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अखबारों ने पहला पन्ना पहले से ही बना रखा था, लेकिन इधर तो पासा ही पलट गया!

Sudeep Thakur-

दिल्ली-नोएडा के अखबारों के कई मित्र बता रहे हैं कि कल के अखबार के पहले पन्ने का पहले से तय लेआउट बदला जा रहा है…. मैंने तीन दशक से लंबी पत्रकारिता में करीब डेढ़ दशक पहले पन्ने पर लगाए हैं। लेकिन पिछले कुछ बरसों में पहले पन्ने का इतना पतन हुआ है कि पाठक को अंदाजा भी नहीं होता कि कैसे खबरों में खेल किया जा रहा है। एक्जिट पोल के बाद ही कई अखबारों के पहले पन्ने के लेआउट तैयार हो गए थे…यही नहीं कुछ संपादकों ने अपनी संपादकीय टिप्पणियों का खाका भी तैयार कर ऱखा था… कुछ तो कलम तोड़ लेखन की तैयारी में थे… लगता है उन्हें मौका नहीं मिलेगा…

Harsh Kumar-
जो डेस्क पर काम कर चुके हैं वो बता सकते हैं कि ले आउट शाम को ही बनते हैं, ये चुटकुले के हिसाब से सही है।

Sudeep Thakur
मैंने देश के कई बड़े अखबारों के न्यूज रूम और फ्रंट पेज पर जिम्मेदारी से काम किया है, मुझे पता है लेआउट कब और कैसे बनता है… मुझे पता नहीं आपको चुटकुला जैसा क्या लगा।

Anshumali Rastogi
मुझे सुधीश पचौरी का ख्याल आया कि कल सुबह ‘अमर उजाला’ में संभवतः उन्हीं का लेख होगा; मोदी स्तुति में. लेकिन, इधर तो पासा ही पलट गया.

Pankaj Mishra
अफसोस! उन संपादकों की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया, जो कलम तोड़ने की तैयारी में थे। अब पहले पन्ने का लेआउट भी तोड़ना होगा।

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