सोशल मीडिया पर भारतीय प्रधानमंत्री मोदीजी की चारों दिशाओं से डिग्री दिखाए जाने की आवाजें लहरा रही हैं। इतना ही नहीं लोगबाग उन्हें उनके द्वारा ही की कही गई बातों में घेर रहे हैं। लोग विष्णुरूप में प्रधानमंत्री की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं। ऐसा वे खुद ही कह चुके हैं। उनके प्रवक्ता भी उन्हें टीवी पर विष्णु अवतार बताते हैं। तब क्या अवतार से डिग्री दिखाने की या मांगने की जुर्रत करनी चहिए?
देखिए इस मसले पर कौन क्या लिखने/कहने और छापने की गुस्ताख़ी कर रहा है….
शीतल पी सिंह-
सौगंध राम की खाते हैं, हम डिग्री नहीं दिखायेंगे
जाकिर अली त्यागी-
9 साल पहले यानी 9 मई 2016 को अमित शाह प्रेस वार्ता के माध्यम से PM मोदी की डिग्री की कॉपी दिखा रहे थे, डिग्री सार्वजनिक कर रहे थे डिग्री की प्रतियां पत्रकारों को बांट रहे थे!
फ़िर आज कोर्ट में PM मोदी की डिग्री क्यो नही रखी जा रही है? क्यो अदालत “प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक नही की जा सकती” आदेश दे रही है?
क्या 9 साल पहले PC में दिखाई जाने वाली डिग्री की कॉपियां फ़र्ज़ी व भ्रमित करने वाली थी? डिग्री सार्वजनिक ना करना तो इसी तरफ़ इशारा कर रहा है!
9 साल पहले यानी 9 मई 2016 को अमित शाह प्रेस वार्ता के माध्यम से PM मोदी की डिग्री की कॉपी दिखा रहे थे, डिग्री सार्वजनिक कर रहे थे डिग्री की प्रतियां पत्रकारों को बांट रहे थे!
फ़िर आज कोर्ट में PM मोदी की डिग्री क्यो नही रखी जा रही है? क्यो अदालत "प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक… pic.twitter.com/FGSfkdoklR
ये वाली डिग्री जब पहले ही सार्वजनिक की जा चुकी है तो फिर लोग और क्या मांग रहे हैं? क्यों मांग रहे हैं?
मनीष सिंह-
डिग्री जो देखन मैं चला..
भक्तजनों। डिग्री की महिमा अपरंपार है। सृष्टि के निर्माण से आज तक रचयिता ने लाखों करोड़ों जीव, जंतुओं और वस्तुओं की रचना की। इसमे कुछ मूर्त है, और कुछ अमूर्त..
मूर्त वह, जो आप देख, छू और महसूस कर सकते है। वह दृश्यमान है, गंदा है, आम है, निकृष्ट है।
जो नही दिखता, वह दिव्य है, दैवीय है। डिग्री ऐसी ही वस्तु है। वह एक गूढ़ रहस्य है।
विश्व मे बिग बैंग और बरमूडा ट्राइएंगल का रहस्य सुलझ जाएगा। कभी तो EVM का भेद भी खुल ही जाएगा। मगर डिग्री..?? वह सृष्टि का मूल रहस्य है।
सभी वेद, पुराण, उपनिषद इस बिंदु पर मौन हैं। सूत्रों की माने कुरुक्षेत्र में पार्थ ने भी इस पॉइंट पर क्वेरी की थी।
तब समस्त गूढ़ विषयो पर खुलकर ज्ञान देने वाले, आकाश, पाताल, धरती, स्मार्ट सिटी, बुलेट ट्रेन, चंद्रयान का दर्शन करवाने वाले डिग्रीधर ने, डिग्री के दर्शन कराने से साफ इनकार कर दिया।
अनुवाद: हे पार्थ। तुम धरती, पाताल और आकाश में घूम-घूमकर, जो आवाज लगा लो। जो कुछ उखाड़ना चाहो, उखाड़ लो।
परंतु मैं अपनी डिग्री कभी नहीं दिखाऊंगा। मध्यकाल में भी इस रहस्य को जानने के प्रयास हुए। अपनी रचनावली में कबीरदास ने उल्लेख किया है।
वे डिग्री देंखने की ख्वाहिश में तमाम जीवन गुजारने के बाद उदास होकर खुद को कोसते हैं। अपने निष्फल प्रयासों को इस प्रकार शेर में ढाला है –
डिग्री जो देखन मैं चला, डिग्री न दिखावै कोय क्वालिफिकेशन देखहुं आपना, मुझसा डिग्रीहीन न कोय
रहीम कवि का तमाम जीवन भी, डिग्रीधर की डिग्री देंखने के प्रयास में गुजरा। यहां तक कि तंग आकर, एक बार तो अकबर ने भी उन्हें अपनी डिग्री दिखा दी। परंतु डिग्रीधर की डिग्री देखने की आस, दिल मे लिए ही वे, अल्लाह के बिलव्ड हो गए। उनका आखरी शेर था..
रहीम उखाड़े जो मही, भुईं पाताल अकास डिग्री दिखावै ना कभी, रखे मन महि पास।
अर्थात- रहीम कवि कहते है कि मनुष्य चाहे जो उखाड़ ले, धरती, पाताल और आकाश। मगर वो उच्च सत्तासीन अपनी अपनी डिग्री कभी नहीं दिखायेगा। और उसे अपने मन के अश्लील ख्यालों की तरह छुपाकर रखेगा।
आधुनिक काल मे भी इसकी कोशिश हुई। नई हिंदी के प्रथम साहित्यकार और अन्वेषक भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कोशिश की।
सूत्र बताते हैं कि एक बार वे इस रहस्य के अत्यंत करीब पहुँच गए थे। परन्तु उनके मार्ग में कोर्ट, कचहरी, यक्ष, दानव, खग, खर, मुनि, तड़ीपार सब आड़े आ गए।
वह अटेम्प्ट फ़्यूटाइल हो गया। अपनी पीड़ा उन्होंने इस छंद में व्यक्त की है।
धरती-पाताल आकाश, सब उखड़े कई बार कोर्ट-कचहरी देवता, यक्ष-देव-दानव खग-नर-मुनि- तड़ीपार
सर पटक मरे सब देखे, डिग्रीधर की निधि न पाई, भारतेंदु कहे गंभीर, अबे,भारतवासी का पाई?
इस सम्बंध में दिनकर का अपना मानना यह है कि आम मनुष्य को गूढ़ दैवीय रहस्यों को जानने का प्रयास करना नही चाहिए।
रवीश कुमार जी की बात तो सही है अगर डिग्री सार्वजनिक नहीं कर सकते तो राहुल गांधी जी को दिखा दे राहुल गांधी जी बता देंगे डिग्री सही है या नहीं
यूनिवर्सिटी को गर्व होना चाहिए था डिग्री दिखने में
जब देश के PM डिग्री नहीं दिखा सकते हैं तो फ़िर देश की जनता से क्यों प्रमाण पत्र मांगे… pic.twitter.com/px5jhh4zLx
सृष्टि के उच्च ऊर्जावान, गुप्त विषयो को, जिनका सत्य झेलने का सामर्थ्य मनुष्य में नही, उससे दूर रहना उचित है। वे डिग्रीधर की ओर से कहते है..
दो मुझे समर्थन, चन्दा दो पर इसमे गर कोई लोचा हो दे दो मुझको ज्ञानेश धाम रक्खो अपनी वोटर तमाम
हम EVM चलाकर खाएंगे पब्लिक पे असि न उठाएंगे पर नाश मनुज पर छाता है वह डिग्री मांगने आता है
ओरिजनल मांगने आया है आदेश कोर्ट का लाया है?? जो जज को साध न सकता है वो मुझे बांध कब सकता है!!
तमाम सनातनी विचारकों से अलग, कविवर राहत इंदौरी इस विषय पर कुछ अलग विचार देते है। वे कहते है-
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो यूनिवर्सिटी का चक्कर छोड़ो, छाप के डिग्री पार करो
फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो डिग्री मांगना खता हुई तो, एक नहीं सौ बार करो।
अब आप मुझे बतायें, कि डिग्री के इस एटर्नल, अनादि-अनंत प्रश्न पर, आप पूज्य दिनकर के विचारों से सहमत हैं, या कविवर राहत के??
सच्चे भारतीय हैं, तो जवाब अवश्य दें। और हां, इसे 11 लोगों को व्हाट्सप में समिधा की तरह डालकर, उनसे भी प्रश्न करना न भूलें।
जय जय डिग्रीधर।
शान लखनऊ-
मैं कल से दिल्ली HC की बात समझने की कोशिश कर रहा हूं लेकिन समझ नहीं आ सकी, कानून के अच्छे जानकर मित्र मुझे यदि समझा सकते हैं तो सिर्फ इस बात को समझा दे कि..
“जो डिग्री पहले से ही सार्वजनिक है और खुद देश के केंद्रीय गृह मंत्री ने ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सार्वजनिक की थी उस डिग्री को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता गोपनीयता के आधार पर ऐसा दिल्ली HC ने आदेश में क्यों कहा? यदि PM मोदी की डिग्री इतनी ही कॉन्फिडेंशियल थी तो फिर देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उसको सार्वजनिक क्यों किया??”
उपरोक्त सवाल का जवाब यदि कोई दे सकता है तो उसका स्वागत है ।
दूसरी बात कुछ लोग कह रहे हैं कि विपक्ष PM की डिग्री को लेकर इतना आतुर क्यों हैं क्यों पीछे पड़ा हुआ है उनकी डिग्री को लेकर, क्या ही फर्क पड़ता हो डिग्री असली है/नकली है इससे, ये फालतू की बात/विषय है, तो उन लोगों से मैं यही कहना चाहता हूं कि बहुत फर्क पड़ता है असली/नकली होने का क्योंकि जब कोई व्यक्ति चुनाव लड़ता है और हलफनामे के साथ यदि फॉर्जरी/गलत प्रमाण पत्र/ नकली दस्तावेज़ लगाता है, तो उस व्यक्ति पर…Representation of the People Act,1951 (लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951) के तहत कानूनी कार्यवाही हो सकती है ।
यदि कोई उम्मीदवार नामांकन के दौरान हलफनामे (फॉर्म 26) में गलत जानकारी देता है या महत्वपूर्ण जानकारी छिपाता है, जैसे कि संपत्ति, देनदारियां, शैक्षिक योग्यता, या आपराधिक रिकॉर्ड, तो यह अपराध माना जाता है जिसमें सजा के रूप में 6 महीने तक की जेल, जुर्माना, या दोनों हो सकती है।
भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं:
IPC धारा 465 (जालसाजी): अब BNS धारा 336 फर्जी दस्तावेज़ बनाने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना, या दोनों।
IPC धारा 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी): अब BNS धारा 338 धोखाधड़ी के इरादे से जालसाजी करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना।
IPC धारा 471 (फर्जी दस्तावेज़ को असली के रूप में उपयोग): अब BNS धारा 336 (उप-खंड के आधार पर) फर्जी दस्तावेज़ को असली के रूप में उपयोग करने पर 3 से 7 साल तक की जेल (जालसाजी की गंभीरता के आधार पर) और जुर्माना।
BNS धारा 229 (झूठा शपथपत्र): झूठा हलफनामा देने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। यह पहले IPC में अलग से निर्दिष्ट नहीं था, लेकिन BNS में स्पष्ट रूप से शामिल है।
Representation of the People Act, 1951 (लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951) के तहत, यदि गलत दस्तावेज़ या हलफनामे का मामला साबित होता है, तो उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर निर्वाचित उम्मीदवार की सदस्यता भी रद्द की जा सकती है।
उदाहरण 1: 2017 में तमिलनाडु के भद्राचलम निर्वाचन क्षेत्र से विधायक आलगा पुरम आर. स्वामीनाथन की सदस्यता 2017 में मद्रास उच्च न्यायालय ने रद्द कर दी थी। कारण था कि उन्होंने नामांकन में अपनी शैक्षिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी थी। स्वामीनाथन ने दावा किया था कि उनके पास स्नातक की डिग्री है, लेकिन यह साबित नहीं हुआ। अदालत ने उनकी जीत को शून्य घोषित कर दिया, उनकी विधायकी रद्द की गई, और मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया, जहां उच्च न्यायालय का फैसला बरकरार रहा।
उदाहरण 2: 2015 में उत्तर प्रदेश के एक स्थानीय निकाय चुनाव में रमेश चंद्र पांडे की सरपंच पद की सदस्यता इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रद्द की थी। उन्होंने फर्जी मार्कशीट जमा की थी, जो जांच में गलत पाई गई। यह मामला 10 साल बाद सामने आया, जब उनके प्रतिद्वंद्वी ने याचिका दायर की। अदालत ने उनकी जीत को अवैध घोषित किया, उनकी सरपंच की सदस्यता रद्द की गई, और उन्हें सजा भी हुई।
उदाहरण 3: 2019 में उत्तर प्रदेश उन्नाव से बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सदस्यता उत्तर प्रदेश विधानसभा द्वारा रद्द की गई। हालांकि यह मुख्य रूप से उनके आपराधिक मामले (बलात्कार और अन्य अपराध) के कारण था, लेकिन उनके हलफनामे में आपराधिक रिकॉर्ड को छिपाने का आरोप भी शामिल था। सेंगर ने नामांकन में अपने आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी थी, जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अनिवार्य है। उनकी विधायकी रद्द की गई, और वह जेल में हैं।
उदाहरण 4: 2017 में अब्दुल्ला आज़म ने उत्तर प्रदेश के स्वार विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीता। लेकिन उनके प्रतिद्वंद्वी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसमें दावा किया गया कि अब्दुल्ला ने नामांकन के समय अपनी आयु गलत बताई थी, अब्दुल्लाह आजम पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी जन्म प्रमाण पत्र चुनावी हलफनामे में लगाया था। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत, विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए, लेकिन जांच में पाया गया कि नामांकन दाखिल करने, जांच की तारीख, और परिणाम घोषणा के समय उनकी आयु 25 वर्ष से कम थी। इसके लिए उन्होंने कथित तौर पर फर्जी जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग किया था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 16 दिसंबर, 2019 को उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया, क्योंकि उनकी आयु पात्रता मानदंड को पूरा नहीं करती थी।
मैं माननीय "सुप्रीम कोर्ट" से ये पूछना चाहता हु कि ये जो "डिग्री सार्वजनिक" कर रहे है !
इसके खिलाफ अब्दुल्ला आज़म ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन नवंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा और उनकी याचिका खारिज कर दी। 18 अक्टूबर, 2023 को फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में उन्हें 7 साल की सजा सुनाई गई, जिसके बाद डेढ़ साल जेल में रहने के बाद जमानत मिली।
मैने बहुत आसान तरीके से आपको PM मोदी की डिग्री के मामले बात समझाने की कोशिश की है, PM मोदी की डिग्री कोई हास्य का पात्र नहीं है जिसपर हम सब हंसी-मजाक बनाए बल्कि ये एक गंभीर विषय है, PM मोदी की डिग्री असली/नकली मेरी इस पर मेरी कोई व्यक्तिगत राय नहीं है ये काम मेरा नहीं है मैने सिर्फ इस डिग्री विवाद के पीछे विपक्ष के क्या कानूनी आधार हो सकते हैं उसके बारे में आपको कानूनी जानकारी समस्त उदाहरणों के साथ दे दी है।
नोट: लेख बड़ा है लेकिन तथ्यों पर आधारित है कृपया आधी अधूरी पोस्ट पढ़ कर अपने विचार में मत साझा करें, लेखक की मंशा किसी व्यक्ति विशेष की छवि को क्षति पहुंचाना कदापि नहीं है।
PM से अपने स्तर से डिग्री सार्वजनिक करने का अनुरोध
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेज कर स्वयं अपने स्तर से अपनी डिग्री और उससे जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किए जाने का अनुरोध किया है.
अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि नरेंद्र मोदी अपने डिग्री से जुड़े विवादों तथा इस संबंध में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले से अवगत होंगे, जिसमें उनकी डिग्री को सार्वजनिक नहीं किए जाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के इस निर्णय पर विवाद हो रहा है लेकिन यह निर्णय उन्हें अपने स्तर से अपनी डिग्री सार्वजनिक करने से बिल्कुल नहीं रोकता है.
अमिताभ ठाकुर ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने हमेशा लोक जीवन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व तथा शुचिता की बात की है. अतः उन्होंने नरेंद्र मोदी से स्वयं अपने स्तर से अपनी डिग्री को सार्वजनिक करते हुए इस नकारात्मक विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर देने का अनुरोध किया है.
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को दिल्ली हाई कोर्ट के ऑर्डर से इतर जाकर लोकजीवन में शुचिता और पारदर्शिता के साथ जनता के विश्वास को अक्षुण्ण रखने के लिए स्वयं अपने स्तर से अपने डिग्री के तथ्यों को सार्वजनिक करने के अनुरोध सहित @narendramodi@PMOIndia#modidegree#DegreeChoripic.twitter.com/Enq2rhoqUQ
— Amitabh Thakur (Azad Adhikar Sena) (@Amitabhthakur) August 26, 2025
संलग्न– श्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र की प्रति