लोकपाल नियुक्ति होते ही मोदी सरकार में इसके प्रति ‘पांच सितारा प्रेम’ उमड़ा!

लोकपाल और मेम्बर्स के लिए पांच सितारा होटल में चेम्बर्स! मोदीजी बारह तेरह बरस तक गुजरात के मुख्यमंत्री थे. तब लोकायुक्त और पांच साल प्रधानमंत्री रहते लोकपाल की नियुक्ति नहीं होने दी. सुप्रीम कोर्ट का समय-सीमा में नियुक्ति का डंडा पड़ा तब ही आचार संहिता के दौरान देश को पहला लोकपाल और इसके आठ सदस्य मिले.

लोकपाल नियुक्त होते ही मोदी सरकार में इसके प्रति प्रेम उमड़ पड़ा है. जब संबंधित विभाग ऑफिस के लिए उपयुक्त भवन तलाश रहा था तब मोदीजी ने लोकपाल और सदस्यों के चेम्बर्स के लिए पांच सितारा अशोक होटल बारह सुइट बुक कर नाटकीय दरियादिली का परिचय दिया है.

भारत सरकार के पर्सनल और ट्रेनिंग विभाग का कहना है कि इस संस्था को सामान्य कामकाज शुरू करने में कम से कम तीन महीने तो लगेंगे ही. तो फिर उच्च स्तर के भ्रष्टाचार पर लगाम कसने वाली संस्था पर सिर्फ कुर्सियां तोड़ने के लिए महँगी कवायद क्यों? कुछ समय तक सिर्फ बैठने के लिए तो कहीं भी इंतजाम हो सकता था. कुल मिलाकर सत्ता की इस पांच सितारा मेजबानी को अच्छा शगुन नहीं माना जा रहा है.

देखें इंडियन एक्सप्रेस और दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर…

भोपाल से वरिष्ठ पत्रकार श्रीप्रकाश दीक्षित की रिपोर्ट.



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