मजीठिया : आरटीआई से खुलासा, महाराष्ट्र सरकार ने एससी के फरमान को दफनाया

महाराष्ट्र सरकार  माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पत्रकारों के हितों को ध्यान में रखते हुये मजीठिया वेतन आयोग के बारे में दिये गये निर्णय की खुले आम धज्जियां उड़ा रही है या  फिर महाराष्ट्र सरकार नहीं चाहती कि पत्रकारों का भला हो।  सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सभी राज्य सरकारों को एक निर्देश जारी कर स्पष्ट कहा गया था कि एक विशेषश्रम अधिकारी की नियुक्ति करें, जो सभी समाचार पत्र प्रतिष्ठानों की रिपोर्ट देंगे कि कहां कहां मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिश प्रबंधन ने लागू की हैं और कहां नहीं। ये रिपोर्ट तीन महीने के अंदर सभी राज्य सरकारों के विशेष श्रम अधिकारी समाचार पत्रों के कार्यालय में जाकर एकत्र करेंगे और प्रबंधन तथा कर्मचारियों से एक उनका पक्ष समझेंगे और अपनी रिपोर्ट सरकार को देंगे।

 

कुछ सरकारो ने इसे मान भी लिया मगर लगता है कि महाराष्ट्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय से भी खुद को बड़ी समझने लगी है। यही कारण है कि अब जबकि रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय में जमा करने का समय आ गया है, सरकार की तरफ से किसे मजिठिया मामले में विशेषश्रम अधिकारी नियुक्त किया गया है यह खुद ना तो पत्रकारों को पता है और ना ही राज्य सरकार को और ना ही उसके उद्योग उर्जा और कामगार विभाग को।

मुंबई के एक पत्रकार  शशिकांत सिंह ने मुख्यमंत्री कार्यालय  से आरटीआई के जरिये २४ जून २०१५ को यह जानकारी मांगी कि मजीठिया वेतन आयोग मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार सरकार द्वारा नियुक्त किये गये  विशेष श्रम अधिकारी का नाम और उनके कार्यालय का पता बतायें तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सचिवालय ने १० जुलाई २०१५ को  इस आरटीआई का जवाब दिया कि आप द्वारा भेजा गया आरटीआई आवेदन पत्र माहिती और जनसंपर्क विभाग के सूचना अधिकारी के पास भेजा जा रहा है और उनको निवेदन किया जा रहा है कि वे आपको सूचना उपलब्ध करायें। 

मुख्यमंत्री सचिवालय से यह पत्र १० जुलाई २०१५ को सूचना मांगने वाले पत्रकार शशिकांत सिंह को भेजा गया। और उसकी प्रति माहिती एवं जनसंपर्क विभाग को भी भेजी गयी। यानि मुख्यमंत्री कार्यालय को विशेषश्रम अधिकारी का नाम नहीं पता है। अब चलते हैं सरकार के दूसरे महकमे की तरफ। मुख्यमंत्री सचिवालय का यह पत्र माहिती एवं जनसंपर्क विभाग को प्राप्त हुआ तो उन्होने भी इस मामले में अपना पल्ला यह कहते हुये २० जुलाई को झाड़ लिया कि पत्रकार शशिकांत सिंह  द्वारा मांगी गयी जानकारी देने के लिये माहिती अधिकारी, कामगार भवन को निर्देश दिया गया है। और इस निर्देश पत्र की एक प्रति पत्रकार शशिकांत सिंह  को भी दी गयी तथा कहा गया कि आप मंत्रालय की छठवीं मंजिल पर बने कामगार भवन में संपर्क करें।  

पत्रकार शशिकांत सिंह  ने जब मंत्रालय के कामगार भवन में संपर्क  किया तो वहां से उसे कहा गया कि आप डिस्पैच सेक्शन में जाईये । हमारे पास ऐसा कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। पत्रकार  शशिकांत सिंह जब मंत्रालय की पुरानी बिल्डिंग में ग्राउंड फ्लोर पर बने उद्योग उर्जा और कामगार विभाग के डिस्पैच सेक्सन में पहुंचे तो वहां २० जुलाई से लेकर २८ जुलाई तक माहिती और जनसंपर्क विभाग द्वारा कोई भी मजिठिया और विशेषश्रम अधिकारी से संबंधित पत्र भेजा ही नहीं गया था। बाद में शशिकांत सिंह को एक अगस्त को उद्योग उर्जा और कामगार विभाग ने एक पत्र लिखा जिसमें साफ तौर पर लिखा गया है कि आपको दो जून को भेजा गया पत्र १अगस्त २०१५ को मिला है और आप द्वारा आरटीआई के जरिये जो सूचना मांगी गयी है। उसे देने के लिये श्रम आयुक्त मुंबई को पत्र लिखा जारहा है और श्रम आयुक्त मुंबई को कहा गया है कि आप द्वारा मांगी गयी सूचना उपलब्ध करा दी जाये।  

माननीय सर्वोच्च न्यायालय  के आदेश और विशेषश्रम अधिकारी के बारे में ना तो मुख्यमंत्री कार्यालय को पता है और ना ही माहिती एवं जनसंपर्क विभाग को और ना ही उद्योग उर्जा और कामगार विभाग को ही इस बारे में पता है। मजे की बात ये है कि तीनो विभागों का कार्यालय एक ही जगह और एक ही विल्डिंग में है, फिर भी माहिती और जनसंपर्क विभाग से उद्योग उर्जा और कामगार विभाग में सूचना संबंधित पत्र पहुंचने में ११ दिन का समय लगा। अब १ अगस्त को मुंबई के श्रम आयुक्त को उद्योग उर्जा और कामगार विभाग द्वारा भेजा गया सूचना देने संबंधित पत्र का जवाब पत्रकार शशिकांत सिंह को नहीं दिया गया है। यानि साफ है कि विशेषश्रम अधिकारी की नियुक्ति महाराष्ट्र में नहीं हुई है और हर विभाग माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कोपभाजन से बचने के लिये एक दूसरे के पाले में गेंद डाल रहा है।

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Comments on “मजीठिया : आरटीआई से खुलासा, महाराष्ट्र सरकार ने एससी के फरमान को दफनाया

  • he brahmani aani jatpyvadi maharashtra sarkar fakt dhandabdgyanch aahe. tyana kadhich bahujanach kalyan pahavnar nahi

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  • Kashinath Matale NGP says:

    Maine bhi maharshtra Sarkar ko special inspectors ki niyukti ke bareme letter Likha tha. Mukhya mantri karyalay se muze email mila ki aapka patra mila hai, aur sambhndhi vibhag ko diya hai, aap unse puche.

    Nagpur me maine Additional commissioner office me jankari janne ki koshish ki parntu kisene bhi javab nahi diya aur kaha ki is prakar ko bhi nirdesh hame prapt nahi huya.

    Kuch din bad phir se maine ALC, Nagpur ke office me asstt. commissioner of laboour ne bataya ki aapka Mumbase letter aaya hai, sign karke received karo. Sambhandhit letter ke sath 2002 ka ek Notification ki xerox copy attach thi, jisme, Manisana me inspectiors ki appointment ke bareme likha hai.

    Iske bad maine Inspection karneki bat kahi, to Sahab kahane lagae ki inspection karne ka hame koi Nirdesh nahi hai.

    Shauad maharahtra govt. kuch nahi karna chahti hai.

    Hamari bhi Majithia Wage Board ki case Additional Labour Commissioner Nagpur ke office me pending hai.

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