पत्रकार से शिक्षिका बनीं डा. शोभना ने बीएचयू के प्रोफेसर कुमार पंकज के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय के कला संकाय के डीन, पत्रकारिता विभाग के प्रभारी और हिंदी के वरिष्‍ठ अध्‍यापक डॉ. कुमार पंकज के खिलाफ़ शनिवार की दोपहर बनारस के लंका थाने में एक दलित शिक्षिका ने एफआईआर दर्ज करा दी. दलित शिक्षिका का नाम डॉ. शोभना नर्लिकर हैं जो पत्रकारिता विभाग की रीडर हैं. वे 15 साल से यहां पढ़ा रही हैं. डॉ. शोभना पत्रकारिता शिक्षण में आने से पहले पांच वर्ष तक लोकमत समाचार और आइबीएन में बतौर पत्रकार काम कर चुकी हैं.  

प्रोफेसर कुमार पंकज के खिलाफ आइपीसी की धारा 504, 506 और एससी / एसटी (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1) (डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. डॉ. शोभना का आरोप है कि डॉ. कुमार पंकज ने उनके साथ अपशब्‍दों का इस्‍तेमाल किया है, जातिसूचक गालियां दी हैं और जान से मारने की धमकी दी. नर्लिकर के मुताबिक लंका थाना की पुलिस ने एफआइआर दर्ज करने से मना कर दिया था. तीन दिन तक भटकने के बाद डॉ. शोभना ने वाराणसी के एसएसपी को फोन पर व्‍यथा सुनाई जिसके बाद एसएसपी के आदेश से शनिवार की दोपहर मुकदमा दर्ज हुआ.

डॉ. शोभना ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है क्‍योंकि उन्‍हें डर है कि उनके साथ कोई हादसा न हो जाए. डा. शोभना का कहना है कि उनके साथ दलित होने के नाते बहुत लंबे समय से दुर्व्‍यवहार और उत्‍पीड़न चल रहा है. उन्‍होंने बताया कि 23 मई से डॉ. कुमार पंकज लगातार उनकी हाजिरी नहीं लगा रहे थे और रिकॉर्ड में अनुपस्थित दर्शा रहे थे. वे बताती हैं दलित होने के कारण उनका प्रमोशन रोक दिया गया है वरना वे इस वक्‍त पत्रकारिता विभाग की अध्‍यक्ष होतीं. 2011 में ही वे रीडर बन गई थीं और 2014 में उनका प्रमोशन लंबित था जिसे रोक दिया गया. वे आरोप लगाती हैं कि इस सारे उत्‍पीड़न के पीछे मेरी जाति का ही आधार है.

डॉ. शोभना ने बताया कि वे निखिल वागले और राजदीप सरदेसाई के साथ काम कर चुकी हैं. गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं. महाराष्‍ट्र में मीडिया विशेषज्ञ के रूप में लोग जानते हैं. मेरी क्‍या गलती है सिवाय इसके कि मैं दलित जाति से आती हूं.  

(इनपुट : मीडिया विजिल)

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