अमर उजाला के संपादक के खिलाफ बुलंदशहर में एफआईआर दर्ज

बुलंदशहर नगर कोतवाली में अमर उजाला के संपादक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता की तहरीर पर जिला प्रशासन की तरफ से यह एफआईआर दर्ज कराई गई। संपादक के खिलाफ आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर यह एफआईआर दर्ज कराई गई है।

संपादक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होते ही बुलंदशहर के ब्यूरो चीफ आशीष कुमार के पसीने छूट गए है। ब्यूरो चीफ ने डीएम और एसएसपी से काफी अनुरोध किया कि संपादक के खिलाफ एफआईआर दर्ज न हो, लेकिन ब्यूरो चीफ की एक नहीं चली। बताया जा रहा है कि एफआईआर दर्ज होने से अमर उजाला के संपादक डॉ इंदु शेखर पंचोली बुलंदशहर के ब्यूरो चीफ से काफी नाराज हैं। देखें एफआईआर की कापी…

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सच्चे ब्लैकमेलर पत्रकार ऐसे होते हैं… पढ़ लीजिए और पहचान लीजिए…

सोनभद्र में साधना न्यूज के पत्रकार विष्णु गुप्त के खिलाफ ब्लैकमेलिंग और बलात्कार का मुकदमा दर्ज

यूपी के सोनभद्र जिले के दुद्धी से खबर है कि प्राईवेट अस्पताल में कार्यरत एक महिला ने पत्रकार विष्णु गुप्त के खिलाफ स्थानीय थाना में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है. महिला ने अस्पताल में अनियमितता का भय दिखाकर सत्तर हजार रुपये ब्लैकमेल करने और भयाक्रांत कर मर्जी के खिलाफ शारीरिक सम्बन्ध बनाने का आरोप लगाया. पत्रकार विष्णु के खिलाफ स्थानीय थाना में 376, 385, 228, 504, 506 आदि धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है. पत्रकार विष्णु खुद को साधना न्यूज चैनल समेत कई न्यूज चैनलों और अखबारों का संपादक बताता है. वह अश्लील वीडियो क्लिप भी लोगों को दिखा कर महिला को बदनाम कर रहा है.

कथित पत्रकार विष्णु गुप्ता (पुत्र मोती लाल गुप्ता, शक्ति कम्पलेक्स, पुलिस चौकी रेनुकूट, थाना पिपरी, जिला सोनभद्र) पर आरोप है कि वह समाचार संकलन करने के बहाने प्राईवेट अस्पताल पर गया और अनियमितता का विडियो क्लिप बनाकर ब्लैकमेलिंग करने लगा. बाद में वह उसने महिला का शारीरिक शोषण / दुष्कर्म किया. उसने करीब 70,000 रूपये ठग लिया. वह महिला को अपने पति से तलाक लेकर अपने साथ रहने को दबाव बनाने लगा. राजी नहीं होने पर पति को जान से मारने व मरवाने की धमकी देने लगा.

पीड़िता ने अपनी शिकायत स्थानीय थाना पर लिखित रूप से की. लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया. बाद में पुलिस अधिक्षक ने महिला के सम्मान को तार-तार होते देख एक जांच कमेटी बैठाई और उसके आधार पर दिनांक 18/8/17 को थाना कोतवाली दुद्धी सोनभद्र में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया. पीड़िता ने उम्मीद जाहीर की है कि आगे भी उसे न्याय मिलेगा और मीडिया के नाम से तथाकथित कुछेक व्यक्ति जो मीडिया को बदनाम कर रहे हैं, उसे चिन्हित कर अलग-थलग किया जायेगा.

सोनभद्र से पीयूएचआर (मानवाधिकार) अध्यक्ष प्रभूसिंह एडवोकेट की रिपोर्ट.

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पत्रकार से शिक्षिका बनीं डा. शोभना ने बीएचयू के प्रोफेसर कुमार पंकज के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय के कला संकाय के डीन, पत्रकारिता विभाग के प्रभारी और हिंदी के वरिष्‍ठ अध्‍यापक डॉ. कुमार पंकज के खिलाफ़ शनिवार की दोपहर बनारस के लंका थाने में एक दलित शिक्षिका ने एफआईआर दर्ज करा दी. दलित शिक्षिका का नाम डॉ. शोभना नर्लिकर हैं जो पत्रकारिता विभाग की रीडर हैं. वे 15 साल से यहां पढ़ा रही हैं. डॉ. शोभना पत्रकारिता शिक्षण में आने से पहले पांच वर्ष तक लोकमत समाचार और आइबीएन में बतौर पत्रकार काम कर चुकी हैं.  

प्रोफेसर कुमार पंकज के खिलाफ आइपीसी की धारा 504, 506 और एससी / एसटी (नृशंसता निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1) (डी) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. डॉ. शोभना का आरोप है कि डॉ. कुमार पंकज ने उनके साथ अपशब्‍दों का इस्‍तेमाल किया है, जातिसूचक गालियां दी हैं और जान से मारने की धमकी दी. नर्लिकर के मुताबिक लंका थाना की पुलिस ने एफआइआर दर्ज करने से मना कर दिया था. तीन दिन तक भटकने के बाद डॉ. शोभना ने वाराणसी के एसएसपी को फोन पर व्‍यथा सुनाई जिसके बाद एसएसपी के आदेश से शनिवार की दोपहर मुकदमा दर्ज हुआ.

डॉ. शोभना ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है क्‍योंकि उन्‍हें डर है कि उनके साथ कोई हादसा न हो जाए. डा. शोभना का कहना है कि उनके साथ दलित होने के नाते बहुत लंबे समय से दुर्व्‍यवहार और उत्‍पीड़न चल रहा है. उन्‍होंने बताया कि 23 मई से डॉ. कुमार पंकज लगातार उनकी हाजिरी नहीं लगा रहे थे और रिकॉर्ड में अनुपस्थित दर्शा रहे थे. वे बताती हैं दलित होने के कारण उनका प्रमोशन रोक दिया गया है वरना वे इस वक्‍त पत्रकारिता विभाग की अध्‍यक्ष होतीं. 2011 में ही वे रीडर बन गई थीं और 2014 में उनका प्रमोशन लंबित था जिसे रोक दिया गया. वे आरोप लगाती हैं कि इस सारे उत्‍पीड़न के पीछे मेरी जाति का ही आधार है.

डॉ. शोभना ने बताया कि वे निखिल वागले और राजदीप सरदेसाई के साथ काम कर चुकी हैं. गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं. महाराष्‍ट्र में मीडिया विशेषज्ञ के रूप में लोग जानते हैं. मेरी क्‍या गलती है सिवाय इसके कि मैं दलित जाति से आती हूं.  

(इनपुट : मीडिया विजिल)

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‘क्विंट’ की इनवेस्टीगेशन एसोसिएट एडिटर पूनम अग्रवाल के खिलाफ भारतीय सेना ने कर दिया मुकदमा

Mithilesh Priyadarshy : तमाम हथियारों के अलावे सेना के पास एक और हथियार है ‘ओसा’ (ऑफिशियल सिक्रेट एक्ट ). इसका प्रयोग सेना की जासूसी करने वाले लोगों पर किया जाता है. पर इसके अलावे ऐसे लोगों पर भी ‘ओसा’ लगाया जाता है जो सेना के भीतर के सड़ांध को ज़ाहिर करते हैं. पूनम अग्रवाल क्विंट की इनवेस्टीगेशन एसोसिएट एडिटर हैं. इन्होंने सेना में ‘सहायकों’ के दुरुपयोग पर एक स्टोरी की कि कैसे शांति वाले स्टेशनों पर भी आर्मी ऑफिसर के परिवारवाले जवानों से नौकरों वाले काम कराते हैं.

बस अपनी किरकिरी से बौखलायी सेना ने पूनम अग्रवाल के खिलाफ एक जवान को आत्महत्या के लिए उकसाने (दस साल तक की जेल) और ऑफिशियल सिक्रेट एक्ट की धारा 3 (जासूसी) और धारा 7 के तहत मुकदमा लिखवा दिया. ‘क्विंट’ का कहना है, उन्होंने स्टिंग की खबर प्रकाशित प्रसारित करने में पीड़ित की पहचान को उजागर नहीं किया था न ही उसकी नौकरी खतरे में डाली थी…. बावजूद इस पूरे मामले में OSA के दुरुपयोग का मामला साफ है..

जेएनयू के रिसर्च स्कालर मिथिलेश प्रियदर्शी की एफबी वॉल से.

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हाथ पर प्लास्टर चढ़ाए नीरज पटेल पहुंचे उरई कोतवाली (देखें तस्वीरें)

न्यूज़ नेशन चैनल में यूपी इनपुट पर कार्यरत रहे नीरज पटेल हाथ पर पलस्तर चढ़ाए बीते दिनों यूपी के उरई कोतवाली पहुंच गए. वहां उन्होंने कोतवाली उरई के निरीक्षक संजय गुप्ता को बताया कि उनका हाथ प्रिंस कुशवाहा ने तोड़ा है, उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की जाए. नीरज पटेल पूरी तैयारी से आए थे. वे अपने साथ मेडिकल रिपोर्ट वगैरह भी लाए थे. पुलिस ने उनसे पूछा कि जब आपका हाथ तोड़ा गया तब आपने खबर नहीं की. एक रोज बाद मेडिकल कराकर वह यहां पहुंच रहे हैं.

सूत्रों के मुताबिक पुलिस को पूरा मामला संदिग्ध लगा. पुलिस ने डॉक्टर को मौके पर बुलवाने के लिए कहा. बताया जाता है कि इसके बाद नीरज पटेल और उसके साथी अनुज कौशिक वहां से निकल लिए. पुलिस का कहना है कि मामला फर्जी था. नीरज पटेल न्यूज़ नेशन चैनल की धौंस दिखाकर कुछ पत्रकारों पर मुकदमा लिखाने की फिराक में था. बाद में कुछ स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस को न्यूज़ नेशन हेड आफिस का नंबर दे दिया जहां संपर्क करने पर बताया गया कि नीरज पटेल का चैनल से अब कोई संबंध नहीं है.

इस बारे में बातचीत में कोतवाली उरई के निरीक्षक संजय गुप्ता का कहना है कि चैनल से बात की गई तो बताया गया कि न्यूज नेशन में अब नीरज पटेल नहीं हैं. साथ ही हाथ तोड़े जाने की घटना भी संदिग्ध नजर आई. फिलहाल जांच की जा रही है. रिपोर्ट नहीं लिखी गई है.

उधर, नीरज पटेल का कहना है कि उनके बाइक को टक्कर मारी गई जिसके कारण उनका हाथ टूट गया. नीरज के मुताबिक प्लास्टर अभी भी उनके हाथ पर चढ़ा हुआ है और वह हर हाल में आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट लिखाएंगे. न्यूज नेशन चैनल से निकाले जाने के बारे में पूछे जाने पर नीरज पटेल का कहना है कि चैनल ने उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा था लेकिन अभी तक उन्होंने रिजाइन नहीं किया है. उन्होंने ये माना कि वे अब आफिस नहीं जा रहे हैं.

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गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग पर सुधीर चौधरी और उनकी रिपोर्टिंग टीम के खिलाफ मुकदमा

पश्चिम बंगाल के धुलागढ़ में सांप्रदायिक हिंसा की गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से नाराज मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी, रिपोर्टर पूजा मेहता और कैमरामैन तन्मय मुखर्जी के खिलाफ FIR दर्ज करा दिया है. मुकदमा 153(A) जैसी गैर जमानती धाराओं में लिखा गया है. सुधीर चौधरी ने एफबी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है- ”मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मीडिया के दमन की कोशिश कर रही है, वो लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा हैं. आगे से कोई भी मीडिया हाउस दंगों की कवरेज करने से बचेगा. ये पत्रकारिता पर अंकुश लगाने की साजिश है.”

पश्चिम बंगाल के संकराइल थाना क्षेत्र स्थित धुलागढ़ इलाके में दो गुटों के बीच हिंसा हुई. एक धार्मिक जुलूस के रास्ते को लेकर दंगा हुआ था. अगले दिन एक समुदाय के उपद्रवियों ने धुलागढ़ के बनर्जी पाड़ा, दावनघाटा, नाथपाड़ा में दूसरे समुदाय के मकानों और दुकानों में तोड़फोड़ कर आग लगा दिया. हिंसा के दौरान अराजक तत्वों ने जमकर बमबारी की. उपद्रवियों की भीड़ ने दुकानों के साथ-साथ कई घरों में भी लूटपाट की. कई घरों और दुकानों को आग के हवाले भी कर दिया. इससे पूरे इलाके में दहशत है.

एफआईआर पर सुधीर चौधरी की पूरी प्रतिक्रिया इस प्रकार है-

Sudhir Chaudhary : Just to inform all of you Mamta Banerjee Govt has filed an FIR against me and ZeeNews reporter Pooja Mehta and cameraperson Tanmay Mukherjee for covering Dhulagarh Riots on Zee News.The FIR has non bailable sections which is enough to gauge their intentions to arrest me and my colleagues. Pooja Mehta is just 25 and got the taste of Mamta’s intolerance so early in life in the form of a non bailable FIR.This is what a young girl reporter getting to learn from a woman chief minister who claims to be the champion of democracy.It’s another low point in our democracy to see a democratically elected govt using police force to curb media in an effort to suppress uncomfortable facts and reality.When you can’t manage media,use the state machinery to conquer the media only to conceal the failures of your administration. It shows the intolerance of a chief minister who is using the state machinery as her personal fiefdom and acting like a feudal lord. I see the positive side of this blunder as a window for all free minds of this nation to act and show fascist forces their actual place. Or once again Selfish Politics will prevail? That’s my fear. #IntolerantMamta

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फर्जी इंस्टीट्यूट ‘राधा गोविंद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ के खिलाफ एफआईआर का आदेश

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से बड़ी खबर। न्यायलय ने दिया फर्जी इंस्टीट्यूट के खिलाफ एफआईआर का आदेश। एक छात्र पारस ने अपनी शिकायत जिले के पुलिस अधीक्षक से लेकर मुख्यमंत्री तक की लेकिन विडंबना देखिए कि उसकी किसी ने नहीं सुनी। उसकी शिकायत थी कि वह जिस इंस्टीट्यूट में पढ़ रहा था वह फर्जी है। उसके अनुसार उस जैसे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य बर्बाद किया जा रहा है। वह कहता रहा लेकिन सुनने वाला कौन था। आखिरकार उसने एक आरटीआई लगाई और फिर सच प्रामाणिक और लिखित तौर पर सामने आया। इसके बाद न्यायालय की शरण ली और जहां से इंस्टीट्यूट के खिलाफ मामला दर्ज करा सका।

मामला है राधा गोविंद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का जिस पर फर्जी इंस्टीट्यूट होने का आरोप है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चंदौसी मुरादाबाद ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला संज्ञेय अपराध है और स्वीकार करने के योग्य है। न्यायालय ने थाना बनियाठेर को आदेशित करते हुए कहा किप्रार्थना पत्र अंतर्गत धारा 156 3 में वर्णित तथ्यों के आधार पर सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर नियमानुसार विवेचना कराया जाना सुनिश्चित किया जाए। उक्त मामले के आरोपी हैं पवन कुमार शर्मा चेयरमैन मनोज तोमर, मैनेजिंग डायरेक्टर और आशीष कुमार डायरेक्टर। अब यह बात उठना लाजमी है कि एक इंस्टीट्यूट खुलेआम फर्जी रूप से चलता रहा और सारे जिम्मेदार मौन रहे। आखिर पारस की शिकायत क्यों नहीं सुनी गई और खुले आम फर्जी इंस्टीट्यूट कैसे चलता रहा?

वैसे भी तथ्यों के आधार पर यह गंभीर सवाल उठना लाजमी है। यह खुद को हापुड़ दिल्ली रोड पर स्थित मोनाड विश्वविद्यालय से संबद्ध घोषित कर रहा था लेकिन मोनाड विश्वविद्यालय ने लिखित में कहा कि उक्त परिसर के अतिरिक्त उसके कोई सम्बन्धित परिसर हैं ही नहीं। अगर आरोप सही है तो फिर राधा गोविन्द इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी निकट अकरोली चौराहा चंदौसी जिला सम्भल जैसे इंस्टrट्यूट, स्कूल, या फिर विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में खुलेतौर पर हजारों छात्रों का भविष्य बर्बाद करते रहे और हमारी सरकार शिक्षा क्षेत्र में ‘पूरे होते वादे’ के विज्ञापनों से जनता को अपना बेसुरा राग सुनाती रही। क्या ऐसा ही संवरेगा हमारा आज? क्या ऐसे अपराध पूर्ण समाज से बनेगा हमारा कल? क्या यहीं है वह पूरे होते वादे? क्या यहीं है हमारा उत्तम प्रदेश उत्तर प्रदेश?

रामजी मिश्र ‘मित्र’ की रिपोर्ट.

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रीता बहुगुणा को परेशान करने के लिए फेसबुक पर कट्टरपंथी हिंदूदवादी ग्रुप ने किया कारनामा, मुकदमा दर्ज

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता व विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने फेसबुक और कुछ अन्य सोशल मीडिया पर अपने खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री डाले जाने के आरोप में शुक्रवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। रीता ने यहां संवाददाताओं को बताया कि कुछ शरारती और कट्टरपंथी तत्वों ने एक सुनियोजित साजिश के तहत उनकी फोटो सहित झूठा बयान फेसबुक और कुछ अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों पर पोस्ट किया गया है। इसमें अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए उनका निजी मोबाइल नंबर डाला गया है और लोगों से अपील की गई है कि वे इस पोस्ट को शेयर करें और रीता जोशी को फोन करके परेशान करें।

रीता ने बताया कि इसके खिलाफ उन्होंने हजरतगंज कोतवाली के साइबर अपराध प्रकोष्ठ में मुकदमा दर्ज कराया है। रीता ने कहा कि जो बयान उनके नाम से पोस्ट किया गया है, वह पूर्णतया भ्रामक और झूठा है। यह उनकी छवि बिगाड़ने और हिंदू विरोधी करार देते हुए लोगों को उनके विरुद्ध उकसाने का भाजपा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का घिनौना प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली, बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश के विभिन्न चुनावों में मात खाने के बाद भगवा दल अपने प्रतिद्वंद्वियों को निशाना बना रहा है और वह उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहता है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राज्यसभा सदस्य पीएल पूनिया ने रीता के आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि झूठे प्रचार के जरिए कांग्रेस की प्रवक्ता के साथ-साथ पार्टी की छवि बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

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वाट्सएप पर मुस्लिमों के बारे में घटिया टिप्पणी करने वाले कथित पत्रकार के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक कथित पत्रकार पर आई टी एक्ट के तहत मामला दर्ज़ हुआ है. कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ थाणे में राजेश मंगतानि नाम के व्यवसायी पर मुस्लिम समुदाय पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में आई टी एक्ट की धारा 66क लगी है। घटना के संबंध में मनेन्द्रगढ़ के शिकायतकर्ता ने बताया की राजेश मंगतानि ख़ुद को “सहारा समय mp cg का पत्रकार बताता है।

वर्तमान में मनेन्द्रगढ़ शहर में कपड़े की दुकान भी चला रहा है। इसने 25 तारीख़ को वाट्सएप पर एक “कटुआ” नाम से ग्रुप बनाया और कुछ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी ग्रुप में जोड़ दिया। कुछ लोग इस व्यक्ति को ‘समय’ के पत्रकार के तौर पर जानते हैं पर पत्रकार द्वारा ऐसी छिछोरी हरक़त पर समुदाय के लोगों को शक हुआ और शिकायतकर्ता राजेश मंगतानि के ख़िलाफ़ सामने आए। इस तरह मंगतानि द्वारा ग्रुप में समुदाय विशेष के बारे में टिप्पणी भी की जा रही थी जिसकी लिखित शिक़ायत पर मनेन्द्रगढ़ थाने में लोगों ने मामला दर्ज़ कराया है।

इस प्रकरण से संबंधित दस्तावेज और तस्वीर आदि देखने के लिए नीचे क्लिक करें>

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मुलायम को फेसबुक पर बुड्ढा लिख दिया तो कानपुर में दर्ज हो गई एफआईआर!

इमरोज़ खान युवा पत्रकार हैं. जनता की आवाज़ नामक ऑनलाइन पोर्टल चलाते हैं. उन्होंने फेसबुक पर अपने पोर्टल की एक स्टोरी शेयर करते हुए मुलायम की फोटो के साथ लिख दिया कि ”बुड्ढे का पागलपन बढ़ता हुआ”. बस, इसी पर उनके खिलाफ कानपुर में एफआईआर दर्ज हो चुकी है. इस बारे में इमरोज ने भड़ास को एक मेल भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी है, जिसे नीचे प्रकाशित किया जा रहा है.

ये यूपी है, यहां बुड्ढा कहने पर हो जाती है एफआईआर

सपा सरकार द्वारा जिस तरह मेरे ऊपर कार्यवाही की गयी है, ये बताता है कि यू.पी. में कानून का नहीं, जंगलराज है. 17 सितम्बर को मैंने अपने पोर्टल “जनता की आवाज़ jantakiawaz.in की एक खबर को फेसबुक पे बुड्ढा का पागलपन बताते हुए कमेंट के साथ क्या शेयर किया कि सपा कार्यकर्ताओं ने इनबॉक्स से लेकर फ़ोन तक पर धमकाना शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, फेसबुक पर सपा कार्यकर्ताओं ने स्टेटस अपडेट करके खुलेआम धमकियां दी. साथ में तरह तरह के आरोप भी लगाये गये. प्रतिक्रिया स्वरुप मैंने भी सपा के कार्यकर्त्ता राव विकास यादव को ज़वाब देते हुए उनके कारनामो का पर्दाफाश किया.

२१ सितम्बर को सपा के कुछ मित्रों के कमेंट डीलिट करने के निवेदन को स्वीकार करते हुए “बुड्ढे का पागलपन बड़ता हुआ” कमेंट भी डिलीट कर दिया. मगर जब मैं ईद की तैयारी कर रहा था तो उसके एक दिन पहले यानि २४ सितम्बर को मेरी उसी पोस्ट को, जो डिलीट हो चुकी थी, को आधार बना के कानपुर के एसएसपी से मिलकर सपा कार्यकर्त्ता राव विकास यादव ने मेरे खिलाफ शिकायत कर दी. कानपुर के एसएसपी ने बिना विलम्ब किये गोविंदनगर थाने के सीओ को जाँच के आदेश दे दिए. हैरानी की बात है कि पुलिस ने अभी तक मुझसे संपर्क नहीं किया है. जो भी जानकारी मिली  है वो समाचार पत्रों में प्रसारित खबरों द्वारा मिली है. खबर पढ़कर ही आभास होता है कि खबर छपी नहीं है बल्कि छपवायी जा रही है. प्रदेश की जनता को आगाह किया जा रहा है. संदेश दिया जा रहा है कि अगर हमारे खिलाफ लिखा जायेगा तो मुक़दमा. सरकार का विरोध करने वालों का कोई भी नहीं सुनेगा. भले ही पत्रकार क्यूँ न हो. सरकार ने कथित मुख्यधारा की मीडिया को ऐसा मैनेज कर रखा है कि वो जो चाहेगी, वही लिखा जायेगा.

मैं याद दिला देना चाहता हूं कि ये वही सपा कार्यकर्त्ता हैं जिनकी हर पोस्ट और कमेंट में देश के पीएम और दूसरे नेताओं को गाली दी जाती है मगर इन बहरूपियों का दूसरा चेहरा भी है. ये अपने नेता के लिए संकेतों में लिखे गए किसी कमेंट पर इतना उत्तेजित हो जाते हैं कि मरने और मारने तक पहुंच जाते हैं. वही यू.पी. की पुलिस किसी गंभीर मामले पर कार्यवाही करने में अपने को असमर्थ पाती है लेकिन सत्ताधारी पार्टी के नेता के लिए सांकेतिक शब्दों से लिखे गए किसी कमेंट से झुझला के तुरंत जाँच करने बैठ जाती है.

अखिलेश सरकार ये तुम्हारा कैसा निजाम है.
जितना उत्पीड़न करना है कर लो.
२०१७ में अब ज्यादा समय नहीं है.

इमरोज़ खान
संपादक
जनता की आवाज़
ऑनलाइन पोर्टल
jantakiawaz.in
कानपुर
contact.jantakiawaz@gmail.com

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Samruddha Jeevan Fraud : महेश किशन मोटेवार समेत तीन डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

लाइव इंडिया न्यूज चैनल संचालित करने वाली चिटफंड कंपनी समृद्धि जीवन के डायरेक्टरों महेश किशन मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे की संपत्ति कुर्क करने के आदेश ग्वालियर की एक अदालत ने दिए हैं. इन तीनों डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश रोकने को लेकर दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है. तीनों के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं.

शासकीय अधिवक्ता जगदीश प्रसाद शर्मा ने बताया कि समृद्धि जीवन चिटफंड कंपनी के डायरेक्टरों महेश मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे के खिलाफ थाटीपुर थाने में जनता के साथ धोखाधड़ी किए जाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 3/4 के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया है. लोगों को उनका धन कम समय में दुगना करने का लालच देकर पैसे वसूलने वाली इस कंपनी के तीनों डायरेक्टर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार हैं. इन पर न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए धारा 82/83 की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है.

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होशंगाबाद भास्कर के जीएम सुरेंद्र राय के खिलाफ लड़कीबाजी के चक्कर में हुई एफआईआर

अपने रंगीनमिजाज अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले होशंगाबाद दैनिक भास्कर के जीएम सुरेंद्र राय पर भोपाल में एफआईआर दर्ज हुई है। जीएम ने दैनिक भास्कर में कार्यरत एक पूर्व महिला कर्मचारी के इश्क में पड़कर उसके मंगेतर को जान से मारने की धमकी दे डाली। भोपाल के कमला नगर थाने में हुई रिपोर्ट के अनुसार जीएम ने मंगेतर को महिला कर्मचारी से शादी करने पर जान से मारने व अन्य प्रकार की धमकियों के लिए कई बार फोन किया था।

जानकारी के अनुसार जीएम के साथ भास्कर के ही दो लोगों ने भी फोन लगाकर धमकी दी थी। महिला उत्पीड़न रोकने के लिए भास्कर संबंधितों पर तत्काल एक्शन लेने की बात करता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में भास्कर संस्थान जीएम जैसे बड़े अधिकारी पर कार्यवाई करेगा।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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सहारा छोड़ने के बाद एलएन शीतल ने नव भारत (मध्य प्रदेश) ज्वाइन किया

LN Shital : प्रिय मित्रों, मैं अब सहारा इण्डिया परिवार में नहीं हूँ . मैंने आज 7 सितम्बर से नव भारत (मध्य प्रदेश) पत्र-समूह में सीनिअर ग्रुप एडिटर एवं इस समाचार पत्र समूह की प्रकाशक कम्पनी- ‘Engage Media Pvt. Ltd.’ के Director के रूप में ज्वाइन कर लिया है. मेरी अपने सर्वस्व तथा परम ईष्ट देव हनुमान जी से दण्डवत प्रार्थना है कि वे अपनी कृपा बनाये रखें. आप सबसे अपना स्नेह और शुभ कामनाएं बनाये रखने की गुज़ारिश है. (LN Shital के फेसबुक वॉल से.)

ज्ञात हो कि एलएन शीतल इससे पहले राष्ट्रीय सहारा, देहरादून में स्थानीय संपादक और फिर बाद में यहीं पर यूनिट हेड हुआ करते थे. इससे पहले वह कई अखबारों में संपादक पद पर रह चुके हैं.

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‘समाचार प्लस’ के पत्रकार पर छेड़खानी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज

उत्तर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में समाचार प्लस नामक चैनल द्वारा जिला संवाददाता उन्हीं को बनाया गया है, जो केबिल ऑपरेटर थे। इसी के चलते ललितपुर जिले में भी केबिल ऑपरेटर शैलेन्द्र जैन को समाचार प्लस का जिला संवाददाता बनाया गया था। लेकिन शैलेन्द्र जैन साहब खबरों के अलावा अन्य सभी कार्यों के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं कार्यो के चलते कल इनके खिलाफ ललितपुर कोतवाली में एक लड़की के साथ छेड़खानी और लड़की के साथ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है।

 

लड़की की शिकायत के अनुसार वह एक लेडीज कपड़ों की दुकान पर कार्य करती है। वहां से रोजाना आते जाते समय शैलेन्द्र जैन का भतीजा मोहित जैन उसके साथ छींटाकशी और छेड़खानी किया करता था। इसका विरोध उसके द्वारा कई बार किया गया, लेकिन दबंग पिता मनोज जैन और पत्रकार चाचा शैलेन्द्र जैन की शह के चलते मोहित जैन उर्फ़ मनु जैन के हौसले बढ़ते गये। एक दिन जब लड़की अपनी दुकान से घर जा रही थी तो उसके द्वारा उसका वीडियो बनाया गया और व्हाट्सऐप पर डालकर वायरल कर दिया। साथ ही विरोध करने पर और अधिक बदनाम करने की धमकी दी।

जब लड़की ने इस पर आरोपी मोहित जैन को उलाहना दी तो उसने लड़की के साथ मारपीट शुरू कर दी। यही नहीं, अपने पिता और चाचा को बुलाकर उनके साथ मिलकर भी मारपीट की। समाचार प्लस के पत्रकार शैलेन्द्र जैन ने अपनी पत्रकारिता का रौब दिखाते हुये पूरे शहर में बदनाम करने और शादी नहीं होने देने की धमकी तक दे डाली। इसकी शिकायत लड़की ने हिम्मत कर ललितपुर पुलिस अधीक्षक से की। शिकायत पर ललितपुर पुलिस अधीक्षक ने समाचार प्लस के जिला संवाददाता शैलेन्द्र जैन, आरोपी मोहित जैन उर्फ़ मनु जैन और मनोज जैन के खिलाफ धारा 294, 323, 504 67 आईटी ऐक्ट में मुकदद्मा दर्ज कर लिया है।  फिलहाल अब महाशय अपने रसूख और दबंगई के दम पर पीड़ित लड़की से राजीनामा करने का प्रयास कर रहे हैं।

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मंत्री प्रजापति के खिलाफ एफआईआर के लिए डीजीपी दफ्तर के सामने प्रदर्शन

आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने आज मंत्री गायत्री प्रजापति द्वारा महिला आयोग अध्यक्षा जरीना उस्मानी, सदस्य अशोक पाण्डेय और कुछ पुलिसवालों के साथ कूटरचना कर और फर्जी महिला खड़ी कर उन दोनों को बलात्कार और मारपीट जैसी गंभीर मामलों में फंसाए जाने के सम्बन्ध में एफआईआर नहीं दर्ज करने के सम्बन्ध में डीजीपी कार्यालय के सामने अपना विरोध प्रदर्शन किया.  

लखनऊ में डीजीपी दफ्तर के सामने विरोध प्रकट करते आईपीएस अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यर्ता डॉ.नूतन ठाकुर

उन्होंने कहा कि प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त के समक्ष परिवाद दायर करने के बाद उन्हें पहले फोन पर धमकी मिली और बाद में दो अलग-अलग महिलाओं के नाम से महिला आयोग के माध्यम से बलात्कार के फर्जी आरोप लगाए गए, जिनमें एटा की महिला का पता गलत निकला जबकि गाजियाबाद की महिला के अलग-अलग अभिलेखों पर अलग-अलग हस्ताक्षर हैं. उन्होंने कहा कि कॉल डिटेल साबित करते हैं कि गाजियाबाद की महिला, गोमतीनगर पुलिस और अशोक पाण्डेय लगातार संपर्क में थे.

उन्होंने कहा कि एक धर्मेन्द्र प्रसाद द्वारा प्रजापति के सीधे षडयंत्र पर उन पर झूठी गवाही देने के लिए पैसे के प्रलोभन का झूठा आरोप लगाया गया. अमिताभ और नूतन के अनुसार 10 जून को थानाध्यक्ष गोमतीनगर, 11 जून को डीआईजी लखनऊ और 15 जून को स्वयं डीजीपी ए के जैन से मिलकर प्रार्थनापत्र देने पर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई और उन्होंने कोर्ट जाने के पूर्व डीजीपी कार्यालय के सामने बैठ कर अपना विरोध जताया.

समाचार अंग्रेजी में पढ़ें – 

IPS officer Amitabh Thakur  and social activist Dr Nutan Thakur today sat at DGP office against the non-registration of FIR on their application against minister Gayatri Prasad Prajapati for trying to frame them in false cases of rape and other charges, , with assistance of with UP State Women Commission Chairperson Jarina Usmani, member Ashok Pandey and some policemen.  

They said that Dr Thakur’s complaint against the minister before the Lokayukta, they first got a threat to stay away from this case and were later implicated in two completely false complaints of rape by unknown women presented before the Women Commission, of which the address of Eta woman was found false while that of Ghaziabad has different signatures in different documents. They said the call details establish that the Ghaziabad woman and some policemen from Gomtinagar were in constant touch with Ashok Pande.

They said another false case was filed against them at behest of Sri Prajapati by one Dharmendra Kumar for allegedly beating him.

As per Amitabh and Nutan, an application for FIR was given to SO Gomtinagar on 10 June, to DIG Lucknow on 11 June and to DGP A K Jain on 15 June but it was not registered forcing them to sit before DGP office.

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर से संपर्क : 94155-34525

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आदिवासी महिला ने शोषण के खिलाफ ‘खबर मंत्र’ पर किया केस

Aloka Ranchi : आदिवासी महिला के शोषण पर एसटी-एसी थाना में खबर मंत्र पर केस हुआ.. अखबार खबर मंत्र का प्रबंधन यहां कार्यरत लोगो से काम तो लेते हैं पूरे महीने लेकिन जब मानदेय मांगने कोई जाता है तो उसे कोल कुकूर जैसे जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करके गाली देते हैं… इसी के बाद महिला आदिवासी कर्मचारियों ने अखबार खबर मंत्र के खिलाफ एसटी एसी थाना में केस ठोक दिया..

 

रांची की वरिष्ठ महिला पत्रकार अलोका के फेसबुक वॉल से.

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पीएफ, ईएसआई और मजीठिया मांगा तो पत्रकार पर कई धाराओं में कर दिया मुकदमा

Aloka Ranchi : सथियों इस देश में अपना हक मांगना सबसे बड़ा अपराध बनता जा रहा है. अगर आप किसी अखबार में काम कर रहे हैं तो श्रम कानून का हो रहे उल्लंघन के खिलाफ खड़े होंगे तो अखबार प्रबंधक आपको अपने पैसे और प्रभाव के बल पर कई आपराधिक मामलों में (जहां आप सोच भी नहीं सकते हैं) वहां फसा सकता है। यह घटना रांची से प्रकाशित दैनिक अखबार खबर मंत्र की है।

 

इस अखबार के एक संवाददाता ने अपने पीएफ, ईएसआई और मजीठिया वेतनमान की मांग प्रबंधन से किया और उसे नोटिस भेजा था। तब प्रबंधन ने उस पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 504, 506, 427 के तहत केस कर दिया गया है। अखबार के इस काले करनामे पर रांची के पत्रकारों की कलम की स्याही सूखती नजर आ रही है।

रांची की वरिष्ठ महिला पत्रकार अलोका के फेसबुक वॉल से.

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दिल्ली के अंग्रेजी अखबार में काम करने वाली महिला पत्रकार ने रेप का आरोप लगाया

दिल्ली के एक अंग्रेजी अखबार में काम करने वाली 34 वर्षीय महिला पत्रकार ने अपने दोस्त पर ही रेप करने का आरोप लगाया है. पुलिस इस समय 38 वर्षीय आरोपी को तलाश रही है जो बीती रात वसंत कुंज पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज किए जाने के बाद से फरार है. पुलिस के अनुसार, तलाकशुदा और एक आठ साल की बच्ची की मां महिला पत्रकार ने अपनी शिकायत में बताया है कि वह करीब छह साल पहले एक क्लब में आरोपी से मिली थी जिसके बाद वे दोस्त बन गए थे.

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘महिला और आरोपी पूर्व में कुछ समय साथ भी रहे थे. यह महिला पत्रकार जयपुर की रहने वाली है लेकिन दिल्ली में बस गयी है और एक अंग्रेजी दैनिक के लिए बतौर पत्रकार काम करती है.’ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए टीमें गठित की हैं.

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गायत्री प्रजापति धमकी के एफआईआर में लखनऊ पुलिस ने किया खेल

मुझे और मेरे पति पति आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर को एक कथित टीवी पत्रकार द्वारा दी गयी धमकी में दी गयी शिकायत पर गोमतीनगर थाने में पूरी तरह गलत तरीके से एफआईआर दर्ज की गयी है. मेरे प्रार्थनापत्र के अनुसार मामला 506 आईपीसी तथा 66ए आईटी एक्ट 2000 का संज्ञेय अपराध बनता है लेकिन थानाध्यक्ष ने इसे सिर्फ धारा 507 आईपीसी के असंज्ञेय अपराध में दर्ज किया. आम तौर पर धमकी देने पर 506 आईपीसी का अपराध होता है जबकि 507 आईपीसी तब होता है जब कोई आदमी अपना नाम और पहचान छिपाने की सावधानी रख कर धमकी देता है.

एक निश्चित मोबाइल नंबर से दी गयी धमकी कभी भी अनाम नहीं मानी जा सकती क्योंकि इसे आसानी से ट्रेस किया जा सकता है. संज्ञेय अपराध में पुलिस स्वयं विवेचना और गिरफ़्तारी करती है जबकि असंज्ञेय अपराध में मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही विवेचना या गिरफ़्तारी होती है. अतः मैंने पुलिस द्वारा जानबूझ कर मामले को ठन्डे बस्ते में डालने का आरोप लगाते एसएसपी लखनऊ को मुकदमे को सही धाराओं में दर्ज कर उसकी विवेचना कराने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है ताकि प्रदेश के एक मंत्री से जुड़े इस मामले में सच्चाई सामने आ सके.

डॉ नूतन ठाकुर
# 094155-34525

सेवा में,
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक,
लखनऊ
विषय- एनसीआर संख्या 0001/2015 धारा 507 आईपीसी विषयक
महोदय,

निवेदन है कि मैंने अपने पत्र संख्या-NT/Complaint/40 दिनांक- 04/01/2015 के माध्यम से थानाध्यक्ष, थाना गोमतीनगर को दिनांक 03/01/2014 को मेरे पति आईपीएस अफसर श्री अमिताभ ठाकुर तथा मेरे मोबाइल पर फोन नंबर 093890-25750 द्वारा अपने आप को किसी टीवी चैनेल का पत्रकार कोई श्री मिश्रा बताते हुए मुझे श्री गायत्री प्रजापति मामले से अलग हो जाने की धमकी के सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज करने को एक प्रार्थनापत्र दिया था.

कल दिनांक 05/01/2015 को समय लगभग 21.10 बजे रात्रि थाने जाने पर मुझे इस एफआईआर की प्रति प्राप्त हुई. अभिलेखों के अनुसार यह एफआईआर दिनांक 04/01/2015 को समय 21.45 धारा 155 सीआरपीपीसी के प्रावधानों के अंतर्गत मु०अ०स० 0001/2015 धारा 507 आईपीसी में दर्ज हुआ. (एफआईआर की प्रति संलग्न) निवेदन करुँगी कि धारा 507 आईपीसी एक असंज्ञेय अपराध है जिसमे पुलिस धारा 155(2) सीआरपीपीसी के प्रावधानों के अनुसार बिना सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश के विवेचना नहीं कर सकती और धारा 2(घ) सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुसार बिना वारंट के गिरफ्तार नहीं कर सकती.

उपरोक्त से स्पष्ट है कि मेरी शिकायत पर जो अभियोग पंजीकृत हुआ है उसकी विवेचना अब तभी होगी जब मैं अथवा पुलिसवाले इसके लिए मा० न्यायालय से अनुमति लें. यह भी लगभग स्पष्ट है कि पुलिसवाले इसके लिए अनुमति लेने से रहे, ऐसे में यह मुझसे ही अपेक्षित हुआ कि मैं मा० न्यायालय जाऊं और अनुमति प्राप्त करूँ.  इसके विपरीत सत्यता यह है कि मेरे द्वारा प्रस्तुत प्रार्थनापत्र असंज्ञेय अपराध धारा 507 आईपीसी की श्रेणी में आता ही नहीं है बल्कि यह धारा 506 आईपीसी के अधीन आता है. मैं इसके लिए इन दोनों धारा को आपके सम्मुख प्रस्तुत कर रही हूँ.

धारा 507- Criminal intimidation by an anonymous communication.—Whoev­er commits the offence of criminal intimidation by an anonymous communication, or having taken precaution to conceal the name or abode of the person from whom the threat comes, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to two years, in addition to the punishment provided for the offence by the last preceding section.

धारा 506- Punishment for criminal intimidation.—Whoever commits, the offence of criminal intimidation shall be punished with imprison­ment of either description for a term which may extend to two years, or with fine, or with both; If threat be to cause death or grievous hurt, etc.—And if the threat be to cause death or grievous hurt, or to cause the destruction of any property by fire, or to cause an offence punishable with death or 1[imprisonment for life], or with imprisonment for a term which may extend to seven years, or to impute, unchastity to a woman, shall be punished with imprison­ment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि धारा 507 आईपीसी अनाम संसूचना अथवा धमकी देने वाले व्यक्ति द्वारा अपना नाम या निवास छिपाने की पूर्व सावधानी बरतने पर लगाया जाता है. इसका अर्थ हुआ कि यह धारा तब लगेगी जब आपराधिक अभित्रास करने वाला व्यक्ति अपना नाम, पता, अपनी पहचान छिपाने का उपक्रम करे. जिस मामले में व्यक्ति ने एक ज्ञात फोन नंबर (जिसे शिकायत में लिखा गया है) से फोन किया वह किसी भी स्थिति में अनाम या पहचान छिपाने का मामला नहीं हो सकता क्योंकि यह बात सर्वविदित है कि आज के टेक्नोलॉजी युग में तत्काल ही किसी भी नंबर से उसके धारक, धारक के सिम नंबर, आईएमई नंबर, उसके पता आदि की तत्काल जानकारी हो जाती है और यह बात आज के समय हर कोई जानता है. ऐसे में ज्ञात फोन नंबर से किये गए फोन को अनाम व्यक्ति अथवा पता, नाम छिपाने के साथ किया गया अपराध किसी भी सूरत में नहीं माना जा सकता. यह बात इतना सर्वज्ञात है कि यह किसी भी स्थिति में नहीं माना जा सकता कि थानाध्यक्ष गोमतीनगर को यह नहीं मालूम है. अतः प्रथमद्रष्टया ही लगाई गयी धारा पूरी तरह गलत है जो बात कोई भी समझ सकता है. इतना ही नहीं, तहरीर के अनुसार उस व्यक्ति ने अपना एक नाम भी बताया था जो मिश्रा जी लिखा हुआ है. साथ ही उसमे यह भी लिखा है कि उस व्यक्ति ने खुद को टीवी पत्रकार बताया. जब एक व्यक्ति अपना मोबाइल नंबर दे रहा है, अपना नाम बता रहा है, अपनी आइडेंटिटी बता रहा है तो वह धारा 507 आईपीसी में कैसे हुआ? जाहिर है कि थानाध्यक्ष द्वारा यह धारा गलत लगाई गयी है और मेरा यह खुला आरोप है कि उनके द्वारा यह जानबूझ कर आरोपी को बचाने के लिए किया गया है.

ऐसा इसीलिए क्योंकि दोनों धारा में दंड सामान है- 2 वर्ष, पर इन दोनों में एक बहुत बड़ा अंतर है. वह यह कि धारा 507 आईपीसी असंज्ञेय अपराध है और दिनांक 02/08/1989 को उत्तर प्रदेश गज़ट में प्रकाशित शासनादेश संख्या 777/VIII-9-4(2-(87) दिनांक 31/07/1989 के अनुसार धारा 506 आईपीसी उत्तर प्रदेश में संज्ञेय अपराध घोषित किया जा चुका है. थानाध्यक्ष को ज्ञात है कि इस धारा में विवेचना नहीं होगी और कोई पूछताछ नहीं होने के कारण यह मामला यहीं रुक जाएगा और ठप्प हो जाएगा. मैं यह आरोप इसीलिए भी लगा रही हूँ कि मेरी जानकारी के अनुसार यह धारा शायद ही किसी मामले में लगाई जाती हो पर यहाँ यह मात्र मामले को असंज्ञेय बनाए के लिए लगाई गयी. मैं यह बात इस आधार पर भी कह रही हूँ कि कल रात जब मैंने थानाध्यक्ष से फोन पर पूछा था कि दिए गए नंबर पर कॉल कर देखा गया है कि किसका फोन है तो उन्होंने बहुत रूखेपन से कहा था कि यह उनका काम नहीं है.

स्पष्ट है कि एफआईआर में मोबाइल नंबर, एक नाम और एक आइडेंटिटी होने के बाद भी बिना उस पर फोन किये, बिना उसकी कोई जानकारी लिए, बिना कोई प्रयास किये  अपने स्तर से ही उसे अनाम या अपनी पहचान छिपाने के लिए किया गया अपराध बताना सीधे-सीधे दोषियों को बचाना और यह जानते हुए कि असंज्ञेय अपराध की विवेचना नहीं होती मामले को जस का तस दफ़न करने का प्रयास है.

निवेदन करुँगी कि यह मामला मात्र धारा 506 आईपीसी का अपराध ही नहीं है बल्कि धारा 66ए, इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 का भी अपराध है. मैं यह धारा आपके सम्मुख रखना चाहूंगी “Punishment for sending offensive messages through communication service, etc- Any person who sends, by means of a computer resource or a communication device,—(a) any information that is grossly offensive or has menacing character; or (b) any information which he knows to be false, but for the purpose of causing annoyance, inconvenience, danger, obstruction, insult, injury, criminal intimidation, enmity, hatred or ill will, persistently by making use of such computer resource or a communication device,(c) any electronic mail or electronic mail message for the purpose of causing annoyance or inconvenience or to deceive or to mislead the addressee or recipient about the origin of such messages,shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to three years and with fine. Explanation.— For the purpose of this section, terms “electronic mail” and “electronic mail message” means a message or information created or transmitted or received on a computer, computer system, computer resource or communication device including attachments in text, images, audio, video and any other electronic record, which may be transmitted with the message”
आईटी एक्ट की धारा 2 (1) (ha) के अनुसार “Communication Device” means Cell Phones, Personal Digital Assistance or combination of both or any other device used to communicate, send or transmit any text, video, audio, or image.

उपरोक्त तथ्यों से यह पूर्णतया स्पष्ट है कि मोबाइल फ़ोन के मामले में criminal intimidation (आपराधिक अभित्रास) धारा 66ए, इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000 के तहत अपराध है, जो पुनः संज्ञेय अपराध है. लेकिन थानाध्यक्ष ने इस धारा को भी इस मामले में नहीं लगाया है जो इनकी जानबूझ कर की गयी गलती प्रतीत होती है.

उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत न्याय के हित में आपसे निवेदन है कि आप तत्काल मामले को सही धाराओं धारा 506 आईपीसी तथा धारा 66ए, आईटी एक्ट  2000 में तरमीम कराते हुए इस मामले की निष्पक्ष विवेचना कराने की कृपा करें. निवेदन करुँगी कि यह प्रकरण प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से श्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के नाम से जुड़ा है जो वर्तमान में प्रदेश सरकार में मंत्री हैं और यह मामला मेरे और मेरे पति की सुरक्षा के भी जुड़ा है अतः इस पर यथेष्ट गंभीरता से ध्यान देने की कृपा करें ताकि यह सन्देश न जाए कि विवेचना से बचने का कोई प्रयास हो रहा है और जानबूझ कर मामले को दबाया जा रहा है.

पत्र संख्या-NT/Complaint/40                               
दिनांक- 06/01/2015
भवदीया,                                                     
(डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525
nutanthakurlko@gmail.com

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अखिलेश यादव हैकर! : ‘पीके’ फिल्म डाउनलोड कर देखने पर थाने में दी गई तहरीर

यूपी के सीएम अखिलेश यादव ही जब खुद कानून तोड़ने लगे तो प्रदेश में भला कानून का राज कैसे कायम हो सकता है. यही कारण है कि यूपी में जंलराज की स्थितियां सदा बनी रहती हैं. गरीब-गुरबों का बुरा हाल रहता है. ताजी सूचना अखिलेश यादव से जुड़ी है. उन्होंने फिल्म पीके सिनेमा हॉल में जाकर देखने की बजाय इसे अवैध तरीके से इंटरनेट से डाउनलोड कर देखा. फिल्म ‘पीके’ को इंटरनेट से डाउनलोड करके देखने का मामला ‘पायरेसी’ का होता है. इसको लेकर लखनऊ के सोशल और आरटीआई एक्टिविस्ट संजय शर्मा ने विभिन्न जगहों पर शिकायत की है और अखिलेश यादव के खिलाफ एफआईआर लिखाने के लिए लखनऊ के थाना हजरतगंज में तहरीर दी है.

संजय शर्मा ने पायरेसी के इस प्रकरण को देखते हुए विधि अनुसार कार्यवाही करने हेतु शिकायत भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्री अरुण जेटली को प्रेषित किया. फिल्म ‘पीके’ को इंटरनेट से डाउनलोड करके देखने के मामले में यूपी के सीएम अखिलेश यादव व अन्य के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधिक कार्यवाही करने हेतु तहरीर थाना हज़रतगंज को भी प्रेषित किया. पुलिस विभाग ने तहरीर शिकायत प्रकोष्ठ के डीआईजी को अग्रेषित कर दी है. अरुण जेटली को प्रेषित शिकायत और थाना हज़रतगंज को प्रेषित तहरीर और पुलिस विभाग द्वारा शिकायत प्रकोष्ठ के डीआईजी को अग्रेषित की गयी मेल नीचे देख सकते हैं…

To,

Arun Jaitley (Minister – Ministry of Information & Broadcasting )

Through

Bimal Julka ( Secretary – Ministry of Information & Broadcasting) Government of India, New Delhi-110001

secy.inb@nic.in

Sub. : Request for inquiry in the matter of UP Chief Minister Akhilesh Yadav and others downloading the film ‘PK’ from a website , thus watching a pirated copy of film and take subsequent punitive actions against all the defaulters as per the law of the land.

Sir,
On 31st December 2014, while addressing a press conference to recount the achievements of the Samajwadi Party government during 2014, UP CM Akhilesh Yadav admitted that he saw the film ‘PK’ on Tuesday ( 30th December 2014 ) night. He also said, “People had been telling me for many days to watch PK. I downloaded it a few days ago, but only found the time to watch it last night. I liked it immediately and decided to make it ‘tax-free’ so that more people can watch it.” So It becomes an established fact that Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav illegally downloaded  the film ‘PK’ from a website  named ‘Torrent’
and watched a pirated copy of film.

A copyright violation under Section 63  of the Copyright Act, 1957 (the Act) read with Copyright (Amendment) Act, 1994 (38 of 1994) , is a cognizable criminal offence where, upon complaint, police should take legal action. Under section 64 of the Copyright Act, 1957, police has power seize infringing copies. As per Section. 65,any person who knowingly makes, or has in his possession, any plate for the purpose of making infringing copies of any work in which Copyright subsists is punishable with imprisonment which may extends to 2 yrs. and with fine. In view of the unequivocal provisions contained under Section 69 of the Act, all persons responsible for such conduct are liable for imprisonment and fine. Infringing Copy is any reproduction, copy or sound recording, as the case may be, made or reported in contravention of the provision of the Act.

The offence besides being punishable under IT Act 2000,is punishable under 1923 Goondas Act also.

Keeping in view the responsible position of CM, held by Akhilesh Yadav, its clear that he was  fully aware  of the fact that his conduct was not only illegal but was a criminal act also but even then, he not only committed it but by misusing the high position of CM, dared to announce it in broad daylight in a press conference.

Sir, Hackers are persons who view confidential information, steal trade secrets or intellectual property with the use of internet. Hackers are also involved in intellectual property crime, forgery, unauthorized access to Computer system, theft of information contained in the electronic form. Going by this Akhilesh Yadav has also acted like a hacker in this matter.

On the basis of abovementioned facts, I, as a responsible citizen of India, am requesting you to get the matter of downloading the film ‘PK’ from a website and thus watching a pirated copy of film by UP Chief Minister Akhilesh Yadav and others  inquired thoroughly.  Please take subsequent punitive actions including registration of  First Information Report (FIR) against all the defaulters as per prevailing law of the land.

Regards.

Copy being sent to President of India for appropriate action at his end .

Date : 02-01-2015
Sincerely yours,

( Er. Sanjay Sharma )
Founder & Chairman
Transparency, Accountability & Human Rights Initiative for Revolution ( TAHRIR )
101,Narain Tower,F Block, Rajajipuram,Lucknow,Uttar Pradesh-226017
Website : http://tahririndia.blogspot.in/
Email : tahririndia@gmail.com
Facebook : https://www.facebook.com/sanjay.sharma.tahrir
Twitter Handle : @tahririndia  Mobile : 9369613513

थाना हजरतगंज में एफआईआर के लिए दी गई तहरीर….

To,
Police Station Incharge ( Thanadhyaksha )
Hazratganj Police Station,Lucknow, Uttar Pradesh, Pin Code-226001

Sub. : Request to register First Information Report (FIR) under Sec. 154 of CrPC against UP Chief Minister Akhilesh Yadav and others for the offence of downloading the film ‘PK’ from a website and thus watching a pirated copy of film and take subsequent action as per law of the land against all the defaulters.

Sir,
On 31st December 2014, while addressing a press conference to recount the achievements of the Samajwadi Party government during 2014, UP CM Akhilesh Yadav admitted that he saw the film ‘PK’ on Tuesday ( 30th December 2014 ) night. He also said, “People had been telling me for many days to watch PK. I downloaded it a few days ago, but only found the time to watch it last night. I liked it immediately and decided to make it ‘tax-free’ so that more people can watch it.” So It becomes an established fact that Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav illegally downloaded  the film ‘PK’ from a website  named ‘Torrent’ and watched a pirated copy of film.

A copyright violation under Section 63  of the Copyright Act, 1957 (the Act) read with Copyright (Amendment) Act, 1994 (38 of 1994) , is a cognizable criminal offence where, upon complaint, police should take legal action. Under section 64 of the Copyright Act, 1957, police has power seize infringing copies. As per Section. 65,any person who knowingly makes, or has in his possession, any plate for the purpose of making infringing copies of any work in which Copyright subsists is punishable with imprisonment which may extends to 2 yrs. and with fine. In view of the unequivocal provisions contained under Section 69 of the Act, all persons responsible for such conduct are liable for
imprisonment and fine. Infringing Copy is any reproduction, copy or sound recording, as the case may be, made or reported in contravention of the provision of the Act.

The offence besides being punishable under IT Act 2000,is punishable under 1923 Goondas Act also.

Keeping in view the responsible position of CM, held by Akhilesh Yadav, its clear that he was  fully aware  of the fact that his conduct was not only illegal but was a criminal act also but even then, he not only committed it but by misusing the high position of CM, dared to announce it in broad daylight in a press conference.

Hackers are persons who view confidential information, steal trade secrets or intellectual property with the use of internet. Hackers are also involved in intellectual property crime, forgery, unauthorized access to Computer system, theft of information contained in the electronic form. Going by this Akhilesh Yadav has also acted like a hacker in this matter.

On the basis of abovementioned facts, I, as a responsible citizen of India, am requesting you to register a First Information Report (FIR) under Sec. 154 of CrPC against UP Chief Minister Akhilesh Yadav and others for the said offence of downloading the film ‘PK’ from a website and thus watching a pirated copy of film under laws applicable
in India including relevant sections of Indian Penal Code and take subsequent action as per the law of the land to punish all the defaulters.

Regards.

Date : 02-01-2015

Sincerely yours,

( Er. Sanjay Sharma )
Founder & Chairman
Transparency, Accountability & Human Rights Initiative for Revolution ( TAHRIR )
101,Narain Tower,F Block, Rajajipuram,Lucknow,Uttar Pradesh-226017
Website : http://tahririndia.blogspot.in/      Email : tahririndia@gmail.com
Facebook : https://www.facebook.com/sanjay.sharma.tahrir
Twitter Handle : @tahririndia  Mobile : 9369613513

Copy Being sent to the under-mentioned authorities to take due-cognizance of the matter and take immediate action in this case at their end:
1-  The Chief Justice of India, Supreme Court of India, New Delhi.
“supremecourt” <supremecourt@nic.in>, “supremecourt”
<supremecourt@hub.nic.in>,
2-      The Governor of Uttar Pradesh
Uttar Pradesh Government , Lucknow,Uttar Pradesh,India,Pin Code-226001
“hgovup” <hgovup@nic.in>, “hgovup” <hgovup@up.nic.in>, “hgovup” <hgovup@gov.in>,
3-      Chief Minister of Uttar Pradesh, Uttar Pradesh Government,Lucknow.
“cmup” <cmup@nic.in>,”cmup” <cmup@up.nic.in>,
4-      Chief Secretary of Uttar Pradesh, Uttar Pradesh Government,Lucknow.
“csup” <csup@up.nic.in>,
5-      Director General of Uttar Pradesh Police uppcc-up
<uppcc-up@nic.in>, uppcc <uppcc@up.nic.in>, dgp <dgp@up.nic.in>,
6-      District Magistrate of Lucknow  dmluc@up.nic.in
7-      DIG Range Lucknow digrlkw@up.nic.in
8-      SSP Lucknow ssplkw-up@nic.in


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यूपी में जंगलराज : आधी रात दरवाजा तोड़कर घर में घुसी पुलिस ने पत्रकार को हवालात में बंद कर धमकाया

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यूपी में जंगल राज : आप लोग इस यादव के खिलाफ कुछ लिखते क्यों नहीं?

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‘न्यूज11’ के खिलाफ गलत खबर चलाने का मुकदमा

रांची में चुनाव आयोग ने झारखंड के एक कुख्यात न्यूज चैनल ‘न्यूज 11’ के खिलाफ चुनाव के दौरान गलत समाचार प्रसारण करने पर मामला दायर किया है। चुनाव आयोग ने खबर को आचार संहिता के खिलाफ और बदनीयती माना है। आयोग की ओर से चैनल के खिलाफ परिवाद पत्र राजेश पांडेय ने दाखिल किया है। साथ ही हजारीबाग के डीसी से भी इस पर प्रतिवेदन मांगा है।

चैनल ने मतदान के एक दिन पहले गलत तरीके से यह खबर चला दी थी कि सदर विधानसभा सीट पर भाजपा को टक्कर कांग्रेस नहीं बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी दे रहे हैं। चैनल पर काफी देर तक चली इस खबर का असर मतदान पर पड़ा और भाजपा को एक निर्दलीय प्रत्याशी के हराने की खबर पर अल्पसंख्क वोटों का ध्रुवीकारण कांग्रेस से हटकर निर्दलीय प्रत्याशी की ओर हो गया। मामले में शिकायत आयी तो चुनाव आयोग ने संज्ञाान ले लिया। हजारीबाग से फुटेज भी मंगाये जा रहे हैं।

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पत्रकार से मारपीट करने तथा अपमानजक होर्डिंग लगाने के आरोपी पुलिस पकड़ से बाहर

: भूख हड़ताल के बाद दर्ज हुई थी तीन एफआईआर : शाहजहांपुर में एक पत्रकार के खिलाफ अपमानजनक टिप्‍पणी लिखे होर्डिंग्‍स लगाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. आरोपी व्‍यापारियों के खिलाफ तीन-तीन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी में लापरवाही के बाद पत्रकार फिर से आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं. पुलिस के सामने होने के बाद भी पुलिस आरोपियों को अरेस्‍ट करने की बजाय सेवा करने में लगी रही. गौरतलब है कि अपमानजनक होर्डिंग्‍स लगाए जाने तथा एक पत्रकार पर हमले के खिलाफ पत्रकार जगेंद्र सिंह भूख हड़ताल पर बैठ गए थे, जिसके बाद सिटी मजिस्‍ट्रेट ने कार्रवाई का आश्‍वासन देकर उनका हड़ताल तुड़वाया था. 

बीते बुधवार की रात कुछ आसमाजिक तत्वों ने पत्रकार जगेंद्र सिंह के वांटेड लिखित होर्डिंग शहर में जगह जगह लगा दिए थे. होर्डिग में थाना सदर बाजार के प्रभारी निरीक्षक को सीयूजी नम्बर भी डाल दिया गया था तथा जगेंद्र को पकड़वाने वाले को उचित ईनाम दिए जाने की बात भी कही गई थी. पत्रकारों का कहना है कि कुछ दिनों ने नकली सरसों के तेल का कारोबार करने वाले सचिन बाथम और उसके साथी सुरेंद्र सेठ जगेंद्र को धमका रहे थे कि उन लोगों के खिलाफ खबरें न छापी जाए. उन लोगों ने ही इस होर्डिंग को लगवाया था. 

पत्रकारों का आरोप था कि जगेंद्र की छवि धूमिल करने के खिला इन लोगों ने ही अपमानजन शब्द लिखे होर्डिंग लगवाए गए थे. इसके पूर्व ही व्‍यापारी सचिन बाथम अपने साथियों के साथ पत्रकार जितेंद्र कुमार पर हमला कर दिया था, क्‍योंकि उन्‍होंने जगेंद्र के खिलाफ वांटेंड का होर्डिंग लगाने से मना कर दिया था. जितेंद्र से मारपीट करने के साथ उसे जातिसूचक गालियां भी दी गईं. जितेंद्र एवं जगेंद्र की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 115 समेत कई मामलों में तीन एफआईआर दर्ज किए थे, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई. 

खबर है कि बीते दिनों आरोपी सचिन बाथम और उसका आरोपी दोस्‍त सुरेंद्र सेठ पुलिस के पास बैठकर मामले को सुलटाने में लगे रहे, पुलिस उनकी गिरफ्तारी करने की बजाय मामले को सलटवाने का प्रयास करती रही. इससे नाराज पत्रकार अब फिर से आंदोलन और भूख हड़ताल की तैयारी में हैं. दूसरी तरफ इस मामले में गलत रिपोर्टिंग के आरोप में अमर उजाला के ब्‍यूरोचीफ की शिकायत मालिक राजुल माहेश्‍वरी को भी भेजी गई है. पत्रकार दीप श्रीवास्तव, सौरभ दीक्षित, अमित त्यागी, अम्बुज मिश्र, रीतेश माथुर, पीयूष दुबे, सुशील शुक्ला, प्रेमशंकर गंगवार, अमित गुप्ता, कमल सिंह, हेमंत डे, सुयश सिन्हा, विजय शुक्ला, विनीत सैनी, विजय भारती, गोविंद अवस्थी, विनीत गुप्ता, राजीव गुप्ता, जितेंद्र सिंह, अवनीश मिश्र, आदर्श मिश्र, रोहित यादव, अभिनव मिश्रा, अभिनय गुप्ता, रवि शर्मा, साजिद खां, सचिन गुप्ता, शानू, शान मोहम्मद, ओमप्रकाश, मनोज कुमार आदि ने पूरे मामले में नाराजगी जताई है. 

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देहरादून में आज तक और आईबीएन7 के रिपोर्टरों दिलीप सिंह राठौर व संजीव शर्मा पर मुकदमा दर्ज

देहरादून से एक बड़ी खबर आ रही है. दो न्यूज चैनलों के स्थानीय रिपोर्टरों पर मुकदमा दर्ज हो गया है. ये दो हैं आजतक के रिपोर्टर दिलीप राठौर और आईबीएन7 के रिपोर्टर संजीव शर्मा. आरोप है कि आज तक के रिपोर्टर ने बीते दिनों मीडिया सेंटर में एक-दूसरे व्यक्ति के साथ मार-पीट व गाली-गलोच कर दी थी.  बीच-बचाव करने आये दूसरे पत्रकारों को भी नहीं बख्शा. इस कारण कई लोग दिलीप से नाराज हो गए. पीड़ित विरेंदर सिंह द्वारा दी गई शिकायत पर धारा चौकी में पुलिस ने आजतक और आईबीएन7 के रिपोर्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है.  

पीड़ित विरेंदर सिंह ने भड़ास4मीडिया को बताया कि 10 नवंबर को दिए गए पार्थना पत्र पर आज तक के रिपोर्टर दिलीप सिंह राठौर और आईबीएन7 के संजीव शर्मा के दबावों के बावजूद पुलिस अधिकारियों ने घटना को सच मानते हुए मेरी रिपोर्ट दर्ज कर ली है. एफआईआर की कापी भड़ास को मेल से भेजी जा रही है.  विरेंदर ने बताया कि आजतक के राज्य संवाददाता दिलीप सिंह राठौर और आईबीएन7 के संजीव शर्मा  ने मुझे प्रताड़ित किया.  मेरे जमीन के मसले में मुझसे बार-बार पैसे मांगते हैं. पैसे न देने पर बंद करा देने की धमकी देते हैं. इन्ह लोगों ने मेरे साथ मारपीट और गाली गलौच की. जान से मरने की धमकी भी दी. विरेंदर ने आरोप लगाया कि आजतक और आईबीएन7 के दोनों रिपोर्टरों ने दो साल में बहुत से लोगों से पैसे ले रखे है और जब उनसे कोई वापस मांगता है तो उसे चैनल की धमकी देते हैं.  

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आज तक के स्ट्रिंगर शरद के खिलाफ डकैती का मुकदमा झूठा निकला

यशवंत भाई आदाब,  अभी कुछ समय पहले ‘भड़ास 4 मीडिया’ पर एक समाचार प्रकाशित हुआ था जिसका शीषर्क था- ‘आज तक के स्ट्रिंगर के खिलाफ डकैती का  मुकदमा दर्ज’.  ये खबर मुरादाबाद से आज तक के जिला संवादाता शरद गौतम के लिये उनके चाहने वालों ने भड़ास पर पोस्ट कराई थी और उनकी मंशा ये रही होगी कि इस खबर से आजतक समूह  शरद गौतम को बाहर का रास्ता दिखा देगा लेकिन हुआ इसका उलट. 14  oct 2014 को ये  मुकदमा संभल जनपद के चंदोसी कोतवाली में दर्ज हुआ और 18 OCT 2014 को जाँच अधिकारी ने मुकदमा झूठा पाया और एक्सपंज कर दिया.

जानकारी के मुताबिक़ संभल जनपद के कुछ प्रिंट के लोग जो फर्जी नामों से न्यूज़ चैनल के लिए भी काम करते हैं, शरद गौतम से खुन्नस रखते हैं. वो ये चाहते हैं कि शरद गौतम संभल जनपद की खबरें न कवर करें ताकि वो अपने हिसाब से खबरों को मैनज कर सकें और कुछ कमाई कर सकें. लेकिन ऐसे दलाल टाइप पत्रकार विफल हो गए हैं. मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि ऐसे टुच्चे पत्रकार मेरी पोस्ट पड़कर फर्जी नाम से टिप्पणी करेंगे वो इसलिये कि वो उनकी आदत में शामिल है. ऐसे घटिया लोगों ने मुरादाबाद में न जाने कितने पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा कर थूक कर चाटा है. और, अब ये ही काम जनपद संभल और मुरादाबाद के कुछ चुटिया टाइप पत्रकारों ने अंजाम दिया है.  शरद गौतम के खिलाफ दर्ज मुक़दमे में एक्सपंज रिपोर्ट की छायप्रति भी पोस्ट कर रहा हूं जिसको जहां जरूररत हो इस्तेमाल कर सकता है.

अब्दुल वाजिद

मुरादाबाद

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