Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी के नाम 4000 करोड़ की ठगी, हाईकोर्ट ने 56 की बेल खारिज की

प्रयागराज | इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा के जीएसटी फ्रॉड मामले के दर्जनों आरोपी अभियुक्तों को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया है. प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की कोर्ट में चल रही है.

न्यायमूर्ति ने गौतमबुद्धनगर के राजीव जिंदल व 55 अन्य की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा कि, जमानत देते समय अपराध की प्रकृति, सबूतों की विश्वसनीयता, दंड की संभावना, अभियुक्त का आचरण और परिस्थितियां, मुकदमे में अभियुक्त की उपस्थिति सुनिश्चित करना, गवाहों को प्रभावित कर सकने की संभावना आम जनता और राज्य का व्यापक हित इत्यादि तमाम बातों पर विचार करना होता है.

ईटीवी भारत की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, द लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने नोएडा सेक्टर 20 थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि उनकी फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर बिना उनकी अनुमति के पंजाब और महाराष्ट्र में जीएसटी फर्मों का पंजीकरण कराया गया. सौरभ ने इसकी जांच किए जाने की मांग की थी.

एसआईटी गठित कर मामले की जांच शुरू की गई तो राष्ट्रीय स्तर पर किए जा रहे फ्रॉड का खुलासा हुआ. पता चला कि पूरे फ्रॉड में दर्जनों लोग शामिल हैं जो लोगों की फर्जी आईडी का इस्तेमाल कर जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराते हैं और उस पर फर्जी तरीके से टैक्स इनपुट क्रेडिट लेकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा रहे हैं.

कोर्ट को बताया गया कि अभियुक्तगण फर्जी जीएसटी फर्म का रजिस्ट्रेशन करवा कर इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल कर सरकार को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा चुके हैं. अब तक की जांच में उनके द्वारा 4000 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट का मामला सामने आया है.

जबकि 2,645 करोड़ रुपये से अधिक का सरकार के खजाने को नुकसान पहुंचाया जा चुका है. जांच अभी चल रही है. मामले में कई अभियुक्त सामने आए हैं, जिनके बयानों के आधार पर अन्य लोगों के भी नाम सामने आ रहे हैं.

याचीगण का कहना है कि वह लोग प्राथमिकी में नामजद नहीं हैं, उनको झूठा फंसाया गया है. उधर जांच टीम का कहना था कि जांच में कई अभियुक्तों के पास से बड़ी संख्या में कंपनियों के डेटा, फर्जी सिम कार्ड, मोबाइल फोन, फर्जी दस्तावेज और कैश बरामद हुआ है. याचीगण ने कहा कि फर्जी जीएसटी नंबर उत्तर प्रदेश के बाहर के राज्यों से प्राप्त किए गए हैं. शिकायतकर्ता स्वयं दिल्ली का रहने वाला है तथा प्राथमिकी गौतमबुद्धनगर में दर्ज कराई गई है.

अदालत ने इस आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि, भले ही फर्जी कंपनियां दूसरे राज्यों में बनाई गई हैं, जीएसटी में सिर्फ राज्य के बीतर ही नहीं अंतर्राज्यीय सप्लाई चेन की भी निगरानी की जाती है. कोर्ट ने कहा कि शिकायत की सत्यता पर क्षेत्राधिकार के आधार पर सवाल नहीं उठाया जा सकता. कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए सबी की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन