दीपक शर्मा-
पांच साल बीत जाने के बाद भी भारत सरकार यह नहीं बता पाई है कि लद्दाख में चीन की छुपी घुसपैठ और ज़मीन कब्ज़ाने की कार्रवाई से वह कैसे चकमा खा गई। इससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात यह है कि सरकार ने जमीनी हकीकत को छुपाने की कोशिश की है।
अब देश के सामने एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है: अमेरिकी दबाव में आकर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को अचानक क्यों रोक दिया, जबकि भारतीय सेना को मोर्चे पर बढ़त मिल चुकी थी? यह ऑपरेशन मात्र तीन दिन में ही खत्म कर दिया गया — और वो भी अमेरिकी उप राष्ट्रपति जे.डी. वांस की प्रधानमंत्री मोदी से एक फोन कॉल के बाद।
आमतौर पर युद्धविराम की प्रक्रिया दोनों पक्षों के बीच तय शर्तों और समझौतों के तहत होती है। लेकिन इस मामले में कोई लिखित समझौता नहीं हुआ — सिर्फ एक मौखिक समझ बनी — जिसमें न तो अमेरिका और न ही पाकिस्तान ने यह वादा किया कि पाकिस्तान की प्रायोजित आतंकवादी मशीनरी को खत्म किया जाएगा। संघर्ष की असली वजह को हाथ तक नहीं लगाया गया, बल्कि अमेरिका ने पाकिस्तान को उसके कृत्यों से बचा लिया।
परिणाम? डोनाल्ड ट्रंप — जो ग्रीनलैंड, पनामा नहर और यहां तक कि गाज़ा पट्टी को खरीदने का सपना देख चुके हैं — अब अपनी नजर कश्मीर पर लगाए बैठे हैं। और यह तब हो रहा है जब वे भारत के खिलाफ हो रहे सीमा-पार आतंकवाद पर एक शब्द भी नहीं बोलते।

(Hindi translation of tweet of Famous Foreign Strategist Brahma Chellaney)
जयराम रमेश-

प्रधानमंत्री का लंबे समय से टलता आ रहा राष्ट्र के नाम संबोधन राष्ट्रपति ट्रंप के कुछ मिनट पहले किए गए खुलासों से पूरी तरह दब गया। प्रधानमंत्री ने उन पर एक शब्द भी नहीं कहा। क्या भारत ने अमेरिका की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है? क्या भारत पाकिस्तान के साथ वार्ता के लिए किसी तटस्थ स्थल पर सहमत हो गया है? क्या अब भारत अमेरिका की इन मांगों को मान लेगा कि वह ऑटोमोबाइल, कृषि और अन्य क्षेत्रों में अपने बाज़ार खोल दे?
प्रधानमंत्री को तत्काल सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक करनी चाहिए — ऐसा कुछ जो उन्होंने पिछले बीस दिनों में सधे ढंग से टाल रखा है।
आने वाले महीने सतर्क कूटनीति और सामूहिक संकल्प की मांग करेंगे। सिर्फ़ एक-दो लाइनें बोलना इस वक्त की जरूरतों का विकल्प नहीं हो सकते।
हम अपनी सशस्त्र सेनाओं को बिना किसी शर्त के सलाम करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। हम हर समय 100% उनके साथ हैं। लेकिन प्रधानमंत्री को अब भी कई सवालों के जवाब देने बाकी हैं।
सुप्रिया श्रीनेत-
अपने 22 मिनट के राष्ट्र के संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन चीज़ों की चर्चा नहीं की वो यह हैं-
- ट्रम्प बार बार क्यों कह रहे हैं कि America ने ceasefire करवाया, आज तो उन्होंने यहाँ तक कहा कि उन्होंने आपको व्यापार का हवाला देकर धमकाया?
- जब भारतीय सेना पाकिस्तान को नाको चने चबवा रही थी, और आप ही ने कहा हमारी सेना आक्रामक कार्यवाही से पाकिस्तान बौखला गया था, तब ऐसे में आपने ceasefire क्यों किया?
- आपने ट्रम्प की कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश पर कुछ नहीं कहा. क्या आपको अमेरिका की दखलंदाज़ी मंज़ूर है?
- आप अमेरिका के उस वक्तव्य पर भी खामोश रहे जिसमें भारत और पाक प्रधानमंत्रियों की किसी तीसरी जगह मुलाकात की चर्चा की गई. क्या आप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने वाले हैं? क्या आप पाकिस्तान से diplomatic संबंध स्थापित करने वाले हैं?
- हमारी सेना ने पाकिस्तान में स्थित आतंकीं कैम्प ज़रूर तबाह किए, लेकिन वो दहशतगर्द कहाँ हैं जिन्होंने पहलगाम में निर्मम हत्या की?
- जब सारा देश और विपक्ष आपके साथ था तब आपने POK से पाकिस्तान को क्यों नहीं खदेड़ा?
- हमारे BSF जवान पूर्णम साहू जो 19 दिन से पाकिस्तान की गिरफ्त में हैं, उनको हम वापस कब लाएंगे?
- और एक अंतिम सवाल, पहलगाम में इतनी बड़ी सुरक्षा और intelligence की चूक हुई कैसे? इसके लिए आप ज़िम्मेदार हैं या गृह मंत्री?

इन सवालों का जवाब देश आपके संबोधन के बाद भी कर रहा है – जिनमें से कुछ ज़रूरी सवाल हमारी संप्रभुता को लेकर हैं।


