सेबी चीफ माधबी पुरी बुच लोकलेखा समिति के सामने नहीं हुईं पेश. बुच से हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों और अडानी समूह के बारे में सेबी की जांच के संबंध में सवाल पूछे जाने थे….
सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच को संसद की लोकलेखा समिति (PAC) के सामने गुरुवार को पेश होना था. मामले में बताया जा रहा है कि सेबी प्रमुख समिति के सामने पेश ही नहीं हुईं. सूत्रों का कहना है कि उन्होंने एक पत्र के जरिए समिति के सामने पेश न होने की असमर्थता जताई है.

माधबी के न आने पर पीएसी के अध्यक्ष और कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने सुझाव दिया कि सेबी चीफ को पेश होने के लिए अगली तारीख देकर बैठक को अगली बार के लिए टाल दिया जाए. वेणुगोपाल के इस सुझाव का पीएसी में शामिल बीजेपी सदस्यों ने विरोध किया है.
बता दें कि माधबी पुरी बुच पर अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग ने गंभीर आरोप लगाए थे. हालांकि इन आरोपों का जवाब माधबी पुरी बुच ने दिया था लेकिन कई सवाल ऐसे हैं जो अब तक उलझे हुए हैं.
नवजीवन अखबार की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आरोपों के मद्देनजर बुच की पेशी काफी अहम मानी जा रही थी, इसे लेकर बैठक में हंगामा होने के आसार भी बताए जा रहे हैं. बीजेपी सांसद पहले ही वेणुगोपाल पर राजनीति से प्रेरित होकर कदम उठाने का आरोप लगा चुके हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति द्वारा माधबी पुरी बुच को पेश होने का नोटिस दिए जाने से सत्तापक्ष के सदस्य कुछ असहज भी हैं. उसका कारण बताया गया कि बुच पर जिस हिंडनबर्ग ने आरोप लगाए हैं उसी कंपनी ने अडानी समूह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं.
गौरतलब है कि हिंडनबर्ग ने माधबी बुच पर सेबी प्रमुख रहते अडानी समूह को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए थे. इसके बाद कांग्रेस ने भी इसी तरह के आरोप लगाए थे. एक अन्य आरोप भी है जिसके तहत माधबी बुच ने आईसीआईसीआई बैंक में अपने कार्यकाल से हासिल कुल आय का खुलासा नहीं किया.
बुच के खिलाफ एक और मोर्चा तब खुला था जब सेबी के कर्मचारियों ने वित्त मंत्रालय को पत्र लिखकर उनके नेतृत्व में एक जहरीले माहौल और वर्क कल्चर का आरोप लगाया था. कर्मचारियों ने सेबी के शीर्ष अधिकारियों पर गाली-गलौज करने व चिल्लाने का आरोप भी लगाया था.
माधबी बुच ने 1 मार्च, 2022 को अजय त्यागी की जगह सेबी अध्यक्ष का पद संभाला था. हालांकि इससे पहले वे सेबी में निदेशक के रूप में नियुक्ति पा चुकी थीं.
रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बुच के साथ सेबी के 3-4 वरिष्ठ अधिकारी भी पीएसी के सामने पेश होंगे. पीएसी सेबी के कामकाज की समीक्षा करेगी और उसी आधार पर बुच व अन्य अधिकारियों से सवाल किए जा सकते हैं. इसके अलावा समिति सेबी से अडानी समूह से कथित रूप से जुड़ी ऑफशोर कंपनियों के खिलाफ लंबित जांच की स्थिति पर भी पूछताछ कर सकती है.


