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सुख-दुख

वरिष्ठ पत्रकार मेहरुद्दीन खान का निधन

देवप्रिय अवस्थी-

नवभारत टाइम्स में लंबे समय तक संत मेहरदास नाम से ‘कबीर चौरा’ स्तंभ लिखने वाले साथी महरुद्दीन खां का आज दादरी में इंतकाल हो गया। यह जानकारी सुहैल वहीद ने कुछ देर पहले एक पोस्ट में दी है। बेहद सरल स्वभाव वाले महरुद्दीन खां लंबे अरसे से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। सादर नमन।


इरा झा-

मेहरुद्दीन जी के साथ हमने बरसों साथ काम किया। उनसे मेरा बड़ा स्नेह था। यहां फेसबुक पर भी बातें होती रहती थीं मुझे याद है उनकी प्रतिभा राजेंद्र माथुर ने पहचानी थी और उनके आग्रह पर वो सरकारी नौकरी छोड़कर चले आए थे।वो एनबीटी से कैसे रुखसत किए गए इसकी कहानी फिर कभी।डाक्टर साब को मेरी श्रद्धांजलि।


नवीन जोशी-

मेहरुद्दीन जी नभाटा के पहले घुमन्तू संवाददाता थे। राजेन्द्र माथुर ने उन्हें यह नया दायित्व दिया था। कबीरचौरा भी उन्होंने ही मेहरुद्दीन खाँ से लिखवाया था।


प्रभात डबराल-

आज पता चला मेहरुद्दीन खान नहीं रहे…. क्या शानदार और बहुमुखी प्रतिभा के धनी इंसान थे मेहरुद्दीन… नवभारत टाइम्स के “कबीर चौरा” और अनेक खोजी रिपोर्टों के ज़रिए लोग उन्हें जानते ही हैं ..

लेकिन टीवी के लिए भी उन्होंने खूब लिखा.. हमारे दो TV कार्यक्रमों में तो उन्होंने जान डाल दी थी- पांडे जी कहिन, जश्ट इमेजिन…

दरअसल ये चुनावी कार्यक्रम उन्हीं की लेखनी को ध्यान में रखकर बनाए गए थे… लगातार बदलते चुनावी माहौल में तत्काल चुभते डायलाग लिखना मज़ाक़ नहीं होता.

मेहरुद्दीन भाई ने महीनों तक लगातार ये काम किया….
वो भी हर रोज़… वो प्रोडक्शन टीम के साथ साथ चलते रहे-आज यहाँ कल वहाँ….

उनके चुटीले दोहों और चौपाइयों का क्या कहना… बार बार याद आओगे….खान साहेब! आख़िरी सलाम साथी!


राजीव नयन बहुगुणा-

मुझे पता था कि डॉ मेहरुद्दीन खां मर जायेंगे। क्योंकि स्वयं के बारे में भी मेरे यही विचार हैं। वह नव भारत टाइम्स में मेरे सीनियर थे। उनकी प्रत्युतपन्न मति, त्वरा और टोपाज ब्लेड जैसी धारदार कलम की ताब सिर्फ मुझमें है।

देहरादून के पहाड़ों पर खनन माफिया के विरुद्ध चल रहे आंदोलन के ख़िलाफ़ लिखने के अलावा उनके उज्ज्वल चरित्र पर कोई धब्बा नहीं है।

मैंउनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना नहीं कर रहा हूँ। क्योंकि आत्मा कुछ होती नहीं है। उनकी देह मिट्टी में मिल चुकी है, जहां से नए नए पौधे उगेंगे।


राम चंद्र शुक्ला-

फेसबुक मित्र मेहरउद्दीनखान साहब का हमारे बीच से यूं अचानक चले जाने की खबर बहुत दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण खबर है।वे पिछले कई सालों से अपने फेसबुक मित्र थे।पिछले कई महीनों से उनकी कोई पोस्ट नही दिखाई दे रही थी।देश के लोकतांत्रिक व संवैधानिक मूल्यों,विचारों तथा मान्यताओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध एक बड़े पत्रकार का हमारे बीच से अचानक चले जाना बहुत निराशाजनक है।

वे दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अखबार “नवभारत टाइम्स” में कई सालों तक कार्यरत रहे थे। इस अखबार में उनके लिखे को तब खोज कर पढ़ता था जब उनसे कोई परिचय भी नही था।बाद में जब वे फेसबुक पर मित्र बने तब तो उनसे बहुत सारे मुद्दों पर विचार विमर्श होता रहा। उन्हें हार्दिक नमन व श्रद्धां जलि अर्पित करता हूँ तथा खिराजे अकीदत पेश करता हूँ।हम आपके द्वारा अपने जीवन व लेखन से पेश की गयी मिशाल, विचारों तथा मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का संकल्प लेते हैं तथा इस देश की गंगा जमुनी तहजीब को बनाए रखने की निरंतर कोशिश करते रहेंगे।


हर्ष देव-

ओह! पुराने संगी-साथी और मित्र। वह यूनियन के काम में भी सक्रिय रहते थे और हम फ़ॉलो करते थे। कबीर चौरा ख़ूब पसंद किया जाता था, पढ़ा जाता था। हार्दिक शोक सम्वेदना।


विक्रम राव-

My deep condolences. He was a good colleague in the Times group for long. May Allah Almighty shower upon Meharuddin bhai all His blessings.

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