प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले दिनों टीवी पर आए। कुल जमा 22 मिनट भाषण दिया। उनके भाषण ने देशवासियों को फालुदा कुल्फी सरीखा स्वाद दिया। प्रधानमंत्री ने किसी भी फंसे सवाल का जवाब नहीं दिया। ऊपर से नई समस्याएं देश के सामने और पैदा कर दीं। नीचे एक एक कर पढ़िए और लास्ट में वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह का गुस्सा भी बर्दाश्त कीजिए– जो जायज है…
राहुल देव-
असली ख़बर परम आदरणीय अमित जी नहीं बता रहे हैं कि अमेरिका, पाकिस्तान और चीन ने भारत के खिलाफ हाथ मिला लिए हैं।
उसी षड्यंत्र के तहत भारत की सम्प्रभुता और उसके विश्वनेता प्रधानमंत्री के क़द और यश को ध्वस्त करने के लिए प्रधानमंत्री जी के ८ बजे के भाषण के पूरे दो घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप दोबारा दुनिया को बता रहे थे कि यह युद्ध विराम (भारतीय संस्करण के अनुसार ‘आपसी समझ’ understanding) सीधे सीधे उनके, उपराष्ट्रपति वैंस और विदेश मंत्री रूबियो के प्रयासों से संभव हुआ था।
यह भी कि सऊदी अरब, तुर्किए ने भी भारत पर दबाव बनाया था। और यह भी कि उन्होंने दोनों देशों के आगे भरपूर व्यापार को बढ़ावा देने की लालच भी रखा है।
दुनिया भर के प्रतिष्ठित अख़बार-चैनल भी यही झूठ फैलाने के षड्यंत्र में शामिल हैं। वे बता रहे हैं किसने किसको कब और क्या कहने के लिए फ़ोन किया, कि भारत-पाकिस्तान कैसे एकदम अचानक इस ‘समझ’ के लिए तैयार हो गए।
यह तो महान भारतीय मीडिया है जो सत्य की मशाल को मज़बूती से थामे है। अभिनन्दन हमारे स्टूडियो-बाँकुरे जाँबाज़ सिपाहियों का।

अजीत साही-
नरेंद्र मोदी ने जिन सवालों के जवाब कल अपने टीवी भाषण में नहीं दिए वो सवाल Nidheesh Tyagi ने पूछ दिए हैं. यहाँ मैं उनका सार दे रहा हूँ.
- आतंकवादी कौन थे, कहां से आए थे, कैसे आ गये, कैसे चले गये?
- पहलगाम से सुरक्षा हटाने का फ़ैसला किसका, क्यों, किस प्रक्रिया से हुआ?
- इस भूल चूक ग़लती का प्रभारी कौन है?
- इंटेलिजेंस फ़ेल्यर पर क्या कार्रवाई हुई?
- जब पहलगाम का मामला गंभीर था तो मोदी चुनावी रैली और अडानी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने कैसे चले गये?
- सर्वदलीय बैठकों में आने से मोदी क्यों कतरा रहे थे?
- पूरी दुनिया में उन महंगे जहाज़ों को गिराने की बात हो रही है, जिनके विवादास्पद सौदों के बारे में बात करने से उनकी सरकार बचती रही है. उन जहाज़ों का क्या हुआ?
निधीश आगे लिखते हैं —
“देश को ये नहीं बताया कि हमले से क्या हासिल हुआ. और सीज़फ़ायर से क्या. ये भी नहीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति को यकायक भारत के बारे में भ्रामक प्रचार करने की क्या पड़ी है. वह बार बार क्यों कह रहे हैं कि उन्होंने बीच बचाव कर के दोनों देशों के बीच सुलह और संघर्ष विराम करवा दिया. और ये भी कि व्यापार के लालच में दोनों देश सुलह के लिए मान गये.
“भारत की कश्मीर को लेकर विदेश नीति बदल गई है, तो देश को भरोसे में लेना चाहिए था. क्या अब कश्मीर मध्यस्थता के लिए खुल गया है, ये स्पष्ट मोदी ने तो नहीं किया, पर ट्रम्प और दूसरे राजनयिक ऐसा कह रहे हैं. ट्रम्प जब कश्मीर पर मध्यस्थता की खुले आम पहल कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री को भारत की नीति साफ़ करनी चाहिए.
“पूरे भाषण में सिंदूर की दुहाई तो मोदी जी ने कई बार दी, पर जिनका सिंदूर उजड़ा, उनकी जो तौहीन मोदी जी के समर्थकों ने की, उसके बारे में चुप्पी बनाए रखी. “सीज़फ़ायर का फैसला मोदी जी के स्तर पर ही हुआ होगा, अगर ट्रम्प ने करवाया है तो, पर उसका एलान करने वाले विदेश सचिव विक्रम मिसरी की जो बिना बात सोशल मीडिया में ट्रोलिंग हुई उसके बारे में उन्होंने बोलना जरूरी और उचित नहीं समझा.
“राष्ट्र के नाम संदेश देते हुए मोदी जी चाहते तो दो शब्द मुख्यधारा के झूठे, मक्कार और धूर्त एंकर और उनके मालिकान के लिए भी कह सकते थे, कि तमीज़ में रहें, पर शायद वह ज़रूरी और उचित नहीं लगा. जो फ़ेक न्यूज फैला रहे थे. जिनकी खिल्ली पूरी दुनिया और पाकिस्तान में उड़ रही थी.
“आख़िरी बात, उन्होंने कश्मीर की जनता के बारे में कुछ कहना ज़रूरी नहीं समझा, जो आतंकवाद के ख़िलाफ़ इतनी संख्या में पहली बार सड़कों पर उतरी, और जब बाक़ी भारत में जो बच्चे पढ़ने और नौजवान कारोबार करने गये, उनके साथ हिंसा और दूसरी ज़्यादतियाँ की गईं.
“ये सारे मुद्दे देश के लिए तो जरूरी थे. भले संदेश में आने से रह गये हों.”
वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह अमेरिका में हैं इन दिनों। पश्चिम में भारत को लेकर क्या कुछ चल रहा है- वरिष्ठ पत्रकार इसे लेकर भारी नाराज हैं। उनका कहना है कि मोदीजी ने देश की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला दी। किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया और नई समस्याएं पैदा कर दीं, अलग से। शीतल जी की बात भी सुनी जाए…..


