भोपाल | मध्य प्रदेश के भोपाल में पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने के बाद हंगामा खड़ा हो गया है। इस घटना के बाद पत्रकारों ने भी पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मीडियाकर्मियों का आरोप है कि पुलिस ने पत्रकार को फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा है।
बहरहाल, ताजा इनपुट ये है कि पत्रकार साथी कुलदीप सिंगोरिया को मिली जमानत। ग़लत कार्रवाई करने वाले थाना प्रभारी को लाइन अटैच कर दिया गया है।
क्या था आरोप?
आरोप है कि कुलदीप को सोमवार आधी रात को गिरफ्तार किया गया है। जिस गाड़ी के साथ एक्सीडेंट होने की बात कही गई, वह न तो कुलदीप की है और न ही उसमें कुलदीप मौजूद ही थे। और तो और शिकायतकर्ता ने भी कहा कि उसने फेसबुक के आधार पर एफआईआर में कुलदीप का नाम लिखा, बिना किसी जांच के।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पुलिस ने गिरप्तारी के समय कुलदीप का फोन भी छीन लिया। उन्हें परिवार या दोस्तों को सूचना नहीं देने दी गई।
पुलिस की कहानी में झोल है-
- एफआईआर में दावा किया गया कि एक्सीडेंट में कुलदीप सिंगोरिया की गाड़ी शामिल थी, लेकिन यह कार कुलदीप की नहीं थी बल्कि वह एक सफेद बोलेरो में बैठे थे।
- एक्सीडेंट जैसे मामूली केस में गैरजमानती धारा लगाना असामान्य है जो पुलिसिया कार्रवाई को संदिग्ध बनाता है।
- गिरफ्तारी के बाद कुलदीप को परिजनों से नहीं मिलने दिया गया और सीधा जेल भेज दिया गया।
- बिना किसी आधार फोन जब्त करना और शिकायतकर्ता द्वारा पहचान डिनाई करना
कलेक्टर से रहा है विवाद – पत्रकार कुलदीप ने कुछ महीने पहले नर्मदापुरम कलेक्टर सोनिया मीणा पर कई आरोप लगाए थे। यह आरोप खाद के लिए परेशान किसानों पर लाठीचार्ज की खबर चलाई थी। जिसकी खुन्नस निकालने की एवज में पत्रकार कुलदीप को निशाना बनाया गया है।
देखें विरोध प्रदर्शन के वीडियो…
पियूष बबेले-
पत्रकार कुलदीप सिंगोरिया को जिस तरह से आधी रात में गिरफ़्तार किया गया और फिर ज़बरदस्ती जेल में भेज दिया गया, उससे भोपाल के पत्रकार समुदाय में ज़बर्दस्त नाराज़गी है। मुख्यमंत्री ने अपने जन्मदिन के दिन पत्रकारों पर ग़ैरक़ानूनी गिरफ़्तारी की तलवार लटकाकर अच्छा रिटर्न गिफ़्ट दिया है। गिरफ़्तारी के विरोध में पत्रकारों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ।
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