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सुख-दुख

दिल्ली के लुटियंस ज़ोन के कुछ पत्रकारों ने सिर्फ़ एक-दूसरे के ट्वीट और अफ़वाहों की चेन बनाकर पूरी “कहानी” गढ़ दी!

विनीता यादव-

दिल्ली के लुटियंस ज़ोन के कुछ पत्रकारों की ये बेचैनी सच में हँसाने वाली है। PMO से जुड़े किस्सों की ऐसी भूख कि बिना किसी दस्तावेज़, बिना किसी सबूत—सिर्फ़ एक-दूसरे के ट्वीट और अफ़वाहों की चेन बनाकर पूरी “कहानी” गढ़ दी। प्रेस कॉन्फ़्रेन्स तक भी पहुँच गए, मानो कोई बड़ा खुलासा हो! सोचने की बात ये है कि प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने वालों को भी समझना चाहिए कि कॉन्फ़्रेंस उन मुद्दों पर होनी चाहिए जो जनता से जुड़े हों, न कि अफ़वाहों पर।

सबसे बड़ी बात — प्रधानमंत्री कार्यालय पर इन अफ़वाहों का ज़रा भी असर नहीं पड़ा। अंदर कुछ नहीं हुआ, ये सारा हंगामा बाहर ही चल रहा है। PMO पहले की तरह बिल्कुल सामान्य गति से काम कर रहा है।

पहली बार PMO के अंदर की सुनी-सुनाई बातों तक पहुँचने के चक्कर में कई वरिष्ठ पत्रकार भी सिर्फ़ मुंह बोली कहानियों पर कूद पड़े — ये देखकर सच में हँसी आती है।

हम सब लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गंभीर ज़िम्मेदारी निभाते हैं। क्या बोलते हैं, क्या लिखते हैं, किस आधार पर बात फैलाते हैं — ये सब बेहद महत्वपूर्ण है। ये मौखिक अफ़वाह बिना किसी आधार के कई अधिकारियों, पत्रकारों और राजनीतिक लोगों तक घूमती रही। ये पत्रकारिता नहीं है। समझ नहीं आता कि पत्रकार अपने आपको स्टोरीटेलर क्यों बनाने पर तुले हैं — ये काम मज़ाक नहीं, एक गंभीर ज़िम्मेदारी है।


हिरेन जोशी के बारे में प्रमाण / सुबूत कोई सामने कुछ नहीं ला पा रहा है। बस कपोल कल्पित कहानियाँ चल रही हैं। और लोग चाहते हैं वेबसाइट्स बड़ी बड़ी न्यूज़ बनाकर पब्लिश करें। आजकल हर खबर पर लोग कोर्ट चले जाते हैं और कोर्ट को कागज चाहिए होता है। कहाँ से देंगे वेबसाइट वाले? हिरेन जोशी की फ़र्ज़ी स्टोरीज सिर्फ़ कांग्रेस आईटी सेल वालों को शोभा देता है। जेल जाएँगे तो कांग्रेस में शहीद कहलायेंगे, टिकट विकट मिल जाएगा, जमानत कोर्ट कचहरी पर पार्टी पैसा खर्च कर देगी। इसलिए सोच समझकर भाइयों। दोनों तरफ़ के आई टी सेल वाले बहुत परम हैं। अपने जान माल की रक्षा ख़ुद करें।


नवनीत सहगल गए। कागज आ गया जाने का। न्यूज़ कन्फर्म हो गई। सबने ताव से पब्लिश किया। हिरेन जोशी जाएँगे तो कागज आ जाएगा। फिर बढ़िया से पब्लिश किया जाएगा। हड़बड़ी किस बात की है?

हाँ कांग्रेस आई टी सेल कुछ भी लिख – कह सकती है। बीजेपी आई टी सेल वालों ने कांग्रेस और इसके नेताओं की लंका लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसलिए बदला तो बनता है। कांग्रेस के पास सामर्थ्य है मुकदमों को झेलने की। बेचारे हम जैसे वेबसाइट वाले कहाँ से लायेंगे धनबल और जनबल! इसलिए कागज आने का इंतज़ार करेंगे। तब तक तरह तरह की कहानियाँ पढ़कर मनोरंजन करेंगे।

-यशवंत सिंह

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