दैनिक भास्कर के साथ आज 5 साल का सफर पूरा हो गया। प्रिंट से शिफ्ट हुए डिजिटल के सफर में बहुत कुछ सीखने को मिला।
बहुत कुछ नया हुआ, कुछ नया करने का मौका मिला। प्रिंट से आकर डिजिटल की रिपोर्टिंग करना शुरुआती दिनों में चुनौती रही, लेकिन सीनियर्स ने काम आसान कर दिया।
5 साल पहले डिजिटल के लिए सब नया था, तब के. जितेंद्र ज्योति सर ने डिजिटल की ABCD सिखाई। सर के साथ 2020 बिहार विधानसभा चुनाव में बहुत कुछ सीखा। प्रवीण वर्मा सर ने काम को लेकर फ्री हैंड किया, जिससे मैंने कई बड़े खुलासे किए।
प्रवीण सर के समय में ही मुझे भास्कर का नेशनल अवॉर्ड मिला और कई बड़े इन्वेस्टिगेशन के लिए मेरा नाम एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
अक्षय बाजपेई सर से काम की बारीकी सीखी और कई बड़े खुलासे किए। अक्षय सर ने खबरों के साथ टीम मैनेजमेंट का भी गुर सिखाया। अंकित फ्रेंसिस सर से इन्वेस्टिगेशन का मार्गदर्शन मिलता रहता है। फिलहाल दैनिक भास्कर डिजिटल बिहार झारखंड के स्टेट एडिटर श्याम सर के साथ मेरी पारी कुछ बड़ा और खबरों की दुनिया में इतिहास रचने के लिए आगे बढ़ रही है।

5 साल में भास्कर समूह के कई टॉप सीनियर्स का भी मार्गदर्शन हर समय हर परिस्थिति में मिलता रहा है। मेरे इस 5 साल के सफर में इनका बड़ा योगदान है। इसमें एक बड़ा नाम डीबी डिजिटल के मेरे नेशनल एडिटर प्रसून मिश्रा सर का है, जिनके बारे में जितना लिखूं कम है।
बाकी मेरे साथ के अन्य जूनियर और सीनियर साथियों से भी खूब सीखने को मिला और अभी सीख भी रहा हूं। टीम के सहयोग से 5 साल का सफर आसानी से पूरा हो गया। जिसने विरोध किया उनसे भी सीखा, जिसने साथ दिया उनसे भी सीखा। हर किसी से कुछ न कुछ सीखा और लगातार बेहतर करने की कोशिश किया।
यहां तक पहुंचने में भास्कर समूह के अलावा अन्य संस्थानों में बड़े पदों पर काम करने वाले कई ऐसे सीनियर्स के नाम हैं, जिन्होंने मेरा हर समय हर परिस्थिति में न सिर्फ मार्ग दर्शन किया बल्कि साथ खड़े रहे। ऐसे सीनियर्स का मै आजीवन आभारी रहूंगा।
दैनिक भास्कर के साथ सच्ची और बेधड़क पत्रकारिता का सफर आगे भी जारी रहेगा, क्योंकि हमें वहीं करना है जो कोई नहीं करता..! खबरों की दुनिया में इतिहास रचना है।


