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ओ मारिया ओ मारिया… : मीडिया का बेड़ा गर्क करने में पत्रकारों और नेताओं के साथ साथ मार्केटिंग वालों की भी बड़ी भूमिका है!

संजय सिन्हा-

मीडिया का बेड़ा गर्क करने में सिर्फ पत्रकारों का नेताओं के आगे घुटने टेक देना ही जिम्मेदार नहीं है, इसमें मार्केटिंग वालों की भी बड़ी भूमिका है। अफ़सोस यह है कि वे साफ़-साफ़ बच निकलते हैं और मालिक समझ ही नहीं पाते कि किसी प्रोडक्ट के प्रचार और किसी न्यूज़ चैनल, उसके एंकर और टाइम स्लॉट के प्रमोशन में क्या अंतर है।

‘मैनकाइंड’ कंपनी ने अपने कंडोम के विज्ञापन में हेमा मालिनी, माधुरी दीक्षित, काजोल, रानी मुखर्जी, दीपिका पादुकोन या आलिया भट्ट को नहीं चुना था। मैं पूरे यक़ीन से कह सकता हूँ कि वे इस विज्ञापन के लिए तैयार नहीं होतीं, और नहीं होना चाहिए। मैनकाइंड ने कंडोम के विज्ञापन के लिए सनी लियोनी को चुना था, वह इस विज्ञापन के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार थीं।

चूंकि आज बात मीडिया की हो रही है, इस विषय को यहीं विराम देकर आगे बढ़ते हैं। आज संजय सिन्हा एक एंकर की चर्चा करने जा रहे हैं।

मैं मारिया को नहीं जानता, लेकिन सोशल साइट (भड़ास) से जानकारी मिली कि कोई मारिया इंडिया टुडे में आ रही हैं। और ‘इंडिया टुडे’ के इस प्रमोशनल विज्ञापन में गाना बज रहा है, “ओ मारिया, ओ मारिया…।” देखिए रात 10 बजे, सिर्फ इंडिया टुडे पर।

सुनने में यह आइडिया क्रिएटिव लग सकता है, लेकिन हक़ीक़त में यह एक सेंसुअस विज्ञापन है, जुगुप्सा जगाने वाला। क्यों?

“ओ मारिया, ओ मारिया” एक फिल्मी गाना है। इस गाने में मारिया की शादी हो रही है और उससे उसके दोस्त उसके प्रेम प्रसंग के बारे में अंतरंग सवाल पूछते हैं, “मारिया, बताओ न, जॉनी ने शादी के लिए कैसे कहा था? उसने गले लगाया था या नहीं? तुमने क्या जवाब दिया था, जब वह तुम्हारे पास आया था?”

‘इंडिया टुडे’ देश का एक प्रतिष्ठित न्यूज़ समूह है, एक बड़ा ब्रांड। मैं गर्व से कहता हूँ कि मैं कभी इंडिया टुडे समूह का हिस्सा था। लेकिन यह ब्रांडिंग? “ओ मारिया, ओ मारिया…”

हर विज्ञापन, ब्रांड प्रमोशन के कुछ मायने होते हैं। मैंने कहा न, मुझे नहीं पता कि मारिया कौन हैं, लेकिन अगर मारिया नामक किसी एंकर के शो का ये प्रमोशन है तो क्या मारिया न्यूज़ में बताएंगी कि वो सर्दी के दिन थे या गर्मी की रातें, जब वो जॉनी की बातों में खोई थीं? नहीं।

अगर संजय सिन्हा वहां होते, तो प्रबंधन को सलाह देते कि एक न्यूज़ चैनल के लिए यह चाहे जितनी लोकप्रिय हो लेकिन सस्ती पब्लिसिटी है। इससे मारिया को कम, और चैनल की छवि को ज़्यादा नुकसान होगा।

कहना नहीं चाहता, लेकिन ऐसा ही एक फूहड़ विज्ञापन पहले एक एंकर के लिए दिखता था कि ‘फलाना एंकर लगाएंगी वाट।’ “वाट लगाना” एक हल्का शब्द है। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल हल्के लोग, हल्की बातों के लिए करते हैं। एक महिला एंकर किसी की वाट क्यों और कैसे लगाएगी? एंकर को खबरें पढ़नी होती हैं, उसका काम वाट लगाना नहीं होता है।

मारिया पश्चिमी नाम है। ‘सागर’ फ़िल्म का गाना आने के बाद हमारे समय में कॉलेज में जब भी किसी लड़की का नाम मारिया होता, लड़के यही गुनगुनाते थे, “ओ मारिया, ओ मारिया…” और ये उसे चिढ़ाने के लिए होता था।

मेरे एक परिचित का बेटा छोटा था, जब अमिताभ बच्चन की फ़िल्म ‘हम’ का गाना ‘जुम्मा चुम्मा दे दे…’ लोकप्रिय हुआ था। वह बच्चा पूरे दिन यही गाता रहता था। दादा डांटते थे, रोकते थे। बच्चे को न ‘जुम्मा’ का पता था, न ‘चुम्मा’ का।

घर आए मेहमानों के सामने जब वह गाने लगता था, तो… आप समझ जाइए कि घर वालों की क्या प्रतिक्रिया होती होगी सबके सामने….वह तो घर की बात थी। लोग हंसकर भूल गए। पर यहां तो सार्वजनिक है – ओ मारिया ओ मारिया।

मारिया नाम स्वयं में सम्मानजनक और प्रसिद्ध है। इसका मूल अर्थ है ‘महारानी’। रोमन सम्राट होनोरियस की पहली पत्नी मारिया थीं, सेनापति स्टिलिचो की बेटी। एक दूसरी मारिया संत थीं, जिन्होंने प्रभु के साथ मिलकर कई चमत्कार किए। मारिया शारापोवा विश्वप्रसिद्ध रूसी टेनिस खिलाड़ी हैं। मारिया मोंटेसरी इटली की शिक्षाविद थीं, जिनके नाम पर प्रसिद्ध मोंटेसरी शिक्षा पद्धति है। मारिया थेरेसा ऑस्ट्रिया की आर्चडचेस और हंगरी की रानी थीं।

कमाल है, एक मीडिया हाउस को इनमें से किसी ‘मारिया’ की प्रेरक छवि नहीं दिखी। दिखा ‘ओ मारिया, ओ मारिया…’

लगता है, संजय सिन्हा ज़माने से बहुत पीछे रह गए हैं। सच में खबरों की दुनिया बदल गई है। आइए, हम सब मिलकर मारिया से उसकी ज़िंदगी के सबसे महत्वपूर्ण सवाल पूछते हैं-

“ओ मारिया, ओ मारिया, ओ मारिया ओ हो ओ.. जॉनी जब बोला था तुझसे, शादी करेगी मुझसे कैसे कहा था ये बता- (Please Describe)

  1. ओ माई डार्लिंग कह के क्या गले लगाया था?
  2. क्या बोली थी तू, जब वो पास आया था?
  3. मम्मी से पूछूंगी, क्या ऐसा बोली थी?
  4. सर्दी के दिन थे य गर्मी की रातें? खोई थी जब तू जॉनी की बातों में?
  5. थामा हाथ भी था क्या, अपने हाथों में?

ओ मारिया, ओ मारिया…” बर्बाद मीडिया के लिए अब सिर्फ पत्रकारों को मत कोसिएगा। इस जहाज को डुबोने में सब अपनी तरह से लगे हैं।

नोट-

  1. मेरा हमेशा मानना रहा है कि अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, अक्षय कुमार, अजय देवगन और टाइगर श्राफ जैसे हीरो को गुटका का विज्ञापन नहीं करना चाहिए था, चाहे जितने पैसे मिले हों।
  2. टीवी न्यूज एंकर घर-घर में प्रवेश पाया एक गरिमापूर्ण चेहरा है। बहुत बार वो आदर्श भी है। उन्हें बचना चाहिए सस्ती लोकप्रियता से।
  3. प्रोफेशनल दुनिया में आदमी और संस्था की एक गरिमा होती है। उसका समाज पर एक असर होता है।

मूल खबर…

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