत से जातीयता के ज़हर को ख़त्म नहीं किया जा सकता।
जातीय गोलबंदी का मकसद अगर इंटरनल रिफार्म है तो ये प्रोग्रेसिव है। अगर इसका मकसद विद्वेष घृणा है तो ये नेगेटिव है, एंटी सोशल एंटी नेशन ट्रेंड है। अतीत में भी भारत में कई धार्मिक-जातीय सुधार आंदोलन चले जिससे बहुत सी कुरीतियाँ ख़त्म हुईं! मुझे बताया गया कि लखनऊ का क्षत्रिय पत्रकार सम्मेलन सकारात्मक लक्ष्य को हासिल करने के लिए आयोजित किया जा रहा है।
अगर क्षत्रिय समाज के पढ़े लिखे लोग एकजुट होकर अपने अच्छे बुरे पर चिंतन मनन कर रहे हैं तो ये स्वागत योग्य कदम है। हालांकि अभी तक का जो इतिहास रहा है उसमें क्षत्रिय का सबसे बड़ा दुश्मन कोई दूसरा क्षत्रिय ही हुआ करता है। तो इस अंध आक्रामकता को खत्म करने की ज़रूरत है। बदले दौर के लिहाज़ से क्षत्रिय समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर देना चाहिए। नशे की लत से पूर्ण मुक्ति क्षत्रिय समाज को सबसे बड़ा लक्ष्य बनाना चाहिए जो क्षत्रिय युवाओं के अपराधीकरण और बर्बादी का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। बेटियों को उच्च शिक्षा देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत है जिससे इस अत्याधुनिक युग के साथ वह कदमताल कर सकें!
भड़ास एडिटर यशवंत सिंह ने इस आयोजन के कार्ड को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा-
मिलने जुलने बतियाने सुनने सुनाने सुधरने सुधारने सम्मानित होने सम्मानित करने का मौक़ा जिस भी बहाने मिले, उसे स्वीकार कर लेना चाहिए, इसलिए फिर पहुँच रहा हूँ लखनऊ!
-यशवंत सिंह
आयोजक मंडल के सदस्य डॉ अतुल मोहन सिंह का इस जुटान के बारे में कहना है-
राजधानी लखनऊ में होने वाले पत्रकारों के इस मिलन को ‘ऊर्जस्वी कुलश्रेष्ठ कुटुम्ब मिलन, सहभोज एवं सम्मान समारोह-2025’ नाम दिया गया है। यह गोमतीनगर के विभूतिखंड स्थित दयाल गेटवे कन्वेंशन सेंटर (https://share.google/F9we3UH6J0pa1E4hW) में हो रहा है। पाठकों की सामान्य जानकारी के लिए बता दूं कि यह पहली बार नहीं हो रहा है। हां, इस बार संख्या कुछ अधिक है। इस वजह से इसे कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। ठाकुर विधायकों का मिलन भी पहली बार नहीं हुआ था, हां, यह दीगर बात है कि मीडिया ने संज्ञान पहली बार लिया। वैसे भी क्षत्रियों के रचनात्मक कार्य न्यूज़ आइटम कहां ही बन पाते हैं। अपने पूर्वजों के श्रेष्ठकार्यों को स्मरण करना, उनके नाम पर सम्मान/पुरस्कार आदि शुरू करने की भी पुरानी परम्परा है। दिवंगत पत्रकारों के अवदान को भावी पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस तरह के आयोजन होने ही चाहिए। यह आयोजन व्यक्तिगत न होकर वैचारिक है। ऊर्जस्वी कुलश्रेष्ठ कुटुम्ब नामक व्हाट्सएप समूह की रचना 4 वर्ष पूर्व हुई थी। यह आयोजन उसी समूह के सदस्यों के साझा प्रयास का प्रतिफल है। ऐसा लगभग सभी समाजों में होता आया है। दुर्गुण दूर करने और सद्गुण सीखने के लिए ऐसे अनुष्ठान आवश्यक है। परिवार भाव को कुटुम्ब भाव में बदलना ही होगा। कुटुम्ब प्रबोधन का कार्य तो दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) भी करता ही है। कार्यक्रम में समाज में व्याप्त बुराइयों को त्यागने का संकल्प भी दिलाया जा रहा है। युवा पत्रकारों के द्वारा बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने की स्वस्थ परम्परा पड़ रही है, इसका खुले मन से स्वागत होना चाहिए। आयोजन समिति के सदस्यों को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें।
- डॉ. अतुल मोहन सिंह



जय प्रकाश सिंह
August 22, 2025 at 12:19 am
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