सेलरी संकट से जूझ रहे ‘मी मराठी’ के मैनेजिंग एडिटर ने प्रबंधन को चिट्ठी लिख चैनल बंद करने को कहा

हेलो श्रीमान

अपना न्यूज चैनल ‘मी मराठी’ कई जगहों पर दिखना बंद हो गया है। मुझे लगता है हमें अब इस चैनल को बंद कर देना चाहिए। लोगों की पगार देकर फुल एंड फायनल सेटलमेंट कर देना चाहिए। सीएमडी सर वापस आएंगे तो या फिर कोई इन्वेस्टर आए तो इसे किसी भी वक्त वापस फिर शुरू किया जा सकता है। अब ऐसी हालत में इसे और चलाना मतलब ब्रांडिंग बिगाड़ने जैसा है।

हम मी मराठी पर फिलहाल एक बुलेटिन चला रहे हैं जिसका वैसे कोई मतलब नहीं है। यहां हर रोज लोग पैसा माँग रहे हैं, उनसे मैं निपट नहीं सकता। लोगों की सैलरी नहीं मिली तो लोग इक्विपमेंट उठा कर ले जा सकते हैं, ऐसा माहौल ऑफिस में बना है। किसी सीनियर से कोई ढंग से बात नहीं कर रहा है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए मैने पाईंट ब्लँक बंद कर दिया है। 20 के बाद बुलेटिन भी बंद कर देंगे। सिर्फ लोगों को बुलाकर कुछ दिन वार रूम किया जा सकता है। 31 के बाद पूरा चैनल ऑफ एअर करना सही रहेगा।

धन्यवाद!
रविन्द्र आंबेकर
मैनेजिंग एडिटर


(ये चिट्ठी मी मराठी के मैनेजिंग एडिटर रवींद्र आंबेडकर ने मैनेजमेंट और सारे एडिटर्स को भेजी है. ज्ञात हो कि मी मराठी, लाइव इंडिया नाम चैनल समृद्ध जीवन कंपनी से जुड़े हैं जिसके मालिक चिटफंड स्कैम में जेल में हैं. मालिकों के जेल में होने से चैनलों व अखबार के कर्मियों को सेलरी संकट का सामना करना पड़ रहा है.)

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