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महुआ लिटरली कह के ले रही हैं… देखें टाइम्स नाऊ वाले से चैट!

Sheetal P Singh-

मनुष्य की जात उसका जेंडर उसकी खाल का रंग उसका धर्म, यह सब बेमानी साबित होता है..

असल बात है मौक़ा..

मौक़ा ही न दोगे तो कैसा शमी और कौन सी महुआ…

लेकिन मौक़ा मिल गया मिलता रहा तो…..

महुआ लिटरली कह के ले रही हैं और जाहिल सोच रहे है की उन्होंने महुआ को ठीक कर दिया… -Adv Abdul Qaadir

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