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दिल्ली

लल्लनटॉप के पत्रकार और कैमरामैन की पिटाई का डीयूजे ने विरोध किया!

दिल्ली यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स (DUJ) रविवार को लल्लनटॉप के पत्रकार और कैमरा पर्सन के साथ हुई बर्बरता की कड़ी निंदा करता है। स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (SSC) भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ़ चल रहे छात्र प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने न केवल रोका, बल्कि उनकी पहचान पत्र, मोबाइल, कैमरा और माइक्रोफ़ोन छीनकर उन्हें जबरन पुलिस वैन में डाल दिया। यह घटना लोकतंत्र में प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा ह मला है।

पत्रकारों को उनकी पहचान बताने के बावजूद हिरासत में लेना, उनका उपकरण छीनना और उन्हें आम प्रदर्शनकारियों की तरह धकेलकर ले जाना, यह दिखाता है कि सत्ता के संस्थान पत्रकारों को डराने-धमकाने का औज़ार बना रहे हैं। यह प्रवृत्ति पत्रकारिता को अपराध बनाने की कोशिश का हिस्सा है।

हाल के वर्षों में पत्रकारों पर हमले, मनमाने मुकदमे, गिरफ्तारी और कवरेज के अधिकारों पर रोक बढ़ती जा रही है।

चुनावी माहौल में यह स्थिति और भी चिंताजनक है। जब पत्रकारों को निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए स्वतंत्र वातावरण नहीं मिलेगा, तो जनता तक सही सूचना पहुंचाने का लोकतांत्रिक अधिकार भी खतरे में पड़ जाएगा। प्रेस का काम सत्ता को जवाबदेह ठहराना है, न कि उसके डर से चुप होना।

DUJ मांग करता है कि इस घटना की उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कार्रवाई की जाए और पत्रकारों की सुरक्षा के लिएठोस नीतियां बनाई जाएं। लोकतंत्र में पुलिस का काम पत्रकारों को प्रताड़ित करना नहीं, बल्कि उन्हें कवरेज के दौरान सहयोग देना है।

हम केंद्र और राज्य सरकारों को याद दिलाना चाहते हैं कि प्रेस की स्वतंत्रता सिर्फ पत्रकारों का नहीं, बल्कि नागरिकों काअधिकार है। अगर पत्रकार डर और दमन के माहौल में काम करेंगे, तो लोकतंत्र कमजोर होगा।

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