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उत्तर प्रदेश

अखिलेश के मुंह में माइक घुसेड़कर सवाल पूछने वाले मीडियाकर्मी मायावती से 15 फीट दूर रखते हैं माइक!

Syed Yasir Raza Jafri : वाकई में क्या टेरर है। मान गया भाई। मायावती के बारे में आप सबने खूब सुना होगा और देखा भी होगा। वैसे तो मैंने भी मायावती की कई प्रेस कांफ्रेंस अटेंड की है, लेकिन बुधवार को ऐसा पहली बार हुआ जब स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी से अलग होने के एलान के बाद आनन फानन में मायावती ने कोई प्रेस कांफ्रेंस बुलायी जिसमें मैं भी पहुंचा। मायावती की बेचैनी मेरे साथ मायावती के घर में दाखिल होते बृजेश पाठक के चेहरे पर साफ झलक रही थी। शायद उन्हें भी प्रेस वालों की ही तरह तत्काल आने के निर्देश दिये गये थे।

Syed Yasir Raza Jafri : वाकई में क्या टेरर है। मान गया भाई। मायावती के बारे में आप सबने खूब सुना होगा और देखा भी होगा। वैसे तो मैंने भी मायावती की कई प्रेस कांफ्रेंस अटेंड की है, लेकिन बुधवार को ऐसा पहली बार हुआ जब स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी से अलग होने के एलान के बाद आनन फानन में मायावती ने कोई प्रेस कांफ्रेंस बुलायी जिसमें मैं भी पहुंचा। मायावती की बेचैनी मेरे साथ मायावती के घर में दाखिल होते बृजेश पाठक के चेहरे पर साफ झलक रही थी। शायद उन्हें भी प्रेस वालों की ही तरह तत्काल आने के निर्देश दिये गये थे।

बड़े से बड़ा नेता हो या कोई और इंसान उसे मायावती से मिलने के लिए दो दो डीएफएमडी (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) से होकर गुजरना पड़ता है। उनकी प्रेस कांफ्रेंस में सवाल पूछने से पहले हर मीडिया कर्मी को खुद के जलील होने का डर सताता रहता है। बड़े से बड़े सूरमाओं (पत्रकारों) की औकात नहीं होती कि मायावती से ऊंची आवाज में सवाल पूछ सके। खैर बात बृजेश पाठक की हो रही थी। स्वामी प्रसाद मौर्या के बसपा से अलविदा कहने के बाद बृजेश पाठक मायावती से मिलने वाले शायद पहले शख्स थे। मायावती के घर के अंदर बने पोर्टिको के बगल के दरवाजे के बाहर डीएफएमडी लगा था।

बृजेश पाठक ने बड़े ही अदब के साथ डीएफएमडी के बगल में अपना जूता उतारा पैर को दो बार साफ किया और कोठी के अंदर कुछ इस अंदाज में दाखिल हुए जैसे किसी क्लासरुम में लेट पहुंचने पर कोई बच्चा दाखिल होता है। अंदर क्या हुआ पता नहीं लेकिन जब बाहर निकले तो स्वामी प्रसाद मौर्य का वह प्रेसनोट तलाशते नजर आये जिसमें उन्होंने मायावती पर हमला बोला था। उन्हें मीडिया के एक बंधु के हाथ से प्रेसनोट आया तो उसे लपक लिया और बोले लाओ यार कब से यही तो ढूंढ रहे हैं। प्रेस नोट लेकर वह फिर बा अदब जूता उतार कर अंदर गये और चंद क्षणों में ही बाहर आ गये। कुछ ही देर बाद दरबान ने मेन दरवाजा खाला और मायावती बाहर आयीं।

चेहरे पर तनाव साफ देखा जा सकता था। अखिलेश यादव के मुंह में माइक घुसेड़कर सवाल पूछने वाले इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों को उनके माइक के साथ कम से कम 15 फिट दूर रखा गया था। पहली बार मायावती प्रेस को संबोधित करने के लिए बगैर कुछ लिखा लेकर आयीं थीं। उन्होंने आते ही स्वामी प्रसाद मौर्य पर हमले शुरु किये। काफी दिनों बाद मीडिया की ओर से उछाले गये एक दो सवालों के जवाब भी दिये। लेकिन सवालों में जैसे ही तीखापन आया प्रेस कांफ्रेंस खत्म हो गयी।

लखनऊ के पत्रकार सईद यासिर रजा जाफरी की एफबी वॉल से.

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